केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने कहा है कि 341 केंद्रीय स्वास्थ्य सेवा योजना (सीजीएचएस) वेलनेस सेंटर 44 लाख लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं, राष्ट्रीय क्षय रोग और श्वसन रोग संस्थान में तीन सीजीएचएस वेलनेस सेंटर और रोबोटिक यूनिट की स्थापना से उनकी स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में कवरेज और बेहतरी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने आज दिल्ली में अलकनंदा, रोहिणी सेक्टर-16, वसंत विहार में तीन सीजीएचएस वेलनेस सेंटरों के साथ-साथ राष्ट्रीय क्षय रोग और श्वसन रोग संस्थान (एनआईटी और आरडी) में एक रोबोटिक यूनिट राष्ट्र को समर्पित करते हुए यह वात कही। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के साथ केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार, केंद्रीय विदेश एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध राज्य मंत्री डॉ. मीनाक्षी लेखी, विदेश मंत्रालय और सांसद रमेश बिधूड़ी भी शामिल हुए।
डॉ. मांडविया ने कहा कि सरकार द्वारा किए गए सुधारों के कारण, केंद्रीय स्वास्थ्य सेवा योजना के अंतर्गत कवर किए गए शहरों की संख्या 2014 में 25 से बढ़कर 2023 में 80 हो गई है और जल्द ही भारत के 100 शहरों तक पहुंच इनकी पहुंच होगी।
इस अवसर पर अपने संबोधन में डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य सेवा योजना के लक्ष्य “आपका स्वास्थ्य, हमारा लक्ष्य” को देखते हुए यह सुनिश्चित करना हमारा दायित्व है कि सीजीएचएस लाभार्थी अपने निवास के निकट ही स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने में सक्षम हों, जिससे देश के अंदरूनी हिस्सों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ सके। डॉ. मंडाविया ने यह भी कहा कि सर्जरी की आवश्यकता वाले तपेदिक पीड़ित रोगियों के लिए इष्टतम स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने वास्ते रोबोटिक सर्जरी उन्हें सही देखभाल प्रदान करने में सहायक होगी। उन्होंने कहा कि देश के अंतिम छोर तक सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना हमारा लक्ष्य है और एक स्वस्थ राष्ट्र की नींव है।
एक स्वस्थ, तकनीकी रूप से उन्नत और समृद्ध राष्ट्र को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि किफायती दरों पर व्यापक गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य देखभाल के प्रयास में, एक बहुस्तरीय दृष्टिकोण अपनाया गया है जिसमें स्वास्थ्य मंत्रालय ने पैकेज में संशोधन किया है। सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में सीजीएचएस पैकेज की दरें, लाभार्थियों की गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बनाने के लिए की गई है इससे लाभार्थियों और अस्पतालों दोनों को उनके लेनदेन में लाभ होगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस उद्देश्य के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण मंच बनाया गया है और इसे आयुष्मान भारत के लिए भी लागू किया गया है। यह सुविधा निजी अस्पतालों को लाभार्थियों को प्राथमिकता उपचार प्रदान करने के लिए संसाधनों से लैस करने की प्रक्रियाओं को आसान बनाएगी। डॉ. मंडाविया ने आगे कहा कि डिजिटल तकनीक का लाभ उठाते हुए, प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है जिससे लाभार्थियों को इस प्रणाली में सरलता का अनुभव हो।
डॉ. मंडाविया ने कहा कि दुनिया में निर्धारित 10 में से 4 दवाएं भारत में बनी जेनेरिक दवाएं हैं। जन औषधि दवाएं सीजीएचएस कल्याण केंद्रों में भी प्रदान की जाती हैं, न केवल सीजीएचएस लाभार्थियों के लिए, बल्कि सभी के लिए। स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचे के परिवर्तन का शुभारंभ करते हुए, डॉ. मंडाविया ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में एक एक लाखएक 1.6 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित हैं, प्रत्येक 10,लाख 60 हजार लोगों पर एक आयुष्मान आरोग्य मंदिर जनता को समग्र स्वास्थ्य उपचार प्रदान करता है।
इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ. मनस्वी कुमार, केंद्र सरकार स्वास्थ्य सेवा के निदेशक डॉ. मनोज जैन और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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