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स्वदेशी रूप से निर्मित सतत विमानन ईंधन (SAF) मिश्रण का उपयोग करते हुए देश की पहली वाणिज्यिक यात्री उड़ान की आज सफलतापूर्वक शुरूआत की गई

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने प्रधानमंत्री द्वारा स्पष्ट रूप से निर्धारित किए गए दृष्टिकोण के अनुरूप भारत को 2047 तक ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि. “यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि पेट्रोलियम क्षेत्र को प्रधानमंत्री मोदी के इस दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में बहुत योगदान देना पड़ेगा।” हरदीप सिंह पुरी आज नई दिल्ली में उद्योग एवं मीडिया जगत की एक सभा को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव पंकज जैन भी मौजूद थे।

विमानन क्षेत्र को कार्बन रहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण विकास के रूप में, स्वदेशी रूप से निर्मित सतत विमानन ईंधन (एसएएफ) मिश्रण का उपयोग करते हुए देश की पहली वाणिज्यिक यात्री उड़ान की आज सफलतापूर्वक शुरूआत की गई। पुणे से दिल्ली के लिए, एयर एशिया की उड़ान (आई5 767) ने प्राज इंडस्ट्रीज लिमिटेड (प्राज) के साथ साझेदारी करते हुए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा आपूर्ति किए गए एसएएफ मिश्रित विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) के साथ उड़ान भरी। हरदीप सिंह पुरी ने हवाई अड्डे पर इस विशेष उड़ान का स्वागत किया।

हरदीप सिंह पुरी ने इस अवसर पर कहा कि यह देश को 2070 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन की दिशा में किए जाने वाले कोशिशों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा और उन्होंने कहा कि मुझे इस ऐतिहासिक अवसर का गवाह बनने और एसएएफ मिश्रित एटीएफ निर्मित ईंधन की पहली वाणिज्यिक उड़ान का साक्षी बनने पर खुशी महसूस हो रही है। उन्होंने कहा कि यह पहली घरेलू वाणिज्यिक यात्री उड़ान होगी जिसमें प्रयोगिक रूप से 01 प्रतिशत तक एसएएफ सम्मिश्रण किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि 2025 तक, अगर हम जेट ईंधन में 01 प्रतिशत एसएएफ सम्मिश्रण करने का लक्ष्य निर्धारित करते हैं, तो भारत को प्रति वर्ष लगभग 14 करोड़ लीटर एसएएफ की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि ज्यादा महत्वाकांक्षी बनते हुए अगर हम 05 प्रतिशत एसएएफ मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित करते हैं, तो भारत को प्रति वर्ष लगभग 70 करोड़ लीटर एसएएफ की आवश्यकता होगी।

हरदीप सिंह पुरी ने विमानन का पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों में कमी लाने की दिशा में स्वदेशी समाधान विकसित करने के लिए अपने-अपने क्षेत्रों के दिग्गजों जैसे इंडियन ऑयल, एयर एशिया और प्राज इंडस्ट्रीज को बधाई दिया और उनकी सराहना की और उन्होंने भारत में एसएएफ को व्यापक रूप से अपनाने का मार्ग प्रशस्त करते हुए आत्मनिर्भर भारत बनने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण को दोहराया। इस अवसर पर, एस एम वैद्य, अध्यक्ष, इंडियन ऑयल, एयर एशिया के प्रबंध निदेशक आलोक सिंह भी उपस्थित हुए।

वैकल्पिक एवं दीर्घकालिक ईंधन स्रोतों की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए, हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि, “हाल के वर्षों में एसएएफ उत्पादन प्रौद्योगिकी ने बहुत प्रगति की है। पारंपरिक जेट ईंधन के विपरीत, एसएएफ का उत्पादन नवीकरणीय स्रोतों जैसे कृषि अपशिष्ट, ठोस अपशिष्ट एवं वानिकी अवशेषों से प्राप्त किया जाता है। इसका मतलब यह है कि एसएएफ में पारंपरिक जेट ईंधन की तुलना में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को 80 प्रतिशत तक कम करने की क्षमता मौजूद है।”

आत्मनिर्भर भारत के लिए अपने केंद्रित दृष्टिकोण के साथ, पेट्रोलियम मंत्री ने यह भी कहा कि भारत में स्वदेशी फीडस्टॉक एवं प्रौद्योगिकी के रूप में गन्ने के शीरे का उपयोग करते हुए एसएएफ का उत्पादन 2070 तक नेट जीरो की प्राप्ति वाली हमारी प्रतिबद्धता के अनुरूप आत्मनिर्भरता और विमानन क्षेत्र को कार्बन रहित करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी, यानी 2005 के स्तर से 2030 तक अपने सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन क्षमता में 45 प्रतिशत तक कमी लाने की प्रतिबद्धता) को प्राप्त करने के लिए भारत ऊर्जा अवस्थांतर और जैव ईंधन जैसी वैकल्पिक ऊर्जा के लिए विश्व के सबसे प्रबल समर्थक देशों में से एक है।

भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र पर प्रकाश डालते हुए, हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यह लगभग 08 मिलियन टन एटीएफ की खपत करता है और 2019 (कोविड-19 से पहले) में लगभग 20 मिलियन टन जीएचजी का उत्सर्जन करता था। उन्होंने कहा कि, “भारत में प्रति वर्ष 19 से 24 मिलियन टन एसएएफ का उत्पादन करने की संभावित क्षमता है जबकि 50 प्रतिशत के मिश्रण पर विचार करते हुए भी देश में एसएएफ की अनुमानित अधिकतम आवश्यकता 2030 तक प्रति वर्ष लगभग 08 से 10 मिलियन टन है।”

पेट्रोलियम मंत्री पुरी ने आज के ऐतिहासिक दिन पर टिप्पणी करते हुए गर्व के साथ कहा कि, “स्वदेशी जैविक फीडस्टॉक (गन्ना शीरे) का उपयोग न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा बल्कि किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त करने में भी सहायता प्रदान करेगा। 01 प्रतिशत एसएएफ सम्मिश्रण करने से, फीडस्टॉक के रूप में गन्ने की आपूर्ति करके 05 लाख से ज्यादा किसान लाभान्वित होंगे। इसके अतिरिक्त, 01 लाख से ज्यादा हरित नौकरियां भी प्राप्त होगी।” उन्होंने कहा कि यह भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अंतरराष्ट्रीय एसएएफ केंद्र में परिवर्तित होते हुए एक उल्लेखनीय बदलाव ला सकता है।

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