पिछले एक दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था का उल्लेखनीय गति से डिजिटलीकरण हो रहा है। फिर भी, राष्ट्रीय आय एवं रोजगार में डिजिटल अर्थव्यवस्था के योगदान पर कोई विश्वसनीय एवं सामयिक अनुमान उपलब्ध नहीं हैं। आर्थिक विकास, रोजगार एवं सतत विकास में डिजिटल अर्थव्यवस्था की भूमिका को मापना और समझना नीति निर्माताओं एवं निजी क्षेत्र दोनों के लिए बहुत आवश्यक है।
इसकी आवश्यकता की पहचान करते हुए, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ‘भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का अनुमान और माप’ शीर्षक से एक व्यापक रिपोर्ट जारी की है। यह संसाधनों को संरेखित करने एवं उपयुक्त विकास रणनीतियों को अपनाने में मदद कर सकता है।
डिजिटल प्रौद्योगिकियों की क्रॉस-कटिंग और एकीकृत प्रकृति होने के कारण एक विशिष्ट डिजिटल अर्थव्यवस्था की अवधारणा को परिभाषित करना और मापना कठिन हो जाता है। इसके अलावा, राष्ट्रीय खातों की पारंपरिक प्रणाली नई अर्थव्यवस्था के मापन में प्रत्यक्ष योगदान नहीं देती है। हालांकि यह समस्या केवल भारत के लिए नहीं है। कुछ देशों ने अपनी डिजिटल अर्थव्यवस्था को आकार देने की कोशिश की है और प्रगति की राह पर हैं।
इस रिपोर्ट में प्रस्तुत अनुमानों के साथ, भारत कुछ देशों में से एक और विकासशील देशों में पहला होगा, जिसने अपनी डिजिटल अर्थव्यवस्था के स्वरूप प्रदान करने हेतु सबसे सामयिक अनुमान तैयार करने के लिए आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) संरचना का उपयोग किया है। यह रिपोर्ट एशियाई विकास बैंक (एडीबी) द्वारा समर्थित इनपुट-आउटपुट दृष्टिकोण का उपयोग करके वैकल्पिक अनुमान भी प्रदान करती है। यह रिपोर्ट ओईसीडी दृष्टिकोण से आगे बढ़कर व्यापार, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, बीमा (बीएफएसआई) और शिक्षा जैसे पारंपरिक उद्योगों के डिजिटल अंश को भी शामिल करती है। भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का अनुमान 2022-23 में राष्ट्रीय आय का 11.74% है। जिसका मतलब है कि 2022-23 में डिजिटल अर्थव्यवस्था जीडीपी में लगभग 31.64.94 लाख करोड़ रुपये ( लगभग 402 बिलियन अमेरिकी डॉलर) थी। डिजिटल-सक्षम उद्योग, जिसमें सूचना एवं संचार से संबंधित सेवाएं, दूरसंचार (जिसे पारंपरिक रूप से आईसीटी क्षेत्र कहा जाता है), और इलेक्ट्रॉनिक घटकों, कंप्यूटरों और संचार उपकरणों का निर्माण शामिल है, सबसे बड़ा योगदानकर्ता है, जो जीवीए का 7.83% है। नए डिजिटल उद्योग, जिसमें बड़े प्रौद्योगिकी खिलाड़ी, अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म एवं मध्यस्थ, और डिजिटल मध्यस्थों पर निर्भर कंपनियां शामिल हैं, जीवीए का लगभग 2% हिस्सा हैं। तीन पारंपरिक उद्योगों (बीएफएसआई, व्यापार और शिक्षा) का डिजिटल योगदान, जो ओईसीडी संरचना का हिस्सा नहीं हैं लेकिन हमारे अनुमानों में शामिल हैं, राष्ट्रीय जीवीए का 2% है, जो नए डिजिटल उद्योगों के बराबर है। यह एक स्पष्ट संकेत है कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे आईसीटी उद्योगों के दायरे से आगे बढ़ रही है, डिजिटल प्लेटफार्मों और भौतिक क्षेत्रों के डिजिटलीकरण के माध्यम से अर्थव्यवस्था के सभी हिस्सों में फैल रही है।
रिपोर्ट के अनुमानों के आधार पर, भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर समग्र अर्थव्यवस्था की तुलना में लगभग दोगुनी होने की उम्मीद है, जो 2030 तक राष्ट्रीय आय का लगभग पांचवां भाग योगदान देगी। अल्पावधि में, सबसे उच्च वृद्धि डिजिटल मध्यस्थों और प्लेटफार्मों की वृद्धि से होने का अनुमान है, इसके बाद उच्च डिजिटल प्रसार और अर्थव्यवस्था के बाकी हिस्से का डिजिटलीकरण होगा। 2022-23 में, डिजिटल अर्थव्यवस्था में 14.67 मिलियन श्रमिकों का योगदान था, जो भारत की अनुमानित कार्यबल का 2.55% है।
यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत संरचना के आधार पर भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के विश्वसनीय, ग्राह्य एवं वर्तमान अनुमानों के पहले सेट को संकलित करने की एक कोशिश है। इस रिपोर्ट से प्राप्त जानकारियां नीति निर्माताओं, व्यवसायों और अन्य हितधारकों के लिए बहुमूल्य हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था पर सटीक डेटा ज्यादा प्रभावी नीति निर्णय लेने की अनुमति देगा, जिससे लक्षित मध्यवर्तन एवं निवेश डिजिटल विकास का समर्थन करेंगे। व्यवसायों को अपने क्षेत्रों में डिजिटल प्रौद्योगिकियों के योगदान को समझ रखने से रणनीतिक निर्णय लेने, नवाचार को बढ़ावा देने और वैश्वीकरण के बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
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