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लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान दो महीने से लागू आदर्श आचार संहिता (MCC) पर निर्वाचन आयोग की दूसरी स्वत: प्रेरित रिपोर्ट

निर्वाचन आयोग ने पारदर्शिता और खुलासे के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता में, आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) के लागू होने के दो महीने पूरे होने पर राजनीतिक दलों की शिकायतों के आधार पर एमसीसी के तहत की गई कार्रवाइयों की स्थिति को अद्यतन करने का निर्णय लिया है। यह इसके लागू होने के पहले महीने के बाद एमसीसी अपडेट देने की आयोग की पारदर्शिता पहल की निरंतरता में है। इस बारे में की गई कार्रवाई के कुछ विवरण भी दिए गए ताकि गलतफहमियां, भले ही छोटी या सीमित हों, उन्हें ठीक किया जाए और रोका जाए।

आयोग ने इस जानकारी को सार्वजनिक करने का विकल्प चुना है ताकि सबसे महत्वपूर्ण हितधारकों यानी मतदाताओं और राजनीतिक दलों को चुनाव को लेकर उनके लिए समान अवसर बनाए रखने के लिए इस बारे में किए गए उपायों की तत्काल जानकारी मिल सके, जिस पर भारत को गर्व है।

मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों ज्ञानेश कुमार तथा सुखबीर सिंह संधू की मदद से आयोग एमसीसी के कथित उल्लंघन के देश भर में लंबित मामलों की दैनिक निगरानी करता है और कार्रवाई समयबद्ध तरीके से और सर्वोच्च प्राथमिकता पर की जाती है।

प्रारंभ में, आयोग राजनीतिक दलों, विशेष रूप से प्रमुख राष्ट्रीय दलों, जिनमें से अधिकांश स्टार प्रचारक हैं, के शीर्ष नेताओं से अपेक्षा करता है कि वे वर्तमान चुनावों में अपने प्रचार अभियानों के जरिए अच्छे उदाहरण स्थापित करेंगे। देश के नाजुक संतुलित सामाजिक ताने-बाने पर किसी भी स्थायी आघात से बचने के लिए मतदान के शेष चरणों में अपने बयानों/कथनों को सही करना मुख्य रूप से उन्हीं की जिम्मेदारी है।

एमसीसी के लागू होने के दो महीनों के दौरान लिए गए कुछ निर्णय निम्नलिखित हैं:

1. लोकसभा के आम चुनावों की घोषणा के साथ 16 मार्च 2024 को आदर्श संहिता लागू हुई और अब चार चरण समाप्त हो चुके हैं।

आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) लागू होने के लगभग दो महीने पूरे होने के बाद, विभिन्न राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों द्वारा निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर अभियान काफी हद तक हिंसा मुक्त, कम शोर शराबा, कम अव्यवस्थित और घुसपैठ, प्रलोभन तथा आडंबर से मुक्त रहा है।

भारत का चुनाव आयोग मतदाताओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी के साथ शांतिपूर्ण, प्रलोभन मुक्त चुनाव कराने की मूल कार्यप्रणाली से मोटे तौर पर संतुष्ट है।

चौथे चरण तक पूरे देश में उत्साह और उत्सव की भावना के साथ शांतिपूर्ण मतदान, विशेषकर मणिपुर, त्रिपुरा, वामपंथी उग्रवाद क्षेत्रों, पश्चिम बंगाल, जम्मू एवं कश्मीर, दूर-दराज और दुर्गम क्षेत्रों में लोकतंत्र की गहरी जड़ों को दर्शाता है। आयोग नागरिकों को नीचे दिए गए लिंक पर विशेष रूप से बनाई गई फोटो गैलरी में भारतीय चुनावों की जीवंतता की झलक देखने के लिए आमंत्रित करता है: https://www.eci.gov.in/ge-2024-photogallery

आयोग ने पारदर्शिता के स्तर को बढ़ाने के उपाय के रूप में घोषणा के दिन से अब तक 63 प्रेस नोट जारी किए हैं।

अब तक 16 राजनीतिक दलों के 25 प्रतिनिधिमंडल आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघन पर अपनी शिकायतें दर्ज कराने के लिए आयोग से मिल चुके हैं। इसके अलावा राज्यों में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के स्तर पर भी कई प्रतिनिधिमंडल मिल चुके हैं।

सभी राजनीतिक दलों को अल्प सूचना पर भी तुरंत समय आवंटित किया गया और उनकी शिकायतों को धैर्यपूर्वक सुना गया।

विभिन्न राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों द्वारा ईसीआई और सीईओ के स्तर पर प्रचार संबंधी या स्पष्टीकरण संबंधी शिकायतों को छोड़कर लगभग 425 प्रमुख शिकायतें दर्ज की गई हैं। इनमें से 400 मामलों में कार्रवाई की गई (या मामला निपटाया गया)। कांग्रेस, भाजपा और अन्य दलों द्वारा क्रमशः लगभग 170, 95 और 160 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से अधिकतर शिकायतों पर कार्रवाई की जा चुकी है।

कांग्रेस और भाजपा की एक-दूसरे के खिलाफ कुछ शिकायतें लंबित हैं, जिनमें सांप्रदायिक, जाति, क्षेत्रीय भाषा विभाजन या भारत के संविधान की पवित्रता पर शीर्ष स्टार प्रचारकों द्वारा विभाजनकारी बयानों के साथ-साथ एमसीसी के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है। अतीत में, आयोग उन व्यक्तिगत नेताओं को नोटिस जारी करता रहा है जिन्होंने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया था। आयोग ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के पार्टी अध्यक्षों/महासचिवों के साथ 01 मार्च 2024 को बैठक की जिसमें उनसे आग्रह किया गया है कि वे अपने नेताओं/उम्मीदवारों/स्टार प्रचारकों से ऐसे भाषण/बयान न देने को कहें जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एमसीसी का उल्लंघन करते हों। आयोग ने यह कहा है कि जहां व्यक्तिगत स्टार प्रचारक/नेता/उम्मीदवार दिए गए भाषणों के लिए जिम्मेदार बने रहेंगे, वहीं आयोग पार्टी अध्यक्ष/राजनीतिक दल के प्रमुख को मामले-दर-मामले के आधार पर ऐसे मामले से निपटेगा क्योंकि ऐसे बयानों से अपने नेताओं को रोकना पार्टियों की प्रमुख जिम्मेदारी है। इसका उद्देश्य एमसीसी को लेकर राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी को बढ़ाना है। इन लंबित मामलों को लेकर दोनों दलों के अध्यक्षों को नोटिस भेजा जा चुका है। इस पर दोनों दलों की ओर से जवाब आ गया है। इन मामलों में उचित कार्रवाई जांच और विचार के अधीन है। एमसीसी के तहत की गई कुछ प्रमुख कार्रवाइयां निम्नलिखित हैं।

कांग्रेस की शिकायत पर, हरियाणा के एक जिले के सीईओ को इस शिकायत के बाद ट्रांसफर कर दिया गया कि वो किसी उम्मीदवार के पक्ष में चुनाव प्रचार में शामिल है।

गुजरात के दाहोद संसदीय क्षेत्र में एक मतदान केंद्र पर कब्जा करने और ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की कांग्रेस की शिकायत पर वहां फिर से मतदान कराने का आदेश जारी किया गया और वहां तैनात सभी चुनावकर्मियों और पुलिस दल को निलंबित कर दिया गया और संबंधित राज्य अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वो इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करें।

टीडीपी की शिकायत पर, आयोग ने आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों और झूठे आरोपों से संबंधित आयोग की सलाह के उल्लंघन के लिए वाईएसआरसीपी के अध्यक्ष की निंदा की।

तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस समिति की शिकायत पर, बीआरएस के अध्यक्ष को एक प्रेस वार्ता के दौरान एमसीसी का उल्लंघन करने वाले बयान देने के लिए किसी भी सार्वजनिक बैठक, सार्वजनिक जुलूस, सार्वजनिक रैलियों, शो और साक्षात्कार और मीडिया में सार्वजनिक भाषण देने से 48 घंटे के लिए रोक दिया गया था।

बीआरएस की शिकायतों पर, तेलंगाना में एक मंत्री को झूठे आरोप लगाने और विपक्षी दल/नेता की छवि खराब करने के लिए निंदा की गई थी।

कांग्रेस की शिकायत पर ‘बीजेपी4कर्नाटक’ के ट्विटर ‘एक्स’ अकाउंट से एक पोस्ट को एमसीसी का उल्लंघन पाए जाने पर हटा दिया गया। मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी।

कांग्रेस की इस शिकायत पर कि कांग्रेस नेताओं की विकृत तस्वीरें सोशल मीडिया साइट पर गलत इरादे से डाली जा रही हैं, ईसीआई ने इंस्टाग्राम हैंडल ‘बोल हिमाचल’ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया और कथित आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट को हटाने के लिए आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

भाजपा की शिकायत पर, एक पूर्व महिला मंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के लिए मध्य प्रदेश राज्य कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।

आम आदमी पार्टी की शिकायत पर, दिल्ली के सीईओ को सभी संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों/प्राधिकरणों को संवेदनशील बनाने, अधिकृत/अनधिकृत साइटों पर गुमनाम हैंडबिल/पैम्फलेट/होर्डिंग्स के खिलाफ अधिक सतर्क रहने का निर्देश दिया गया था, जिससे चुनावी माहौल खराब होने और चुनाव अभियान पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना हो सकती है। क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा यह प्रमाणित किया गया कि अधिकृत स्थलों पर प्रकाशक के नाम के बिना कोई होर्डिंग नहीं है।

आप की शिकायत पर, दिल्ली के सीईओ को आप द्वारा मंजूरी के लिए प्रस्तुत किए गए गाने की दोबारा जांच करने और उसे मंजूरी देने का निर्देश दिया गया था।

पश्चिम बंगाल के उत्तरी दीनाजपुर में चोपड़ा में आयोजित एक चुनावी रैली से सीएपीएफ की वापसी के बाद स्थानीय मतदाताओं और विपक्षी पार्टी के कार्यकर्ताओं को परिणाम भुगतने की धमकी देने पर एआईटीसी के एक विधायक के खिलाफ आईपीसी की धारा 171एफ, 506 और आरपी कानून 1951 की धारा 135 (सी) के प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया।

आंध्र प्रदेश के डीजीपी (एचओपीएफ) को हटा दिया गया। इसके अलावा, आंध्र प्रदेश के डीजीपी (गुप्‍तचर), विजयवाड़ा के पुलिस आयुक्त, डीआईजी अनंतपुरमू और प्रकाशम, चित्तूर, पलनाडु, अनंतपुरमू के एसपी को भी विभिन्न शिकायतों/जानकारी के आधार पर हटा दिया गया। इसी तरह की शिकायतें/जानकारी मिलने पर, आंध्र प्रदेश में चार डीवाईएसपी/एसडीपीओ और 5 पुलिस इंस्पेक्टर/एसएचओ/सब इंस्पेक्टर को भी स्थानांतरित/निलंबित कर दिया गया।

आंध्र प्रदेश राज्य पेय पदार्थ निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को शराब को प्रलोभन के रूप में रखने संबंधी अक्षमता और अन्य अवांछित गतिविधियों में शामिल होने के कारण हटा दिया गया।

ओडिशा सरकार के मिशन शक्ति विभाग के सचिव-सह-आयुक्त को चुनाव को प्रभावित करने के उद्देश्य से इस्तेमाल किए जा रहे एसएचजी मंच को प्रभावी ढंग से नियंत्रित नहीं करने की जानकारी मिलने पर हटा दिया गया था।

शिकायतों/जानकारी के आधार पर, पश्चिम बंगाल में शक्तिपुर, बेलडांगा, आनंदपुर, डायमंड हार्बर और बेहरामपुर के पुलिस स्टेशनों के पांच ओसी/एसएचओ को हिंसा, आंशिक कार्रवाई आदि को नियंत्रित करने में विफल रहने के कारण स्थानांतरित कर दिया गया था।

मतदान के दिन मतदान केन्‍द्र के 100 मीटर के आसपास प्रचार करने और मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए तेलंगाना के हैदराबाद संसदीय क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गईं।

दिव्‍यांगों के अधिकारों के राष्ट्रीय मंच (एनपीआरडी) की शिकायत पर, टीडीपी नेता चंद्रबाबू नायडू की जगन मोहन रेड्डी को “मानसिक रूप से विक्षिप्‍त” कहने संबंधी उनके बयान और यह दावा करने के लिए निंदा की गई कि उनकी “मानसिक स्थिति” अच्छी नहीं है। उन्हें भविष्य में अपने सार्वजनिक बयानों में दिव्यांगजनों के प्रति सावधान और सम्मानजनक रहने का निर्देश दिया गया।

मेघालय की पश्चिमी गारो पहाडि़यों में तुरा पुलिस स्टेशन में दिव्‍यांग व्यक्तियों के अधिकार कानून, 2016 के तहत क्रिटेनबर्थ मारक के खिलाफ 22.04.2024 को शिकायत दर्ज की गई थी, जिन्होंने एक दिव्‍यांग व्यक्ति को एनपीपी का स्कार्फ पहनने और उसकी सहमति के बिना एक वीडियो में शामिल होने के लिए मजबूर किया था।

राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों द्वारा मतदाताओं के विवरण मांगने और उनकी प्रस्तावित लाभार्थी योजनाओं के लिए विभिन्न सर्वेक्षणों की आड़ में पंजीकरण की मांग करने वाले पर्चे जारी करने को गंभीरता से लेते हुए, इसे जन प्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 123 (1) के तहत रिश्वतखोरी की भ्रष्ट परिपाटी माना गया है। सभी राष्ट्रीय और राज्य राजनीतिक दलों को सलाह दी गई है कि वे ऐसी किसी भी गतिविधि को तुरंत बंद कर दें और उससे दूर रहें जिसमें किसी भी विज्ञापन/सर्वेक्षण/ऐप के माध्यम से चुनाव के बाद लाभार्थी-उन्मुख योजनाओं के लिए व्यक्तियों का पंजीकरण शामिल हो।

नागरिकों के लिए उल्लंघन पर सी-विजिल ऐप/आयोग के पोर्टल पर 14 मई, 2024 तक कुल 4,22,432 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इनमें से 4,22,079 (99.9 प्रतिशत) मामलों में कार्रवाई की गई है और इनमें से 88.7 प्रतिशत शिकायतों का 100 मिनट से कम के औसत समय में समाधान किया गया। सी-विजिल ऐप की मजबूती के कारण अवैध होर्डिंग्स, संपत्ति को गंदा करने, स्‍वीकृत समय से अधिक प्रचार, स्‍वीकृत वाहनों से अधिक की तैनाती में काफी कमी आई है।

इसी प्रकार, 14 मई, 2024 तक सुविधा पोर्टल पर 2,31,479 अनुमतियाँ दी गई हैं, जिससे एफआईएफओ (फर्स्ट-इन-फर्स्ट-आउट) का उपयोग करके पात्रता प्रदान करने का अधिकार समाप्त हो गया है और उम्मीदवारों / राजनीतिक दलों के लिए चुनाव संबंधी सुविधा आसान हो गई है।

गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड, इन छह राज्यों में उन अधिकारियों को स्वतः संज्ञान से हटाया गया जो दोहरे कार्यभार संभाल रहे थे, जो मुख्यमंत्रियों के प्रधान सचिव भी थे और उनके पास गृह/सामान्य प्रशासन विभाग का प्रभार भी था। इस कदम का उद्देश्य डीएम/डीईओ/आरओ और एसपी पर नियंत्रण रखने वाले चुनाव संबंधी वरिष्ठ अधिकारियों को मुख्यमंत्री कार्यालयों से दूर करना था।

पश्चिम बंगाल के डीजीपी को स्वत: संज्ञान लेते हुए हटा दिया गया क्योंकि उन्हें पिछले चुनावों में भी चुनाव ड्यूटी से रोक दिया गया था।

गुजरात, पंजाब, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के चार राज्यों में जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) जैसे नेतृत्व वाले पदों पर तैनात गैर-काडर के अधिकारियों का स्वत: संज्ञान से तबादला।

पंजाब, हरियाणा और असम में निर्वाचित राजनीतिक प्रतिनिधियों के साथ रिश्तेदारी या पारिवारिक संबंधों के चलते अधिकारियों का स्वत: संज्ञान से तबादला।

कांग्रेस और आप पार्टी की शिकायत पर, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को निर्देश दिया गया कि चुनाव की घोषणा के बाद व्हाट्सएप पर भारत सरकार के विकसित भारत वाले संदेशों का प्रसारण रोकें।

कांग्रेस और आप की शिकायत पर सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया गया कि सरकारी/सार्वजनिक परिसरों से विरूपण हटाने के ईसीआई के निर्देशों का तत्काल प्रभाव से अनुपालन किया जाए।

डीएमके की शिकायत पर रामेश्वर कैफे ब्लास्ट को लेकर असत्यापित आरोप लगाने के लिए भाजपा के मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

कांग्रेस की शिकायत पर कैबिनेट सचिव को निर्देश दिया गया कि डीएमआरसी ट्रेनों और पेट्रोल पंपों, राजमार्गों आदि से होर्डिंग्स, फोटो और संदेशों के साथ-साथ सरकारी/सार्वजनिक परिसरों से विरूपण हटाने के ईसीआई के निर्देशों का अनुपालन किया जाए।

कांग्रेस की शिकायत पर सीबीडीटी को निर्देश दिया गया कि एक केंद्रीय मंत्री ने अपने हलफनामे में जो संपत्ति की घोषणा की है, उसमें कुछ गलत तो नहीं, इसका सत्यापन करें।

ममता बनर्जी के प्रति आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी के लिए एआईटीएमसी की शिकायत पर भाजपा नेता दिलीप घोष को नोटिस।

भाजपा की शिकायत पर सुप्रिया श्रीनेत और सुरजेवाला, दोनों को क्रमशः कंगना रनौत और हेमा मालिनी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों के लिए नोटिस।

आयोग ने विशेष रूप से महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले दलों के नेताओं को नोटिस जारी करके महिलाओं की गरिमा और सम्मान के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। आयोग यह सुनिश्चित करने के लिए एक कदम और आगे गया है कि पार्टी प्रमुखों/अध्यक्षों की इस मामले में जवाबदेही तय हो कि उनकी पार्टी के नेता और प्रचारक इस तरह की अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियों का सहारा न लें।

डीएमके नेता अनीता आर राधाकृष्णन द्वारा पीएम के प्रति की गई टिप्पणी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

कांग्रेस की शिकायत पर दिल्ली में नगर निगम अधिकारियों को विभिन्न कॉलेजों से स्टार प्रचारकों के कट-आउट हटाने के निर्देश जारी किए गए हैं।

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