लोकसभा की कार्रवाई अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। तीसरे स्थगन के बाद आज डेढ़ बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने पर अध्यक्ष ओम बिरला ने मानसून सत्र के दौरान हुए कार्यों के बारे में सूचना दी। उन्होंने बताया कि इस सत्र में 44 घंटे से ज्यादा काम हुआ। उन्होंने कहा कि सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर करीब 20 घंटे चर्चा हुई, जिसमें 60 सदस्यों ने भाग लिया। डिजिटल डाटा संरक्षण विधेयक सहित कुल 12 विधेयक पारित किए गए।
इससे पहले, लोकसभा की कार्यवाही तीन बार स्थगित की गई। कांग्रेस सदस्यों ने अपने नेता अधीर रंजन चौधरी के कल सदन से निलंबन को लेकर हंगामा किया। आज सवेरे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस सांसदों ने इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की लेकिन अध्यक्ष ओम बिरला ने इसकी मंजूरी नहीं दी। इस पर कांग्रेस के नेताओं ने हंगामा किया। बाद में, अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। अधीर रंजन चौधरी को उनके अमर्यादित आचरण के लिए कल लोकसभा से निलंबित कर दिया गया था और मामले को विशेषाधिकार समिति को भेज दिया गया। जब तक समिति कोई निर्णय नहीं लेगी। वे निलंबित रहेंगे। पहले स्थगन के बाद कार्यवाही फिर शुरू होने पर कांग्रेस, डीएमके और टीएमसी सहित विपक्षी सदस्य सदन के बीचो बीच पहुंचकर नारेबाजी करने लगे। इस बीच माल और सेवा कर संशोधन विधेयक 2023 और एकीकृत माल और सेवा कर संशोधन विधेयक 2023 पेश किया गया और बगैर चर्चा के पारित कर दिया गया।
राजस्थान में कानून और व्यवस्था की स्थिति के मुद्दे पर शोर-शराबे के बीच राज्यसभा भी दोपहर बारह बजे तक स्थगित कर दी गई। आज सवेरे बैठक शुरू होते ही विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने अधीर रंजन चौधरी के निलंबन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अधीर रंजन चौधरी कई संसदीय समितियों के सदस्य हैं और निलंबन से वह अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने से वंचित रह जायेंगे। संसदीय कार्य राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी लोकसभा के सदस्य हैं और दूसरे सदन का मामला यहां नहीं उठाया जाना चाहिए। इसके बाद सदन ने सेवानिवृत्त हो रहे नौ सदस्यों को विदाई देनी की प्रक्रिया शुरू की। विपक्ष के नेता और सदन के नेता ने उन सदस्यों के योगदान का उल्लेख किया।
इसी दौरान, भारतीय जनता पार्टी के सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने राजस्थान में कानून व्यवस्था की स्थिति का मुद्दा उठाया, जिस पर विपक्षी सदस्यों ने आपत्ति जताई और नारेबाजी शुरू कर दी। इसके कारण सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
कार्यवाही फिर शुरू होने पर सदस्यों ने सेवानिवृत्त सदस्यों को विदाई दी। इसके बाद विपक्ष ने मणिपुर हिंसा मुद्दे पर नारेबाजी शुरू की। ये सदस्य इस मुद्दे पर सदन में प्रधानमंत्री के बयान की मांग कर रहे थे। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, वामदल और अन्य सांसद सदन के बीचो बीच पहुंच गए। हंगामे के बीच सभापति जगदीप धनखड़ ने प्रश्नकाल चलाने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हुए। बाद में सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
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