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राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण ने वित्तवर्ष 2019-20 के लिये केआईओसीएल लि. की वित्तीय समीक्षा रिपोर्ट जारी की

राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (एनएफआरए) ने वित्तवर्ष 2019-20 के लिये केआईओसीएल लि. की वित्तीय गुणवत्ता समीक्षा रिपोर्ट (एफआरक्यूआरआर) जारी कर दी है। एफआरक्यूआरआर दरअसल एनएफआरए के निरीक्षण कार्यक्रम के दो घटकों में से एक है। दूसरा घटक लेखा-परीक्षण गुणवत्ता समीक्षा रिपोर्ट (एक्यूआरआर) है।

एफआरक्यूआरआर के केंद्र में रिपोर्ट तैयार करने वालों की भूमिका होती है, यानी वे लोग जो वित्तीय खाता तैयार करने तथा खाता-परीक्षण के मानकों का पूरा पालन करने के जिम्मेदार होते हैं। इसलिये एफआरक्यूआरआर में यह मूल्यांकन किया जाता है कि मुख्य वित्तीय अधिकारी, प्रबंधन के लोग, लेखा-परीक्षण समिति तथा कंपनी के निदेशक मंडल के लोगों की क्या कार्य-प्रणाली है। इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी दर्ज होता है कि वित्तीय खाता तैयार करने में इनका प्रदर्शन कैसा रहा, जो कंपनी अधिनियम के तहत तथ्यों और दृष्टिकोण के अनुपालन में है या नहीं। खाता-परीक्षण के मानकों के पालन के बारे में भी रिपोर्ट में जानकारी दी जाती है।

एफआरक्यूआरआर के आखिर में बही-खाता तैयार करने वालों को सुझाव दिया गया है, जिसके तहत सुधार की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है। जिन मामलों में लेखा-परीक्षण के मानकों की अवहेलना हुई है और कानून के तहत जहां कार्रवाई की जरूरत है, ऐसे मामलों को सक्षम अधिकारियों के समक्ष उठाया गया है, ताकि आवश्यक कार्रवाई हो सके।

केआईओसीएल लि. के मामले में एफआरक्यूआरआर पहली रिपोर्ट है, जिसे एनएफआरए ने जारी किया है।

एनएफआरए ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिये कंपनी द्वारा दिये गये वित्तीय विवरण के आधार पर अपनी रिपोर्ट दी है। इसमें समीक्षा के दौरान कंपनी से मांगी गई अन्य सूचनाओं को भी आधार बनाया गया है।

एनएफआरए ने जो नतीजा निकाला है, उसके आधार पर उसकी सिफारिशों/निष्कर्षों को ‘अधिक’ और ‘हल्के’ प्रभावों वाले वर्गों में रखा जा सकता है। केआईओसीएल ने खाता-परीक्षण मानकों के सम्बंध में जहां चूक की है, उनमें से अधिक प्रभाव वाले घटक इस प्रकार हैं:

जिन वायदा ठेकों में विदेशी मुद्रा संलिप्त होती है, उसके बारे में केआईओसीएल की खाता-परीक्षण नीति गलत है और वह भारतीय लेखा-परीक्षण मानक, यानी इंड-एस 109, फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट (इंड-एस 109) के तकाजों, वर्गीकरण और आवश्यकताओं के प्रतिकूल है।
राजस्व जैसे भौतिक तत्त्वों के बारे में खाता-परीक्षण नीति (जिसमें प्राप्तियां, सूचियां आदि के सम्बंध में प्रभाव शामिल है) के हवाले से, जिसका विवरण खाता-परीक्षण नीतियों में दिया गया है, वे सब त्रुटिपूर्ण हैं। यह गलत खाता-परीक्षण नीति कंपनी के वित्तीय विवरण की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है।
मूल्यांकन रिपोर्ट जैसे समुचित प्रमाणों को केआईओसीएल ने नहीं दिया, जो भारतीय लेखा-परीक्षण मानक (इंड-एस) 36, इम्पेयरमेंट ऑफ एसेट्स (इंड-एस 36) को लागू करने के बारे में है। यह मामला ब्लास्ट फर्नेस इकाई के बारे में है, जो निष्क्रिय थी। इसके अलावा इस बात के भी कोई प्रमाण नहीं हैं कि कंपनी की लेखा-परीक्षण समिति और निदेशक मंडल ने क्या नुकसान की गणना की या उसके बारे में विचार/समीक्षा की गई?

वित्तीय विवरण के उल्लेखों में किये गये खुलासों में कई अन्य त्रुटियों भी देखी गई हैं। ये खुलासे वित्तीय विवरण तैयार करने वालों के लिये प्रासंगिक या उपयोगी नहीं हैं। इनसे वित्तीय विवरणों में जरूरी सूचनायें छुप जाती हैं।

एनएफआरए ने केआईओसीएल से कहा है कि वह आवश्यकता को मद्देनजर रखते हुये कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 131 और इंड-एस 8 के अनुसार वित्तीय विवरण फिर से तैयार करने और उसे प्रकाशित करने की समीक्षा करे।

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