राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज मध्य प्रदेश के ग्वालियर में अटल बिहारी वाजपेयी-भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी और प्रबंधन संस्थान (ABV-IIITM) के चौथे दीक्षांत समारोह में भाग लिया और संबोधित किया। इस अवसर पर, उन्होंने संस्थान के 500 बिस्तरों वाले बाल छात्रावास की आधारशिला भी रखी।
राष्ट्रपति महोदया ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे समाज के उन लोगों के बारे में सोचें जो विकास यात्रा में पीछे रह गये हैं। उन्होंने कहा कि समाज के प्रति दायित्व की भावना भी उनकी प्रगति के लिए उपयोगी साबित होगी, क्योंकि दूसरों की मदद करने से उनकी क्षमताओं का भी विकास होता है। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि सरकार जनजातीय समुदायों, महिलाओं और समाज के अन्य कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए कई कदम उठा रही है, लेकिन, यह समाज के प्रत्येक व्यक्ति, विशेष रूप से युवाओं का दायित्व है कि वे समाज के हाशिए पर मौजूद और कमजोर वर्गों के विकास के लिए काम करें। उन्होंने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि हमारा समाज और देश इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।
राष्ट्रपति महोदया ने विद्यार्थियों से आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि कोई भी बाधा, कोई भी चुनौती उन्हें अपने लक्ष्य हासिल करने से नहीं रोक सकती। राष्ट्रपति महोदया ने उन्हें सलाह दी कि वे लक्ष्य से न भटकें और दूसरों को भी आगे बढ़ने में मदद करें। उन्होंने कहा कि यदि वे दृढ़ संकल्प के साथ सही मार्ग चुनें और आगे बढ़ें तो वे अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे और जीवन में संतुष्टि प्राप्त कर सकेंगे। राष्ट्रपति महोदया ने कहा कि किसी भी नौकरी से वित्तीय लाभ महत्वपूर्ण है, लेकिन नौकरी से संतुष्टि उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों को स्वयं से प्रश्न करते रहने और जीवन भर सुधार करते रहने का परामर्श दिया।
राष्ट्रपति महोदया ने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि ग्वालियर के भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी और प्रबंधन संस्थान (आईआईआईटीएम) के अधिकांश विद्यार्थियों को अच्छी कंपनियों में रोजगार मिला है। उन्होंने कहा कि जिन विद्यार्थियों को रोजगार नहीं मिला है उनकी क्षमता किसी भी मायने में कम नहीं है और उन्हें भी भविष्य में नौकरी के अनगिनत अवसर मिलेंगे।
राष्ट्रपति महोदया ने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि ग्वालियर का भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी और प्रबंधन संस्थान (आईआईआईटीएम) उच्च शिक्षा और अनुसंधान में उत्कृष्टता का केंद्र बनने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महत्व का संस्थान होने के फलस्वरूप इस संस्थान का कर्तव्य है कि वह भारत को आगे बढ़ाने के लिए नवीन प्रयास करे और विद्यार्थियों को अपने विचारों और कार्यों के माध्यम से देश की समस्याओं का समाधान खोजने के लिए तैयार करे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हमारे संस्थान, विद्यार्थी और उद्योग भारत को दुनिया का सबसे बड़ा प्रौद्योगिकी केंद्र बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे।
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