राज्यसभा में आज विपक्ष के 19 सदस्यों को अभद्र व्यवहार के लिए सप्ताह के शेष दिनों के लिए सदन से निलम्बित कर दिया गया।इनमें टीएमसी के सात, डीएमके से छह, टीआरएस से तीन, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से दो और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से एक सदस्य शामिल है। निलम्बित सदस्यों में डोला सेन, सुष्मिता देव, डॉक्टर सांतनु सेन और मौसम नूर, डीएमके सदस्य मोहम्मद अब्दुल्ला, एस. कल्याणसुन्दरम, डॉक्टर सोमू कणिमोजी और टीआरएस के लिंगैया यादव शामिल हैं।
सदन की बैठक तीसरे पहर दो बजे जैसे ही शुरू हुई। टीएमसी, आम आदमी पार्टी, वामपंथी, डीएमके सहित विपक्षी सदस्य अध्यक्ष के आसन के सामने आकर महंगाई और आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी जैसे मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे। उपसभापति हरिवंश ने सदन में व्यवस्था बनाए रखने का बार-बार अनुरोध किया, लेकिन प्रदर्शनकारी सदस्यों ने उनकी एक न सुनी। उन्होंने कार्यवाही में बाधा डालने को लेकर उन्हें चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि सभापति को उनके खिलाफ नियम 256 लागू करना होगा। व्यवधान जारी रहते संसदीय कार्य राज्य मंत्री वी० मुरलीधरन ने सभापति का सम्मान न करने और सदन में अनुशासनहीन व्यवहार के लिए प्रदर्शनकारी सदस्यों को निलम्बित करने के लिए नियम 256 के अंतर्गत प्रस्ताव पेश किया। सदन ने ध्वनिमत से इसे पारित कर दिया। निलम्बित सदस्यों ने सदन छोड़ने से इंकार कर दिया जिसे देखते हुए सदन की बैठक 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। बैठक फिर शुरू होने पर भी निलम्बित सदस्य सभापति के आसन के समाने मौजूद थे। उनसे बाहर जाने को कहा गया, लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया। इसे देखते हुए सभापति ने सदन की बैठक दो बार स्थगित की और आखिरकार दिनभर के लिए बैठक स्थगित करनी पड़ी।
भोजनावकाश से पहले भी राज्यसभा की बैठक इन्हीं मुद्दों को लेकर दो बार स्थगित की गयी। विपक्षी सदस्यों ने आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी में बढ़ोतरी और गुजरात में ज़हरीली शराब से हुई त्रासदी को लेकर शोर शराबा किया। दूसरे स्थगन के बाद दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर जब राज्यसभा की बैठक फिर शुरू हुई तो आम आदमी पार्टी, डीएमके, वामपंथी दल, टीएमसी और अन्य सदस्य अध्यक्ष के आसन के सामने आ गये और सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी जारी रखी। उपसभापति हरिवंश ने उत्तेजित सदस्यों से अनुरोध किया कि अपनी सीटों पर जाएं। उन्होंने कहा कि सारा देश उन्हें देख रहा है। उपसभापति ने नियम 256 का हवाला दिया और तख्तियां दिखा रहे सदस्यों को सदन की कार्यवाही में बाधा डालने के खिलाफ चेतावनी दी।
इससे पहले सदन ने करगिल विजय दिवस की तेईसवीं वर्षगांठ पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और बहादुर सैनिकों की सराहना की। सदन ने शहीदों के सम्मान में दो मिनट का मौन भी रखा।
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