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मामल्लापुरम में संरचनात्मक अखंडता पर तीसरे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (ICONS 2023) का उद्घाटन किया गया

संरचनात्मक अखंडता पर तीसरे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (आईसीओएनएस 2023) का उद्घाटन 23 अगस्त, 2023 को तमिलनाडु के मामल्लापुरम में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के महानिदेशक तथा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. एन कैलाइसेल्वी द्वारा किया गया। संरचनात्मक अखंडता पर तीसरे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 2023 का आयोजन संयुक्त रूप से इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र, कलपक्कम और सोसाइटी फॉर फेल्योर एनालिसिस द्वारा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास, इंडियन सोसाइटी फॉर नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग, कलपक्कम चैप्टर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स कलपक्कम चैप्टर और इंडियन स्ट्रक्चरल इंटीग्रिटी सोसायटी के सहयोग से किया गया है।

डॉ. कलैसेल्वी ने अपने उद्घाटन भाषण के दौरान वैश्विक जलवायु परिवर्तन के कारण विद्युत संयंत्र, पेट्रोकेमिकल उद्योगों और भारत की प्रतिष्ठित संरचनाओं की गिरावट पर प्रकाश डाला। उन्होंने कार्बनडाइ ऑक्साइड के अवशोषण के कारण होने वाले संरचनात्मक क्षरण को रोकने के लिए एक नवीन पद्धति विकसित करने पर बल दिया है। उन्होंने युवा शोधकर्ताओं को इस सम्मेलन का लाभ उठाने और भारत तथा विदेश के विशेषज्ञों के साथ बातचीत करने का सुझाव दिया।

अध्यक्षीय भाषण इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (आईजीसीएआर), कलपक्कम के निदेशक डॉ. बी वेंकटरमन द्वारा दिया गया। अपने भाषण में उन्होंने संरचनात्मक स्वास्थ्य निगरानी को मानव केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की शारीरिक रचना से जोड़ा है। उन्होंने इंजीनियरिंग घटकों की संरचनात्मक अखंडता मूल्यांकन के लिए भारतीय मानकों और कोड विकसित करने पर भी बल दिया।

सम्मेलन के अध्यक्ष, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के प्रोफेसर रघु प्रकाश ने दर्शकों के साथ भारत में संरचनात्मक अखंडता परीक्षण का संक्षिप्त इतिहास और संरचनात्मक अखंडता पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में परीक्षण की परिणति को साझा किया। उन्होंने विभिन्न संरचनात्मक अनुप्रयोगों के लिए स्वदेशी कोड विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके माध्यम से उन्होंने भविष्य में फ्रैक्चर पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को भारत में लाने की आकांक्षा साझा की।

लॉन्ग वेल्डेड रेल (एलडब्ल्यूआर) इंजीनियरिंग, भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक एन. राम मोहन ने महत्वपूर्ण संरचनाओं – डिजाइन, विनिर्माण और निर्माण की स्थापना में शामिल विभिन्न क्षेत्रों के बारे में अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने इनमें से प्रत्येक क्षेत्र में विभिन्न रूपों में संरचनात्मक अखंडता मूल्यांकन की आवश्यकता पर बल दिया। एन. राम मोहन ने सभी हितधारकों को इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उचित तरीके विकसित करने के लिए अनुसंधान एवं विकास संस्थानों तथा शिक्षा जगत के साथ सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए निष्कर्ष निकाला।

गुणवत्ता आश्वासन, भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक थॉमस मैथ्यू ने गुणवत्ता आश्वासन और संरचनात्मक अखंडता मूल्यांकन के बीच आंतरिक संबंधों पर अपना दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने उस तरीके पर प्रकाश डाला जिसमें संरचनात्मक अखंडता को डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया में सफलतापूर्वक एकीकृत किया गया है तथा निर्माण उद्योगों के लिए अखंडता मूल्यांकन पर इसी तरह ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता व्यक्त की।

टेक्सास विश्वविद्यालय, अमेरिका के प्रो. के. रवि-चंदर ने संरचनात्मक अखंडता पर तीसरे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 2023 का पहला पूर्ण व्याख्यान दिया, जिसमें इलास्टोमेरिक सामग्रियों में दरार की शुरुआत पर एक समग्र परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत किया गया। उन्होंने इलास्टोमर्स में क्षति का अध्ययन करने के लिए उपयोग किए जाने वाले विभिन्न सिद्धांतों को संक्षेप में प्रस्तुत किया और प्रयोग के नए रूपों के माध्यम से प्रकट अंतराल क्षेत्रों की पहचान की। इन प्रयोगों के माध्यम से, उन्होंने इलास्टोमेरिक सामग्रियों में क्षति की शुरुआत और प्रसार पर महत्वपूर्ण निष्कर्ष प्रस्तुत किए और इन्हें अन्य वर्गों की सामग्रियों में क्षति के साथ सफलतापूर्वक आपस में संबद्ध किया।

संरचनात्मक अखंडता पर तीसरे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 2023 में भारत और विदेश से लगभग 250 प्रतिनिधियों ने भाग लिया है, जिसमें मैकेनिकल इंजीनियर, सामग्री वैज्ञानिक, शिक्षाविद, उद्योग विशेषज्ञ, संयंत्र प्रबंधक और नियामक कर्मी शामिल हैं। सम्मेलन में परमाणु, रक्षा, एयरोस्पेस, रसायन और तेल उद्योगों में संरचनाओं तथा संचालन उपकरणों की संरचनात्मक अखंडता का आकलन करने एवं सुनिश्चित करने में हालिया विकास और भविष्य की दिशाओं से संबंधित विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

सम्मेलन के अगले दो दिनों में क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञों द्वारा लगभग 35 आमंत्रित व्याख्यान और लगभग 200 अंशदायी पत्र प्रस्तुत किए जाने हैं।

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