भूमि संसाधन विभाग ने नागरिकों के जीवन को आसान बनाने के लिए हाल के वर्षों में कई पहल शुरू की हैं। डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत विभाग नागरिकों के लाभ के लिए भूमि अभिलेखों और भूसंपत्ति (कडैस्ट्रल) मानचित्रों के डिजिटलीकरण के लिए प्रयास कर रहा है। उदाहरण के लिए भू-स्वामित्व अधिकारों और पंजीकरण कार्यालयों के कम्प्यूटरीकरण की 8 अगस्त 2023 तक राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि 94 प्रतिशत रही। देश में मानचित्रों का डिजिटलीकरण 76 प्रतिशत हो गया है। इसके अलावा भूमि अभिलेख विभाग सभी भूमि खंडों के लिए भू-आधार या विशिष्ट भूमि खंड पहचान संख्या प्रदान कर रहा है और एक साल में इसने लगभग 9 करोड़ भूखंडों को भू-आधार प्रदान किए हैं। इससे पहले दस्तावेजों का पंजीकरण मैनुअल होता था, लेकिन अब यह पंजीकरण ई-पंजीकरण के रूप में किया जा रहा है। इससे अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला है और इसने पूंजी निर्माण में भी बड़े पैमाने पर सहायता प्रदान की है। यह विभाग वर्षा आधारित और वर्षा से वंचित क्षेत्रों के विकास के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई) में जल बहाव घटक को कार्यान्वित कर रहा है। 97 मिलियन हेक्टेयर में से लगभग 29 मिलियन हेक्टेयर वंचित भूमि को जल बहाव परियोजनाओं के तहत लाया गया है, जो संभवतः वैश्विक रूप से सबसे बड़ा अभियान है।
इन कार्यक्रमों के बारे में आम जनता को जागरूक बनाने के लिए विभाग ने एक मीडिया योजना तैयार की है जिसको आज (11 अगस्त, 2023) लागू किया जा रहा है। इस अभियान के पहले चरण में आउटडोर मीडिया, सोशल मीडिया और बल्क एसएमएस घटक शामिल किए जा रहे हैं। मीडिया अभियान के पहले चरण की शुरुआत के बाद व्यापक और लक्षित कवरेज के लिए अतिरिक्त घटक जोड़े जाएंगे।
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