“विविधतापूर्ण क्षेत्रों और भौगोलिक स्थितियों वाले एक विशाल देश होने के नाते, भारत संकट/आपदा का मुकाबला करने के लिये अपनी प्रणाली बना सकता है, जिसे अन्य देश अपने यहां अपना सकें।” केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज यहां राष्ट्रीय आपातकालीन चिकित्सा दल (एनईएमटी) पर परामर्शदात्री कार्यशाल को सम्बोधित करते हुए यह बात कही।
डॉ. मांडविया ने कहा, “विश्व के उत्कृष्ट व्यवहारों से सीखते हुए और मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का पालन करते हुए, पिछले कुछ दशकों के दौरान आपदाओं और संकटों से हमने जो सीखा है, उस आधार पर हमें अपने मॉडल को समृद्ध बनाना चाहिये। अनेक सेक्टरों से जो हमने सीखा है और तरह-तरह के जो अनुभव हमें प्राप्त हुए, उन सबको आपादा व संकट सम्बंधी क्षमता निर्माण तथा प्रशिक्षण प्रणाली में शामिल करना चाहिये।”
उन्होंने जोर देकर कहा, “भारत मॉडल निर्धारित एसओपी से परे जा सकता है और जमीन पर अनिवार्यताओं की प्रतिक्रिया के लिए अधिक लचीला और चुस्त हो सकता है।” दो दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य एनईएमटी पहल के सभी हितधारकों को पहल की नीति, रणनीति, भूमिकाओं और जिम्मेदारियों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ लाना है और आपदा के दौरान स्वास्थ्य जरूरतों को देश की आपात जरूरतों के साथ एकीकृत करने के लिए एक रोडमैप तैयार करना है।
जी-20 हेल्थ ट्रैक एजेंडे के तहत स्वास्थ्य आपात स्थिति की रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रियाएं प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में से एक हैं। तिरुवनंतपुरम, केरल में जी-20 स्वास्थ्य कार्य समूह की बैठक (18-20 जनवरी 2023) के तुरंत बाद यह पहली बैठक है।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने एनडीएमए, एनडीआरएफ, राज्य एजेंसियों, आपातकालीन सेवा प्रदाताओं, ट्रॉमा सेंटर आदि सहित अस्तित्व में मौजूद कई बुनियादी इकाइयों के साथ सहयोग के महत्त्व पर जोर दिया। यह देखते हुए कि ये वर्तमान में एक फुटकर स्थिति में बड़े पैमाने पर काम करते हैं, उन्होंने इनकी महत्ता को रेखांकित किया।
नेशनल इमरजेंसी मेडिकल टीम (एनईएमटी) की पहल का उद्देश्य आपदाओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के जवाब में स्वास्थ्य सेवा जनशक्ति की तैनाती के पारंपरिक जवाबदारी में सुधार करना है। ईएमटी को स्वास्थ्य पेशेवरों के एक समूह के रूप में निर्धारित किया गया है, जो स्थानीय स्वास्थ्य सेवा प्रणाली का समर्थन करने में, संकट और आपात स्थितियों से प्रभावित आबादी को प्रत्यक्ष निदान सम्बंधी सुविधायें प्रदान करता है। किसी आपात स्थिति/आपदा के दौरान, किसी भी सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति के लिए तैयारी करने और उसके प्रभाव को कम करने के लिए आवश्यक मुख्य क्षमताएं काफी हद तक समान रहती हैं। तैनात टीमों के प्रभावी होने के लिए, उन्हें औपचारिक रूप से प्रशिक्षित होने के साथ-साथ न केवल निदान कौशल के मामले में बल्कि अन्य हितधारकों के साथ मैदानी समन्वय के मामले में भी उनका तैयार होना आवश्यक है। विश्व स्तर पर यह देखा गया है कि ऐसे ईएमटी को आपदा प्रतिक्रिया के लिए अनुमानित जमीनी समर्थन देने के मामले में प्रशिक्षित, मानकीकृत और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
दो दिवसीय कार्यशाला आपातकालीन चिकित्सा दलों से संबंधित चार महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार-विमर्श करेगी, जिसमें (i) प्रणाली (ii) स्टाफ (iii) आपूर्ति और (iv) संरचना शामिल है।
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्रालय के अपर सचिव लव अग्रवाल, गृह मंत्रालय के अपर सचिव हितेश कुमार एस. मकवाना, एनडीएमए के संयुक्त सचिव कुनाल सत्यार्थी, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. अतुल गोयल, सीजीएचएस के निदेशक डॉ. अंजना राजकुमार, आंध्रप्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, महाराष्ट्र, मिजोरम, ओडिशा, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, उत्तराखंड, चंडीगढ़, उत्तरप्रदेश, जम्मू-कश्मीर के प्रधान सचिव व अपर प्रधान सचिव, नई दिल्ली, गुवाहाटी, पटना, जोधपुर और उत्तराखंड के एम्स के निदेशकगण, भारतीय सशस्त्र बलों के सदस्य, आईसीएमआर, जिपमर, निमहांस, पीजीआईएमईआर, आदि के प्रतिनिधि व निदेशक तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन के भारत प्रतिनिधि डॉ. रॉडरिक ऑफ्रिन भी कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।
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