संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी अबू धाबी में ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए भारत ने आम लोगों और अवसंरचना पर हमलों को ‘अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन’ करार दिया। भारत ने जोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) को आतंकवाद के ऐसे जघन्य कृत्यों के खिलाफ स्पष्ट संदेश देने के लिए एकजुट होना चाहिए।
सुरक्षा परिषद में पश्चिम एशिया पर चर्चा शुरू करते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत टी एस तिरुमूर्ति ने अबू धाबी में हाल में हुए आतंकवादी हमलों की कड़ी निंदा की जिनमें दो भारतीयों समेत तीन लोगों की मौत हो गई। उन्होंने कहा, “निर्दोष नागरिकों और अन्य अवसंचरना पर इस तरह का हमला पूरी तरह से अस्वीकार्य है। यह अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है। यह सभी मानदंडों के खिलाफ है।”
तिरुमूर्ति ने कहा कि भारत यूएई के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत इस आतंकवादी हमले की परिषद द्वारा स्पष्ट निंदा के लिए अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त करता है। उन्होंने कहा, “यह जरूरी है कि परिषद आतंकवाद के ऐसे जघन्य कृत्यों के खिलाफ एक स्पष्ट संकेत भेजने के लिए एकजुट हो।”
यमन के हूती विद्रोहियों ने सोमवार की सुबह अबू धाबी के मुसाफ्फा आईसीएडी3 इलाके और अबू धाबी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नव निर्मित क्षेत्र को निशाना बनाया। हमलों के बाद पेट्रोलियम टैंकरों में विस्फोट हुआ जिसमें दो भारतीय नागरिकों एवं एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत हो गई। घटना में छह अन्य जख्मी हो गए जिनमें दो भारतीय शामिल हैं।
यूएई मिशन ने यहां एक बयान में कहा, “हूती विद्रोहियों ने हमलों की जिम्मेदारी लेने की पुष्टि की है।” यूएई ने अबू धाबी में हूती विद्रोहियों द्वारा आतंकवादी हमलों के संबंध में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक का अनुरोध किया था।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से टेलीफोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों ने आतंकवादी हमले पर चर्चा की।
जयशंकर ने कड़े शब्दों में आतंकवादी हमले की निंदा की और इस बात पर जोर दिया कि निर्दोष नागरिकों पर इस तरह का हमला पूरी तरह से अस्वीकार्य है और सभी मानदंडों के खिलाफ है।
तिरुमूर्ति ने वेस्ट बैंक, यरुशलम और गाज़ा में हाल के घटनाक्रम पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “हाल के हफ्तों में आम नागरिकों पर हिंसक हमले बढ़े हैं। तोड़फोड़ और भड़काने की कार्रवाई जारी है। नयी बस्तियां बनाने की घोषणाएं की गई हैं। हम संबंधित पक्षों से टकराव दूर करने के लिए तुरंत ठोस कोशिश करने का आह्वान करते हैं।”
भारत ने रेखांकित किया कि इस तरह के एकतरफा उपाय जमीन पर यथास्थिति को अनुचित रूप से बदलते हैं, दो-राष्ट्र समाधान की व्यवहार्यता को कम करते हैं और शांति वार्ता की बहाली के लिए गंभीर चुनौतियां पेश करते हैं। तिरुमूर्ति ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को किसी भी ऐसे कदम के खिलाफ कड़ा संकेत देना चाहिए जो निकट भविष्य में इजराइल और फलस्तीन के बीच स्थायी शांति की संभावना में रोड़ा अटका सके। भारत ने रेखांकित किया कि वह इजराइली और फलस्तीनी नेतृत्व के बीच सीधे संपर्क को प्रोत्साहित करता है।
तिरुमूर्ति ने फलस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास और इजराइल के रक्षा मंत्री बेनी गैंट्ज के बीच हालिया बैठक का स्वागत किया। उन्होंने इसका भी स्वागत किया कि इसके बाद इजराइल ने पिछली बैठकों में निर्धारित सामाजिक-आर्थिक उपायों को जारी रखने की घोषणा की है।
तिरुमूर्ति ने फलस्तीनी मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान के लिए भारत की “दृढ़ और अटूट” प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि नयी दिल्ली ने बातचीत के जरिए ‘दो-राष्ट्र समाधान’ का समर्थन किया है, जिससे एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फलस्तीन राष्ट्र की स्थापना हो जिसमें लोग सुरक्षित रहें और सीमाओं की पहचान हो तथा इजराइल के साथ शांति रहे।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासकर ‘मिडिल ईस्ट क्वार्टेट’ (संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, यूरोपीय संघ, रूस) से इन वार्ताओं को फिर से शुरू करने को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “इजराइल और फलस्तीन के मित्र के रूप में भारत, इजराइल फलस्तीनी टकराव का एक व्यापक और स्थायी ‘दो-राष्ट्र समाधान’ हासिल करने की दिशा में सभी प्रयासों का समर्थन करना जारी रखेगा।”
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