भारत ने जी-20 संगठन के सदस्य देशों का आह्वान किया है कि वे आर्थिक भ्रष्टाचार में शामिल भगोडों का तेजी से प्रत्यर्पण करें और उनकी सम्पत्तियां जहां भी हो उसे जब्त किया जाये। गुरूग्राम में आज जी-20 देशों के भ्रष्टाचार विरोधी कार्यसमूह की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉक्टर जितेन्द्र सिंह ने कहा कि आर्थिक मामलों के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई न होने की स्थिति में देश को विभिन्न प्रकार की समस्याओं से जुझना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं का संसाधनों के उचित इस्तेमाल, नागरिकों की जीवनशैली, आर्थिक विकास तथा शासन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसमें सबसे अधिक नुकसान गरीबों और समाज के पिछड़े वर्गों को होता है। डॉक्टर सिंह ने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए भारत ने विशेष कानून बनाये हैं।
उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय ने सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों के साथ धोखाधड़ी की गई लगभग 272 बिलियन डॉलर में से लगभग 180 बिलियन डॉलर की संपत्ति सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को हस्तांतरित कर दी है। जी-20 सम्मेलन के प्रतिनिधिमंडलों को संबोधित करते हुए डॉक्टर सिंह ने कहा कि देश और विदेश में अपराध के माध्यम से प्राप्त आय को तेजी से जब्त करने की व्यवस्था को चुस्त-दुरूस्त किया जाये। इस कार्रवाई से अपराधी स्वदेश आने पर मजबूर होंगे। इस बैठक के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सूचना और संचार प्रोद्योगिकी को और मजबूत करने के बारे में भी विचार-विमर्श किया गया।
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