भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) का समुद्री और तटीय सर्वेक्षण प्रभाग (एमसीएसडी) 15 फरवरी, 2024 को मैंगलोर में “ऑफशोर एक्सप्लोरेशन: सिनर्जी एंड अपॉर्चुनिटीज (ओईएसओ)” नामक एक कार्यशाला आयोजन करेगा। यह कार्यशाला अपतटीय अन्वेषण को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सहयोगात्मक प्रयास है।
ओईएसओ कार्यशाला का उद्देश्य सरकारी निकायों, अनुसंधान संस्थानों, शिक्षाविदों और उद्योग प्रमुखों सहित अपतटीय क्षेत्र में प्रमुख हितधारकों के बीच सहयोग और ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर कार्यशाला के मुख्य अतिथि के तौर पर खान मंत्रालय के सचिव वी.एल. कांथा राव उपस्थित रहेंगे। इस कार्यक्रम में जीएसआई के महानिदेशक जनार्दन प्रसाद, विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ पदाधिकारी, राज्य खनन और भूविज्ञान निदेशालय, पीएसयू, निजी खनन उद्योग के प्रतिनिधि, खनन संघ और अन्य हितधारक भी शामिल होंगे।
कार्यशाला के अंतर्गत अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2002 में संशोधन,हाल ही में जीएसआई द्वारा 35 अपतटीय ब्लॉकों की नीलामी के लिए खान मंत्रालय को सौंपना और निजी अन्वेषण एजेंसियों की अधिसूचना के लिए मसौदा दिशानिर्देश तैयार करने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इस विचार-विमर्श का उद्देश्य अपतटीय अन्वेषण के लिए महत्वपूर्ण अपतटीय अन्वेषण गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को सुव्यवस्थित और सुविधाजनक बनाना है।
इसके अलावा, कार्यशाला के एजेंडे में विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला भी शामिल है, जिसमें अपतटीय में जीएसआई गतिविधियों का अवलोकन, अन्वेषण और दोहन को बढ़ावा देने में सरकारी पहल, डेटा साझा करने के लिए सहयोगी तंत्र और अपतटीय खनिज अन्वेषण के लिए स्थायी कार्य प्रणाली शामिल हैं। कार्यशाला का उद्देश्य अपतटीय अन्वेषण में शामिल एजेंसियों के बीच प्रभावी डेटा साझाकरण और सहयोग के लिए तंत्र स्थापित करना, अपतटीय खनिज संसाधनों में नवाचार और अन्वेषण को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त अनुसंधान पहल, सूचना साझाकरण और तकनीकी विशेषज्ञता के आदान-प्रदान के लिए अनुकूल वातावरण को बढ़ावा देना है।
कार्यशाला में डेटा अधिग्रहण से लेकर पर्यावरणीय विचारों तक के विषयों पर प्रमुख विशेषज्ञों अपने विचार साझा करेंगे। इससे प्रतिभागियों को अपतटीय अन्वेषण क्षेत्र के भीतर चुनौतियों और अवसरों के संदर्भ महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी। इस कार्यशाला का उद्देश्य मंत्रालयों, अनुसंधान संस्थानों, शिक्षाविदों और उद्योग से अपेक्षित प्रतिभागियों की एक विस्तृत सूची तैयार करने के साथ-साथ सार्थक चर्चाओं के लिए एक साझा मंच प्रदान करना है, जिससे खनिज संसाधनों और पर्यावरण संरक्षण के सतत विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
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