प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि शंघाई सहयोग संगठन क्षेत्र-एस.सी.ओ. के सामने आ रही समस्याओं का मूल कारण कट्टरता का बढ़ना है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में हाल के घटनाक्रमों ने कट्टरपंथ से उत्पन्न चुनौतियों को और अधिक स्पष्ट कर दिया है।
वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से शंघाई सहयोग परिषद के राष्ट्राध्याक्षों की 21 वीं बैठक के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती शांति, सुरक्षा और विश्वास की कमी से संबंधित है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कट्टरपंथ के खिलाफ लड़ाई न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा और विश्वास के लिए जरूरी है बल्कि युवाओं के उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए भी जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने कहा, एससीओ की 20वीं वर्षगांठ, इस संस्था के भविष्य के बारे में सोचने के लिए भी उपयुक्त अवसर है। मेरा मानना है कि इस क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौतियां शांति, सुरक्षा और ट्रस्ट डेफिसिट से संबंधित है और इन समस्याओं का मूल कारण बढ़ता हुआ रेडिकलाइजेशन है। अफगानिस्तान में हाल के घटनाक्रम ने इस चुनौती को और स्पष्ट कर दिया है। इस मुद्दे पर एससीओ को पहल लेकर कार्य करना चाहिए।
शंघाई सहयोग संगठन-एस सी ओ के सदस्य राष्ट्रों ने स्वतंत्र, तटस्थ, संयुक्त, लोकतांत्रिक और शान्त तथा आतंकवाद, युद्ध और नशीले पदार्थों से मुक्त राष्ट्र के रूप में अफगानिस्तान का समर्थन व्यक्त किया है। एस सी ओ की बैठक के बाद स्वीकार की गई दुशांबे घोषणा में सदस्य राष्ट्रों ने भरोसा जताया है कि अफगानिस्तान में एक समावेशी सरकार बनेगी, जिसमें अफगान समाज के सभी जातीय, धार्मिक और राजनीतिक समूहों का प्रतिनिधित्व होगा।
सभी सदस्य राष्ट्रों ने आतंकवाद के सभी रूपों और स्वरूपों की कड़ी निन्दा की। उन्होंने दोहराया कि आतंकवाद और इसके वित्त पोषण रोकने के लिए संयुक्त प्रयास बढाने की आवश्यकता है। ये राष्ट्र अपने-अपने क्षेत्रों में आतंकी कार्रवाई की तैयारी और इसके वित्त पोषण को रोकने के प्रयास बढायेंगे तथा अपने क्षेत्रों को आतंकवादियों की शरणस्थली नहीं बनने देंगे।
इसके अलावा ये राष्ट्र आतंकवादियों की पहचान के लिए सहयोग बढाने और आतंकवाद, अलगाववाद तथा कट्टरवाद में शामिल व्यक्तियों और संगठनों की गतिविधियों को रोकने और उन्हें खत्म करने पर भी सहमत हुए हैं।
सदस्य राष्ट्रों ने राष्ट्रीय विकास रणनीतियों, डिजिटल अर्थव्यवस्था योजनाओं तथा नवाचार प्रौद्योगिकियों को तैयार करने और इनको लागू करने के अनुभव साझा करने पर जोर दिया है। इसके अलावा इन राष्ट्रों ने ऊर्जा क्षेत्र में आपसी सहयोग बढाने की आवश्यकता भी बताई है।
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