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पेरिस समझौते के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए उद्योग क्षेत्र में कार्बन को कम करने की दिशा में प्रयास करने महत्वपूर्ण हैं: भूपेंद्र यादव

ग्लासगो में सीओपी 26 के मौके पर, भारत और स्वीडन की अध्यक्षता में लीडआईटी (लीडरशिप ग्रुप फॉर इंडस्ट्री ट्रांज़िशन) शिखर सम्मेलन 2021 का आयोजन हाइब्रिड मोड में किया गया। इस अवसर पर अपने उद्घाटन संभाषण में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने उल्लेख किया कि उद्योग क्षेत्र एक साथ मिलकर लगभग 30 प्रतिशत सीओ2 का उत्सर्जन का करते हैं, और इसलिए, पेरिस समझौते के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए उद्योग क्षेत्र में कार्बन को कम करने की दिशा में प्रयास करने महत्वपूर्ण हैं।

लीड आईटी निजी क्षेत्र की कंपनियों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से विशेष रूप से आयरन एंड स्टील, एल्युमिनियम, सीमेंट और कंक्रीट, पेट्रोकेमिकल्स, उर्वरक, ईंटों, भारी शुल्क परिवहन आदि जैसे कठिन क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन को कम करने को प्रोत्साहन देने के लिए एक स्वैच्छिक पहल है।

भूपेंद्र यादव ने जोर देते हुए कहा कि यद्यपि संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रिया और इथियोपिया जैसे नए देश और स्कांस्का, हीडलबर्ग सीमेंट और साल्ज़गिटर जैसी कंपनियां इस पहल में शामिल हो गई हैं पर इसके साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि भारी उद्योगों की अधिक से अधिक कंपनियां इस वैश्विक पहल में शामिल हों।

पर्यावरण मंत्री ने वैश्विक स्तर पर कम कार्बन का उत्सर्जन करने वाले उद्योगों में महत्वपूर्ण अंतराल का उल्लेख करते हुए प्रौद्योगिकी विकास और हस्तांतरण, व्यापक और गति के साथ पर्याप्त वित्त प्रवाह सुनिश्चित करना, क्षमता उपयोग और उद्योग परिवर्तन को सुविधाजनक बनाने के लिए नीतियां को शामिल करने के साथ इस बात पर भी जोर दिया कि भारी उद्योग में कम कार्बन के किसी भी उत्पादन के लिए उद्योग को वैकल्पिक फीड भंडारों के साथ-साथ प्रक्रिया-संबंधित उत्सर्जन को कम करने के प्रयासों में दोनों स्तर पर हस्तक्षेप की आवश्यकता है, यह विकासशील देशों के लिए चुनौतीपूर्ण है जो अभी तक इस संबंध में अधिकांश तौर पर बुनियादी ढांचे का निर्माण नहीं कर पाए हैं।

भूपेंद्र यादव ने जोर देते हुए कहा कि विकसित देशों को भी हरित प्रौद्योगिकियों के उत्पादों के लिए अग्रणी बाजार प्रदान करना चाहिए और लागत को कम करना चाहिए ताकि इन्हें विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में भी व्यापक स्तर पर स्थापित किया जा सके।

स्वीडन के माननीय उप प्रधानमंत्री और पर्यावरण मंत्री पेर बोलुंड ने बैठक की सह-अध्यक्षता करते हुए लीडआईटी समूह में नए सदस्यों का स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पूर्ण रूप से शून्य लक्ष्य को हासिल करने, पेरिस समझौते के लक्ष्य की प्राप्ति और नए और हरित अवसरों के निर्माण के मामले में उद्योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने जीवाश्म मुक्त भविष्य के लिए परिवर्तन के लिए देशों के बीच सहयोग और निवेश के महत्व के साथ-साथ इस दिशा में निजी क्षेत्र और नागरिक समाजों सहित और अधिक मित्रों को जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी और मांग के सृजन से मुख्य रूप से उत्सर्जन में कमी और हरित रोजगार के सृजन में मदद मिलती है।

अमरीका में जलवायु के लिए राष्ट्रपति के विशेष दूत जॉन केरी ने कहा कि वित्त के साथ प्रौद्योगिकी को जोड़ने वाले अवसरों का पता लगाना महत्वपूर्ण है, और इस मामले में लीड आईटी उद्योग क्षेत्र में पूर्ण शून्य लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए देशों के बीच समर्थन बनाने में मदद करेगा।

डालमिया सीमेंट के महेंद्र सिंघी ने डीकार्बोनाइज और पूर्ण रूप से शून्य कार्बन लक्ष्य को हासिल करने की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए कहा कि इसके लिए लीडआईटी की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने उल्लेख किया कि डालमिया सीमेंट ने 2040 तक नेट जीरो हासिल करने का लक्ष्य रखा है, यदि समर्थन प्राप्त होता है तो इसे इस तय समय-सीमा से पहले भी हासिल किया जा सकता है।

इस कार्यक्रम में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रिया, ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, इथियोपिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, आयरलैंड, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड, स्वीडन, यूएसए, यूके, यूक्रेन, डालमिया सीमेंट, हीडलबर्ग सीमेंट, लाफार्जहोल्सिम, थिसेनक्रुप, एसएसएबी, स्कैनिया, स्कांस्का, सहित लीडआईटी के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव, विश्व अर्थव्यवस्था मंच आदि सदस्य देशों और कंपनियों ने भाग लिया।

यूक्रेन, जो फिलहाल लीडआईटी समूह का सदस्य नहीं है, ने जानकारी दी कि उसने इस पहल में शामिल होने की अपनी इच्छा जताई है। नीदरलैंड ने मिशन इनोवेशन के तहत भारत के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से कार्यान्वित की जा रही मिशन इंटीग्रेटेड बायोरिफाइनरियों का उल्लेख किया। इथियोपिया ने कार्बन समाप्त करने पर चर्चा करते हुए वित्त के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि इसके लिए न केवल सरकारों के बीच, बल्कि निजी क्षेत्रों के बीच भी सहयोग महत्वपूर्ण है। विश्व आर्थिक मंच 2030 की योजना को लागू करने के लिए आशान्वित है।

इस आयोजन में भारत और स्वीडन के मंत्रियों ने लीडआईटी शिखर सम्मेलन 2021 के कानूनी शिखर सम्मेलन पर वक्तव्य दिया।

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