पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने आज दुहराया कि भारत में चीतों को फिर बसाने की योजना सही ढंग से चल रही है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से भारत वन्यजीव और प्रकृति के संरक्षण का उदाहरण प्रस्तुत करेगा। नई दिल्ली में चीता परियोजना पर संवाददाताओं के प्रश्न के उत्तर में पर्यावरण मंत्री ने कहा कि इस योजना को एक वर्ष होने वाला है। इस दौरान चीतों ने खुद को मौसम के अनुकूल बनाया और अपने इलाके स्थापित किये। उन्होंने कहा कि युवा वैज्ञानिक और वनकर्मी इस परियोजना की निगरानी कर रहे हैं। भूपेन्द्र यादव ने कहा कि पारिस्थितिकीय असंतुलन को दुरूस्त करने के लिए यह विशेष कार्यक्रम है और आशा है कि यह परियोजना सफल होगी।
इस परियोजना के तहत दक्षिण अफ्रीका से 20 चीते लाकर मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में बसाये गये। इस अवसर पर भूपेन्द्र यादव ने पर्यावरण और श्रम क्षेत्रों की उपलब्धियों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार वन्यजीव संरक्षण के लिए अनेक उपाय कर रही है। पिछले नौ वर्ष में देश में बाघों की संख्या 42 प्रतिशत बढ गयी है। तेंदुओं और गैंडों की संख्या भी बढी हैं। भूपेन्द्र यादव ने कहा कि सरकार ने वन संबंधी स्वीकृति देने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया है।
भूपेन्द्र यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार ने श्रम कल्याण के लिए अनेक उपाय किए हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के सदस्यों की संख्या बढ़कर दो करोड 77 लाख हो गयी है। इससे पता चलता है कि 2014 के बाद संगठित क्षेत्र में रोजगार बढ़े हैं।
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