नीति आयोग और किंगडम ऑफ़ नीदरलैंड के दूतावास ने 6 फरवरी 2024 को भारत ऊर्जा सप्ताह में ‘मध्यम और भारी वाणिज्यिक वाहनों में परिवहन ईंधन के रूप में एलएनजी’ शीर्षक से रिपोर्ट जारी की। नीति आयोग और नीदरलैंड साम्राज्य दूतावास 2020 से आशय वक्तव्य (एसओआई) साझेदारी के तहत ऊर्जा स्रोतों में बदलाव के क्षेत्र में सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं। आपसी सहयोग के पहले परिणाम के रूप में यह रिपोर्ट जारी की गई है।
सुमन बेरी, उपाध्यक्ष, नीति आयोग, भारत सरकार और एच.ई. फ्रेडरिक विसेलिंक, ऊर्जा राजनयिक, आर्थिक मामलों और जलवायु नीति मंत्रालय, नीदरलैंड सरकार द्वारा संयुक्त रूप से रिपोर्ट को प्रवीण मल खानूजा, अपर सचिव, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय; एच.ई. मारिसा जेरार्ड्स, राजदूत, भारत, नेपाल और भूटान में किंगडम ऑफ़ नीदरलैंड का दूतावास; मानसी त्रिपाठी, अध्यक्ष, शेल ग्रुप ऑफ कंपनीज, भारत और उपाध्यक्ष, ल्यूब्रिकेंट्स, एशिया प्रशांत और कमल किशोर चटिवाल, प्रबंध निदेशक, इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड की उपस्थिति में लॉन्च किया गया।
इस अवसर पर सुमन बेरी ने कहा, “नीति आयोग और नीदरलैंड दूतावास द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई यह रिपोर्ट ईंधन स्रोत के रूप में एलएनजी का लाभ उठाने और मध्यम और वाणिज्यिक वाहन खंड में इसके उपयोग को अनुकूलित करने पर केंद्रित है। यह विभिन्न हितधारकों के सामने आने वाले समन्वय संबंधी मुद्दों की जांच करता है और इन चुनौतियों से निपटने के लिए उन सबकों पर प्रकाश डालता है, जो अन्य देशों से सीखे जा सकते हैं।”
नीदरलैंड के ऊर्जा राजनयिक फ्रेडरिक विसेलिंक ने कहा, “नीदरलैंड, भारत की तरह, ऊर्जा स्रोतों में बदलाव के माध्यम से कार्बन कटौती पर प्राथमिक ध्यान देने के साथ, स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहा है। 2015, पेरिस समझौता में निर्धारित अंतर्राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्य को हासिल करने के लिए, ऊर्जा क्षेत्र में नीदरलैंड की विशेषज्ञता के लिए भारत के सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के साथ काम करने की काफी संभावनाएं हैं। नीदरलैंड हरित हाइड्रोजन क्रांति शुरू करने और जीवाश्म ईंधन को प्रतिस्थापित करने के लिए यूरोपीय पहल में सबसे आगे है। यूरोप के दूसरे सबसे बड़े हाइड्रोजन उत्पादक के रूप में तथा स्वच्छ तरीके से इसे उत्पादित करने की महत्वाकांक्षा के साथ व आगामी हाइड्रोजन नेटवर्क, जिसे ‘बैकबोन’ कहा जाता है, भविष्य की विशाल हरित हाइड्रोजन मात्रा के लिए प्रवेश बिंदु की पेशकश के साथ, नीदरलैंड अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर हरित हाइड्रोजन समाधानों को सामने लाने का इच्छुक है।”
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अपर सचिव प्रवीण मल खनूजा ने कहा, “रिपोर्ट उन रणनीतियों पर प्रकाश डालती है, जो प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति में 15% की गैस हिस्सेदारी और 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य हासिल करने में मदद करेंगी। मंत्रालय ईंधन के रूप में एलएनजी के प्रति बहुआयामी दृष्टिकोण अपना रहा है और इस संदर्भ में हितधारकों के साथ काम करने का इच्छुक है।”
भारत में किंगडम ऑफ़ नीदरलैंड की राजदूत एच.ई मारिसा जेरार्ड्स ने नीति आयोग के साथ साझेदारी के परिणामस्वरूप महत्वपूर्ण रिपोर्ट के लॉन्च होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने निजी क्षेत्र की भूमिका पर जोर दिया, जो न केवल भारत में, बल्कि नीदरलैंड में भी सभी के लिए हरित भविष्य की दिशा में नवाचार और प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए शेल इंडिया, जो इस तरह की सहयोगी ज्ञान पहल को बढ़ावा दे रहा है। इसके अलावा, यह संयुक्त रिपोर्ट, सतत विकास के लिए अपने ऊर्जा क्षेत्र को बदलने और जलवायु-सहनीय अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए दोनों देशों की प्रतिबद्धताओं पर प्रकाश डालती है।
रिपोर्ट भारत में एलएनजी अपनाने से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों और बाधाओं का पता लगाती है और कार्रवाई योग्य समाधानों के एक रोडमैप की सिफारिश करती है। रिपोर्ट इन सिफारिशों के लिए एक पारदर्शी कार्यान्वयन व्यवस्था के विकास की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है, जो मांग निर्माण और बाजार शुरुआत के लघु-अवधि लक्ष्यों से प्रेरित हो।
आगे बढ़ते हुए, नीति आयोग और किंगडम ऑफ़ नीदरलैंड दूतावास ने ऊर्जा स्रोतों में बदलाव के अलावा चक्रीय अर्थव्यवस्था पर ध्यान देने के साथ सतत विकास पर अपने सहयोग को और सशक्त करने के लिए मिलकर काम करने की योजना बनाई है।
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