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दीर्घकालिक विकास के लिए डेटा पर संगोष्ठी: भारत की पर्यावरण गणना और नीति और निर्णय में इसकी भूमिका

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित करके 27 जून 2022 से ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव (एकेएएम) सप्ताह मना रहा है। उत्सव के अंतर्गत, मंत्रालय ने हाइब्रिड मोड में आज (28 जून 2022) “दीर्घकालिक विकास के लिए डेटा: भारत की पर्यावरण गणना और नीति और निर्णय में इसकी भूमिका” विषय पर आधे दिन की एक संगोष्ठी का आयोजन किया। 

संगोष्ठी का उद्देश्य ‘प्रकृति के मूल्यांकन’ की दिशा में तेजी से विस्‍तार करना और इन मूल्यों का उपयोग अंतर्राष्ट्रीय सांख्यिकीय मानक “पर्यावरण आर्थिक गणना प्रणाली (एसईईए) ढांचे” के साथ वैश्विक और राष्ट्रीय आंकड़ों को जोड़ने में करना है। स्‍थायी विकास के लिए 2030 के एजेंडा के लिए वैश्विक प्रतिबद्धता के साथ, प्राकृतिक संसाधनों में एसईईए का इस्‍तेमाल कई गुना बढ़ गया है। एसईईए ढांचा एसडीजी के साथ जुड़ा हुआ है और एसईईए डेटा का उपयोग करके नौ स्‍थायी विकास लक्ष्यों के लिए लगभग 40 वैश्विक संकेतकों का मूल्यांकन किया जा सकता है। ये गणना एक सुसंगत निगरानी ढांचा प्रदान करती है जो पारिस्थितकी प्रणाली के परिमाण और उसकी स्थिति के साथ-साथ इकोसिस्‍टम सेवाओं की आपूर्ति और इस्‍तेमाल के बारे में व्‍यवहार्य संकेतकों को सामने लाता है। इसका उपयोग जलवायु प्रभावों और अनुकूलन रणनीतियों से संबंधित जलवायु परिवर्तन संबंधी व्‍यापक नीतिगत प्रश्नों की जानकारी देने के लिए भी किया जा सकता है।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 2018 में एसईईए ढांचे को अपनाया और विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों पर नियमित रूप से गणनाओं का संकलन कर रहा है। पर्यावरण गणना प्रणाली के क्षेत्र में भारत द्वारा किए गए कार्यों को प्रदर्शित करने और भारत में पर्यावरण गणना के कवरेज का विस्‍तार करने की दिशा में भविष्य के प्रयासों का मार्ग प्रशस्त करने के लिए मंत्रालय ने इस संगोष्ठी का आयोजन किया।

संगोष्ठी इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, लोधी रोड, नई दिल्ली में आयोजित की गई थी। हालांकि, हाइब्रिड प्रकृति की होने के कारण, प्रतिभागी अन्य मीडिया मोड के माध्यम से भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। संगोष्ठी को यू ट्यूब और फेसबुक पर भी सीधे दिखाया गया। सेमिनार की शुरुआत उद्घाटन सत्र के साथ हुई जिसके बाद दो तकनीकी सत्र हुए। इस कार्यक्रम में पूरे देश और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से उल्लेखनीय भागीदारी देखी गई। संगोष्ठी की रिकॉर्डिंग मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी।

एमओएसपीआई में भारत के मुख्य सांख्यिकीविद् और सचिव डॉ. जी.पी. सामंत ने अपने स्वागत भाषण में पर्यावरण-आर्थिक लेखा प्रणाली (एसईईए) को अपनाने सहित पर्यावरण गणना के क्षेत्र में मंत्रालय की पहल के बारे में संक्षेप में बात की। इसके बाद संगोष्ठी के मुख्य अतिथि और नीति आयोग के उपाध्‍यक्ष सुमन के. बेरी ने मुख्य भाषण दिया। उन्होंने प्रारंभिक चरण में पर्यावरण गणना को अपनाने और इस दिशा में निरंतर प्रयासों के लिए एमओएसपीआई की सराहना की। उन्होंने देश की विशाल तटीय रेखा और अर्थव्‍यवस्‍था में उसकी भूमिका को ध्‍यान में रखते हुए ओशन एकाउंट्स के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि नीति आयोग और एमओएसपीआई को अपनी साझेदारी जारी रखनी चाहिए। अन्य प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों में यूएनडीपी, भारत के पर्यावरण, ऊर्जा और लचीलापन प्रमुख आशीष चतुर्वेदी और एमओईएफसीसी में वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार अरुण कुमार शामिल थे। संगोष्ठी के दौरान जो मुख्‍य विचार सामने आया वह यह था कि पर्यावरण संबंधी सरोकार किसी भी सीमा को ध्‍यान में नहीं रखते हैं और वर्तमान में सभी के जीवन और भविष्‍य की पीढि़यों को प्रभावित करते हैं यह विधिवत रूप से स्वीकार किया गया था कि पर्यावरण और स्थिरता समृद्धि का मार्ग है और निर्णय लेने में नीतियों को तैयार करते समय ‘पर्यावरण’ को मुख्य धारा में लाने की आवश्यकता है।

एसईईए के परिप्रेक्ष्य और एसडीजी के साथ इसके अंतर-संबंध विषय पर कार्यक्रम का पहला तकनीकी सत्र पर्यावरण की गणना प्रणाली में भारत द्वारा किए गए प्रयासों, एसईईए और एसडीजी के संबंधों और उप-राष्ट्रीय स्तर पर एसईईए के अनुप्रयोगों पर चर्चा के लिए समर्पित था। चूंकि ‘ओशन एकाउंट’ पर्यावरण आर्थिक गणना (2022-2026) के लिए मंत्रालय के पंचवर्षीय रणनीति दस्तावेज़ में पहचाने गए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में से एक है, इसलिए संगोष्ठी का दूसरा तकनीकी सत्र एक पैनल चर्चा थी जिसे भारत की अर्थव्यवस्था में महासागर और तटीय संसाधनों के महत्वपूर्ण योगदान को मान्यता देने वाले ‘ओशन एकाउंटिंग’ विषय को समर्पित किया गया था। इस सत्र में ओशन एकाउंट्स के विकास के लिए विभिन्न दृष्टिकोणों और चुनौतियों पर चर्चा की गई, साथ ही भारत में ओशन एकाउंटिंग के लिए रोडमैप का सुझाव दिया गया।

संगोष्ठी ने एक वैचारिक ढांचे का उपयोग करने के महत्व को रेखांकित किया जो पारंपरिक गणना सिद्धांतों के साथ वैज्ञानिक और आर्थिक डेटा को एकीकृत करते हुए इस तथ्य पर बल देता है कि एसईईए साक्ष्य-आधारित नीतियों को तैयार करने में मदद कर सकता है जो एक स्थायी भविष्य सुनिश्चित करता है। यह भी जोर दिया गया था कि यह आसन्न हो गया था, विशेष रूप से भारत जैसे विकासशील देशों के लिए, यह सुनिश्चित करने के लिए कि सभी आर्थिक निर्णयों में पर्यावरण के व्यवस्थित विचारों के लिए तंत्र स्थापित किया गया है। संगोष्ठी एनएसओ, एमओएसपीआई द्वारा नीतिगत प्रतिमान में पर्यावरण को एक महत्वपूर्ण आयाम देने का एक प्रयास था। एनएसओ, भारत सभी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों से समर्थन और सहयोग की अपेक्षा करता है।

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