केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गणतंत्र दिवस की पूर्वसंध्या पर आज वायब्रेंट विलेजेज़ कार्यक्रम के गांवों के विशेष अतिथियों के साथ नई दिल्ली में संवाद किया। इस अवसर पर पृथ्वी विज्ञान मंत्री किरेन रिजिजू, सूचना एवं प्रसारण तथा युवा कार्यक्रम व खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर और गृह राज्यमंत्रीतथा युवा कार्यक्रम व खेल राज्य मंत्री निशिथ प्रमाणिक सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि भारत के सीमावर्ती गांवों और दिल्ली के बीच की दूरी बेशक अधिक हो लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने वायब्रेंट विलेज कार्यक्रम के माध्यम से दिलों की दूरी कम करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि जब तक देश का प्रथम गांव विकसित नहीं होता, तब तक एक विकसित भारत नहीं बन सकता। अमित शाह ने कहा कि इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी का मानना है कि सीमा पर स्थित गांव देश का अंतिम नहीं बल्कि प्रथम गांव है। उन्होंने कहा कि पहले इन सीमावर्ती गांवों में मूलभूत सुविधाएं ना होने के कारण यहां से पलायन होता था, लेकिन मोदी जी ने स्थानीय लोगों के लिए सुविधाओं की चिंता कर वायब्रेंट विलेज कार्यक्रम के माध्यम से पलायन की समस्या को दूर करने के प्रयास किए हैं।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि वायब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और लद्दाख में 19 सीमावर्ती क्षेत्रों के 3 हज़ार गांवों को कवर किया जा रहा है और ये कार्यक्रम 10 सालों में पूरी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इस योजना के पहले चरण में 662 गावों को कवर किया जा रहा है जिनकी कुल आबादी 1,42,000 है और सरकार इस पर 4800 करोड़ रुपए खर्च कर रही है।
अमित शाह ने कहा कि वायब्रेंट विलेज कार्यक्रम के 3 उद्देश्य हैं- चरणबद्ध तरीके से देश के प्रथम गांव का संपूर्ण विकास, सीमावर्ती गांवों से पलायन रोकना और स्थानीय संस्कृति का संरक्षण करना और गांवों में हर प्रकार की कनेक्टिविटी में सुधार,मूलभूत सुविधाएं और इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास करना। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में 2500 करोड़ रूपए के खर्च से सड़कों का निर्माण हो रहा है जिससे कनेक्टिविटी बढ़ने से लोगों को सुविधा होगी। अमित शाह ने कहा कि आज़ादी के 70 सालों में जितना खर्च इन गांवों के विकास पर हुआ है, उससे दो गुना से भी अधिक खर्च नरेन्द्र मोदी सरकार ने वहां के इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास पर पिछले 5 सालों में ही कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में ग्रामीण विकास की 220 से अधिक सरकारी योजनाओं का 100 प्रतिशत सेचुरेशन वायब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत आने वाले गांवों में करना सुनिश्चित किया जा रहा है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा गणतंत्र दिवस के अवसर पर आए वायब्रेंट विलेजेज़ के पंच, सरपंच और साथ आए लोग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मेहमान हैं और उन्होंने उनकी सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा है। अमित शाह ने कहा कि गणतंत्र दिवस की परेड भारत की सांस्कृतिक, सैन्य और जनशक्ति का प्रदर्शन होती है जिसे पूरी दुनिया अचंभित होकर देखती है।
वाइब्रेंट विलेजेज के पंच और सरपंच अपने परिवारों के साथ भारत सरकार के “विशेष अतिथि” के रूप में कर्तव्य पथ पर इस साल की गणतंत्र दिवस परेड के साक्षी बनेंगे। गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर इन विशेष अतिथियों की मेजबानी कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के “Leaving No Citizen Behind” (किसी भी नागरिक को पीछे न छोड़ने) और सीमावर्ती गांव को देश का “पहला गांव” बनाने के विजन को साकार करने के लिए केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कुशल मार्गदर्शन में गृह मंत्रालय नेवाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम जैसी महत्वपूर्ण पहल की है। इसका उद्देश्य अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के सीमावर्ती ब्लॉकों में स्थित गांवों का व्यापक विकास करना है।
वाइब्रेंट विलेजेज से आए विशेष अतिथियों ने प्रधानमंत्री संग्रहालय का दौरा भी किया। 27 जनवरी को वे “भारत पर्व” में भाग लेंगे। इसके साथ ही विशेष अतिथियों को 27 जनवरी को होने वाली एनसीसी कैडेटों की “पीएम रैली” देखने के लिए भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।
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