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गृह मंत्री अमित शाह ने एनडीआरएफ के जवानों के साथ भोजन और संवाद किया

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज अपनी महाराष्ट्र यात्रा के दूसरे दिन पुणे में एनडीआरएफ की पांचवी बटालियन के कैंप परिसर का औपचारिक उद्घाटन कर नए परिसर का निरीक्षण किया और सीएफ़एसएल परिसर में नए भवन का लोकार्पण किया। अमित शाह ने एनडीआरएफ़ के जवानों के साथ भोजन और संवाद भी किया। केन्द्रीय गृह सचिव और एनडीआरएफ़ के महानिदेशक सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे। एनडीआरएफ़ के नवनिर्मित परिसर में जवानों के लिए बैरक, मेस, अधिकारियों और जवानों के लिए रिहायश, स्कूल, यूनिट अस्पताल, एटीएम, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और हैलीपैड जैसी सुविधाएं मौजूद हैं।

इस अवसर पर अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि एनडीआरएफ़ विश्वास का प्रतीक है और उनकी उपस्थिति मात्र से ही लोगों के मन में सुरक्षा का भाव उत्पन्न हो जाता है। इतने कम समय में एनडीआरएफ की 16 बटालियनें पूरे देश में अपना काम बहुत अच्छे तरीके से कर रही हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की आपदा हो बाढ़, भूस्खलन, तूफ़ान, कहीं इमारत ढह गई हो या बिजली गिरी हो, हर मौक़े पर एनडीआरएफ जवानों के पहुंचते ही देश की जनता राहत लेती है कि अब एनडीआरएफ आ गया है और हम सब सलामत हैं। उन्होंने कहा कि इतने कम समय में, इतने बड़े देश में और इतने कठिन क्षेत्र में यह विश्वास पैदा कर पाना बहुत कठिन होता है और वह तभी होता है जब बल के मुखिया से लेकर अंतिम व्यक्ति तक सब लोग अपने उद्देश्य के प्रति समर्पित हों। यह तब होता है जब अपनी चिंता किए बिना जिसे बचाने आए हैं, उसकी चिंता करें, अपनी जान की चिंता किए बिना जिसकी जान बचानी है, उसके लिए काम करें। अमित शाह ने कहा कि आपने देश में बहुत कम समय में लोगों का विश्वास अर्जित किया है और ये ख्याति सिर्फ भार में ही नहीं बल्कि बहुत सारे देशों में हुई है। विदेशों में भी एनडीआरएफ़ को कई बार भेजा गया और वहां पर भी बहुत अच्छे परिणाम आए और बहुत अच्छे संदेश आप भारत के लिए छोड़ कर आए हैं और वह तभी संभव हो सकता है जब आप वसुधैव कुटुंबकम में भरोसा करते हो। समग्र मानव जाति के प्रति एनडीआरएफ की जो संवेदना और समर्पण है ये इसका परिचायक है और हमें यह बरकरार रखना चाहिए।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि एनडीआरएफ को कई अन्य क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ का एक तरीक़े से काम करने का स्वभाव बनाने और एनडीआरएफ के तत्वाधान में एसडीआरएफ को भी एनडीआरएफ के समकक्ष बनाने के लिए बहुत कुछ करना अभी बाकी है। जब तक एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के एक प्रकार से एक साथ काम करने का प्रशिक्षण और अभ्यास नहीं होंगे, तब तक हम इतने बड़े देश में हर आपदा के समय जनता को बचाने पाने में सफल नहीं हो सकते।

अमित शाह ने कहा कि 2006 में एनडीआरएफ का गठन हुआ और उस वक्त आठ बटालियन थीं जो बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ के जवानों को लेकर बनाई गई थीं। आज इस बल की 16 बटालियन हो चुकी हैं और 28 शहरों में रीजनल रिस्पांस सेंटर औप रीजनल रिस्पांस टीम भी मौजूद हैं। एनडीआरएफ को दुनियाभर के आपदा के क्षेत्रों के सभी पहलुओं और डाइमेंशन की स्टडी करने के लिए अपने यहां टीम बनानी चाहिए और वह टीम एनडीआरएफ को विश्व में सबसे अच्छा आपदा मोचन बल बनाने की दिशा में ले जाए, ये सुनिश्चित करना चाहिए। आज पूरे विश्व में सबसे अच्छे और सबसे बड़े आपदा मोचन बलों में एनडीआरएफ की गणना हो रही है, ये पूरे देश के लिए और भारत सरकार के लिए बहुत गौरव का विषय है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आपके समर्पण, इतिहास और ड्यूटी के प्रति निष्ठा के कारण ही यह सिद्ध हो पाया है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आज फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री सेंटर पुणे की प्रयोगशाला का भी लोकार्पण हुआ है। अब तक देश में सात केंद्रीय न्यायिक वैज्ञानिक प्रयोगशालाएं बनी हैं। 1904 में हमारे देश में फॉरेंसिक साइंस की नींव रखी गई और शिमला, हिमाचल प्रदेश में इसकी शुरुआत हुई। मगर इस क्षेत्र में भारत जैसे देश की आंतरिक सुरक्षा और न्यायप्रणाली को सुदृढ़ करना है तो अभी हमें इसमें बहुत सारा काम करना बाकी है। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने, जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब गुजरात की फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री को विश्वस्तरीय बनाने के लिए बहुत मेहनत से प्लानिंग की थी और आज गुजरात एफएसएल विश्व की सबसे अच्छी एफएसएल में से जानी जाती है। लेकिन इसके प्रसार में सबसे बड़ी कमी विशेषज्ञता वाला मानव संसाधन बल का अभाव था, ऐसा कोई कोर्स ही नहीं बना था जो इस क्षेत्र के लिए हो। फॉरेंसिक साइंस के क्षेत्र में हमारे देश के अंदर एक भी कॉलेज, यूनिवर्सिटी नहीं बनी थी। गुजरात में देश की पहली फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई। हमारा लक्ष्य है कि हर राज्य में राज्य सरकार 1-1 कॉलेज बनाए और इस यूनिवर्सिटी के साथ वह फॉरेंसिक साइंस कॉलेज को जोड़ें। जिस दिन सभी राज्यों में एक-एक फॉरेंसिक साइंस कॉलेज बन जाएगा तब इस देश में मानव संसाधन बल की कोई कमी नहीं रहेगी और फॉरेंसिक साइंस के अलग-अलग क्षेत्रों के एक्सपर्ट्स इन कॉलेजों और यूनिवर्सिटी से बाहर आएंगे और हमारी ज़रूरतों को पूरा करेंगे।

अमित शाह ने कहा कि हमारे इतने बड़े देश में अभियोजन का प्रमाण दुनिया के मुक़ाबले में बहुत कम है और हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि दोष सिद्धि के प्रमाण को हम बढ़ाएं। अगर अपराध नियंत्रण करना है तो अपराधी को सजा दिलाना ज़रूरी है और यह तभी हो सकता है जब जांच में वैज्ञानिक सुबूतों के लिए स्थान हो और यह दोनों काम एफएसएल के बगैर संभव नहीं हैं। भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने प्रधानमंत्री मोदी जी के मार्गदर्शन में प्रयास किया है कि देशभर में एफएसएल कॉलेज का एक जाल बुना जाए और वहां से प्रशिक्षित मैनपावर की उपलब्धता के आधार पर देश के बड़े राज्यों में तीन-चार एफएसएल की स्थापना हो। इसके बाद हर जिले में कम से कम दो मोबाइल एफएसएल बनाई जाए जो हर पुलिस स्टेशन को कवर करें। अगर इतना हम आने वाले पांच-दस साल में कर पाते हैं तो देश में एक कानूनी परिवर्तन भी किया जा सकता है कि 6 साल या ज्यादा सजा वाले मामलों में एफएसएल की टीम की विज़िट को हम अनिवार्य कर सकते हैं। मुझे विश्वास है कि जिस दिन हम ये कर लेंगे उस दिन दोष सिद्धि का प्रमाण बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा और हमारे देश की आंतरिक सुरक्षा और अपराध नियंत्रण दोनों में बहुत बड़ी सहायता मिलेगी।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि इससे आज क्या बदलाव आएगा, मैं उनको कहना चाहता हूँ कि अगर हम ऐसे ही सोचेंगे तो कभी भविष्य को संवार नहीं पाएंगे। आज हम जो बीज बोयेंगे वही आगे चलकर वटवृक्ष बनेगा और ये बीज डालने का काम मोदी सरकार कर रही है। सीएफएसएल की मैनपावर की स्थिति को भी हम बढ़ाएंगे। इसके साथ ही जल्द से जल्द साइंटिफिक एविडेंस सीधा कोर्ट और थाने तक इलेक्ट्रॉनिक तरीके से पहुंचाए, इसको भी सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे। भारत सरकार ने कई सॉफ्टवेयर डेवलप किए हैं जिनसे कोर्ट और एफएसएल को भी जोड़ा जा रहा है जिससे कोर्ट में कोई भी व्यक्ति या प्रॉसिक्यूटर नहीं कह सकेगा कि एफएसएल रिपोर्ट आनी बाकी है। रिपोर्ट कोर्ट के रिकॉर्ड में सीधी पहुंच जाएगी और इसकी प्रति थाने में जाएगी और एक कॉपी राज्य के गृह मंत्रालय के पास जाएगी। यह व्यवस्था जिस दिन स्थापित होगी उस दिन बहुत सारी देरी समाप्त हो जाएगी और विज्ञान का उपयोग करते हुए हम दोष सिद्धि के प्रमाण को बढ़ा पाएंगे। उन्होंने कहा कि आज ढेर सारी चुनौतियां आंतरिक सुरक्षा के सामने खड़ी हुई हैं, जैसे, नारकोटिक्स, हथियारों की तस्करी, जाली नोट, सीमापार से घुसपैठ आदि क्षेत्रों में एफएसएल के सहयोग से हम काफी कुछ कर सकते हैं।

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