कोविड-19 वैक्सीन की एक डोज़ महामारी से होने वाली मृत्यु की रोकथाम में 96.6 प्रतिशत प्रभावी है। दोनों डोज़ लेने के बाद प्रभावशीलता 97.5 हो जाती है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक, डॉ बलराम भार्गव ने कहा है कि वैक्सीन की यह सुरक्षात्मक प्रभावशीलता कोविन और कोविड इंडिया पोर्टल और कोविड परीक्षण पोर्टल के आंकड़ों के माध्यम से किए गए विश्लेषण में स्पष्ट हुई है। उन्होंने कहा कि टीके का सुरक्षात्मक प्रभाव 60 वर्ष से अधिक और 45 से 59 वर्ष के बीच तथा 18 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के सभी समूहों में देखा गया है। डॉ. भार्गव ने बताया कि इस साल 18 अप्रैल से 15 अगस्त के बीच आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
डॉ भार्गव ने कहा कि आंकड़ों से पता चलता है कि आबादी के जिन समूहों का टीकाकरण नहीं हुआ है उनमें मृत्युदर सर्वाधिक है और जिन लोगों ने टीके की दोनों डोज़ ले ली है उनकी मृत्यु दर लगभग न के बराबर है।
नीति आयोग में स्वास्थ्य सदस्य डॉ वी के पॉल ने कहा कि स्कूल खोलने के लिए बच्चों का टीकाकरण आवश्यक शर्त नहीं है। उन्होंने कहा कि यह मानदंड पूरी दुनिया में कहीं भी स्वीकार्य नहीं है।
राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के अन्तर्गत देश में 72 करोड से अधिक कोविड रोधी टीके लगाये जा चुके हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बताया कि देश में टीकाकरण अभियान रफ्तार पकड़ रहा है। देश की 18 प्रतिशत वयस्क आबादी को टीके की दोनों डोज लगाई जा चुकी हैं और 58 प्रतिशत लोगों को कम से कम एक डोज़ लग चुकी है। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि मौजूदा समय में स्वस्थ होने की दर 97.5 हो गई है।
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