कोयला मंत्रालय ने इंदौर में पहली बार निवेशक सम्मेलन का आयोजन किया। केन्द्रीय कोयला, खान और संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इस सम्मेलन की अध्यक्षता की। इस अवसर पर सांसद शंकर लालवानी उपस्थित थे।
प्रल्हाद जोशी ने इस बात को दोहराया कि कोयले की मांग कम से कम अगले 25-30 वर्षों तक बनी रहेगी और वर्तमान में भारत में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत दुनिया के कुछ अन्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं में प्रति व्यक्ति खपत का दसवां हिस्सा भी नहीं है। अनुमान है कि वर्ष 2040 तक प्रति व्यक्ति यह खपत दोगुनी हो जाएगी जिसके लिए कोयले की आवश्यकता होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में वर्तमान सरकार का ध्यान बेहतर तकनीकी प्रक्रियाओं को अपनाकर शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन वाला देश बनने पर है।
कोयला मंत्रालय में सचिव अमृत लाल मीणा ने कोयला उद्योग को समर्थन देने के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दोहराया और यह बताया कि संभावित बोलीदाताओं द्वारा अपेक्षित किसी भी प्रकार की सहायता देने के लिए कोयला मंत्रालय तत्पर है। कोल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष प्रमोद अग्रवाल ने कोयला क्षेत्र के कंपनियों को समर्थन देने हेतु विभिन्न पहल करने और इस तरह भारत को कोयले के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के दृष्टिकोण में योगदान देने के मंत्रालय के प्रयासों की सराहना की।
अपर सचिव एवं मनोनीत प्राधिकारी, एम. नागराजू ने मंच को कोयला मंत्रालय द्वारा कोयला नीलामी की प्रक्रिया में सुधार लाकर इसे आकर्षक और अपेक्षाकृत अधिक निवेशक अनुकूल बनाने के लिए किए गए सुधारों के बारे में बताया। सीएमपीडीआईएल के सीएमडी मनोज कुमार ने अब तक की सबसे बड़ी नीलामी प्रक्रिया में पेश किए जा रहे कोयला ब्लॉकों के तकनीकी विवरण से संबंधित एक प्रस्तुति दी और एसबीआई कैपिटल मार्केट्स के उपाध्यक्ष शुभम गोयल ने नीलामी प्रक्रिया के नियमों एवं शर्तों के संबंध में एक प्रस्तुति दी।
कोयला मंत्रालय ने पहले पांच चरणों में 64 कोयला खदानों की सफल नीलामी पूरी कर ली है। मंत्रालय ने व्यावसायिक नीलामी के छठे दौर के तहत 133 कोयला खदानों और व्यावसायिक नीलामी के पांचवें चरण के दूसरे प्रयास के तहत उन 8 कोयला खदानों की नीलामी की प्रक्रिया भी शुरू की, जहां पहले प्रयास में एकल बोलियां प्राप्त हुई थीं।
नीलामी प्रक्रिया की प्रमुख विशेषताओं में अग्रिम राशि एवं बोली की जमानत राशि में कमी, आंशिक रूप से खोजे गए कोयला खदानों के मामले में कोयला खदान के हिस्से को छोड़ने की अनुमति, राष्ट्रीय कोयला सूचकांक एवं राष्ट्रीय लिग्नाइट सूचकांक की शुरुआत, बिना किसी प्रवेश संबंधी बाधाओं के भागीदारी में आसानी, कोयले के उपयोग में पूर्ण लचीलापन, अनुकूलित भुगतान संरचना, शीघ्र उत्पादन के लिए प्रोत्साहन के माध्यम से दक्षता संवर्धन और स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी का उपयोग शामिल हैं।
निविदा दस्तावेज की बिक्री 03 नवंबर, 2022 को शुरू हुई। खदानों का विवरण, नीलामी की शर्तें, समय-सीमा आदि की जानकारी एमएसटीसी की नीलामी से संबंधित प्लेटफॉर्म पर देखी जा सकती है। प्रतिशत राजस्व हिस्सेदारी के आधार पर एक पारदर्शी दो-स्तरीय प्रक्रिया के माध्यम से नीलामी ऑनलाइन आयोजित की जाएगी। एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड, जोकि कोयला खदान की व्यावसायिक नीलामी के लिए कोयला मंत्रालय का एकमात्र लेनदेन सलाहकार है, नीलामी के संचालन में कोयला मंत्रालय की सहायता कर रहा है।
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