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केन्‍द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री FTA वार्ता के लिए ब्रिटेन का दौरा करेंगे; EFTA के साथ TEPA पर प्रगति की समीक्षा करेंगे

केन्‍द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 10 से 12 जुलाई 2023 तक ब्रिटेन का दौरा करेंगे। पीयूष गोयल की यह यात्रा न केवल भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्‍त व्यापार समझौते (एफटीए) पर वर्तमान में जारी बातचीत पर केन्द्रित होगी, बल्कि वह ईएफटीए के साथ व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) की प्रगति पर चर्चा करने के लिए यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के सदस्य देशों के मंत्रियों से भी मुलाकात करेंगे।

यह दौरा ऐसे महत्वपूर्ण समय में किया जा रहा है जब भारत और ब्रिटेन दोनों अपने आर्थिक संबंधों का विस्तार करने और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने की संभावनाओं की खोज करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। एफटीए वार्ता में तेजी आने के साथ, इस दौरे का उद्देश्य चर्चाओं को आगे बढ़ाना और एक व्यापक तथा पारस्परिक रूप से लाभप्रद समझौते का मार्ग प्रशस्त करना है जो आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा और दोनों देशों के बीच संबंधों को सुदृढ़ करेगा।

यात्रा के दौरान, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री गोयल ब्रिटेन के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री के साथ उच्च स्तरीय बैठकों में भाग लेंगे, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय व्यापार राज्य सचिव के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों और उद्योगों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। ये बैठकें व्यापार बाधाओं को दूर करने, निवेश को बढ़ावा देने और प्रौद्योगिकी, नवोन्‍मेषण और बौद्धिक संपदा अधिकारों जैसे क्षेत्रों में अधिक सहयोग को बढ़ावा देने पर ध्यान केन्द्रित करने के साथ एफटीए वार्ता की प्रमुख प्राथमिकताओं और उद्देश्यों पर चर्चा करने का अवसर प्रदान करेंगी।

इसके अतिरिक्‍त, पीयूष गोयल ईएफटीए के साथ टीईपीए की चल रही वार्ता में हुई प्रगति का आकलन करने के लिए ईएफटीए सदस्य देशों (स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन) के मंत्रियों और अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे। टीईपीए का लक्ष्य भारत और ईएफटीए सदस्य देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ाना, निवेश बढ़ाने, व्यापार बाधाओं को कम करने और अधिक बाजार पहुंच के लिए अनुकूल माहौल को बढ़ावा देना है।

वाणिज्य और उद्योग मंत्री का दौरा भारत सरकार की अपने अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने और आर्थिक वृद्धि तथा विकास के अवसरों का पता लगाने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। यह मजबूत और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार संबंध बनाने के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है जो न केवल भारत और ब्रिटेन दोनों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुंचाएगा बल्कि उनके संबंधित नागरिकों की समग्र समृद्धि और कल्याण में भी योगदान देगा।

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