केन्द्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री परषोत्तम रूपाला ने आज नई दिल्ली में मत्स्य पालन विभाग की वार्षिक क्षमता निर्माण योजना (एसीबीपी) का शुभारंभ किया। इस अवसर पर राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन, सीबीसी में सदस्य प्रशासन प्रवीण परदेशी, सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी, संयुक्त सचिव सागर मेहरा के साथ ही मत्स्य पालन विभाग, सीबीसी और गुजरात राज्य के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
परषोत्तम रूपाला ने अपने संबोधन में जोर देते हुए कहा कि हमारे अधिकारियों और कर्मचारियों की क्षमता निर्माण जरूरतों की पहचान करना और विभाग की प्राथमिकताओं को पूरा करने के लिए उनके क्षमता निर्माण के लिए कार्य योजना विकसित करना समय की मांग है। क्षमता निर्माण के लिए वार्षिक कार्य योजना का शुभारंभ करते हुए परषोत्तम रूपाला ने इस बात पर जोर दिया कि मत्स्य पालन विभाग की एसीबीपी सेवा वितरण, कार्यक्रम कार्यान्वयन और मुख्य सरकारी कार्यों को करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने बताया कि एसीबीपी अधिकारियों की प्रासंगिक दक्षता बढ़ाने और उन्हें बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम बनाने के लिए उन्हें बुनियादी प्रशिक्षण दिलाएगी।
राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने मत्स्य पालन क्षेत्र में नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने के मद्देनजर इस योजना के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. एल. मुरुगन ने बताया कि भारत में कई मत्स्य पालन संस्थान हैं, जहां मत्स्य पालन के क्षेत्र में तकनीकी नवाचार समय की मांग है और एसीबीपी भारत में मत्स्य पालन क्षेत्र के विकास में सहायक होगी।
मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने एसीबीपी के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह योजना नियम-आधारित प्रणाली को भूमिका-आधारित प्रणाली में बदलने की सुविधा प्रदान करते हुए कार्यात्मक, व्यवहारिक और डोमेन ज्ञान दक्षताओं के क्षेत्र में क्षमता निर्माण की जरूरतों को पूरा करेगी।
सीबीसी में सदस्य प्रशासन प्रवीण परदेशी ने मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों के विभिन्न स्तरों पर आवश्यक विभिन्न प्रशिक्षण मॉड्यूल की आवश्यकता पर विस्तृत विश्लेषण के साथ विभाग की वार्षिक क्षमता निर्माण योजना (एसीबीपी) पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी है।
एसीबीपी को लागू करने और उसे बनाए रखने के लिए मत्स्य पालन विभाग में क्षमता निर्माण इकाई (सीबीयू) बनाई गई है। एसीबीपी के कार्यान्वयन के लिए विभाग के वेतन मद का 2.5% बजटीय परिव्यय निर्धारित किया गया है। सीबीयू विभाग के कर्मचारियों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं को प्राथमिकता देगा। प्रशिक्षण ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में होंगे। क्षमता निर्माण आयोग ने कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने के लिए संस्थान और ज्ञान भागीदारों की पहचान कर ली है। विभाग एसीबीपी की प्रभावकारिता का पता लगाने के लिए अपने कर्मचारियों पर प्रशिक्षण के प्रभाव का आकलन करेगा।
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