केंद्रीय विधि और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने आज जयपुर में 18वीं अखिल भारतीय विधिक सेवा बैठक में घोषणा करते हुए कहा कि इस वर्ष से देश में नागरिकों के लिए टेली-लॉ सेवा नि:शुल्क की जा रही है। टेली-लॉ ने कानूनी सहायता से वंचित व्यक्तियों को कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए 1 लाख ग्राम पंचायतों में कॉमन सर्विस सेंटर्स (सीएससी) में उपलब्ध टेली/वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से इसे पैनल अधिवक्ताओं के साथ जोड़कर उन्हें कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए मुख्यधारा में लाने का कार्य किया है। आसान और सीधी पहुंच के लिए टेली-लॉ मोबाइल एप्लिकेशन (एंड्रॉइड और आईओएस दोनों) का भी 2021 में शुभारंभ किया गया और यह वर्तमान में 22 अनुसूचीबद्ध भाषाओं में उपलब्ध है। इस डिजिटल क्रांति का लाभ उठाते हुए, टेली-लॉ ने केवल पांच वर्षों में कानूनी सेवाओं की पहुंच के दायरे का 20 लाख से अधिक लाभार्थियों तक विस्तार कर दिया है।
आयोजन के दौरान विधि और न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) ने कानूनी सेवाओं के एकीकृत वितरण पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) का आदान-प्रदान किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि समझौता ज्ञापन सभी के लिए न्याय के उद्देश्य को आगे बढ़ाने और नागरिकों के बीच सबसे व्यापक स्तर के एकीकरण कारक के रूप में कानून के शासन को स्थापित करने की हमारी संयुक्त प्रतिबद्धता का प्रतीक है। समझौता ज्ञापन के प्रावधान के तहत नालसा प्रत्येक जिले में विशेष रूप से टेली-लॉ कार्यक्रम के लिए 700 अधिवक्ताओं की सेवाएं प्रदान करेगा। पैनल में शामिल ये अधिवक्ता अब रेफरल अधिवक्ताओं के रूप में भी कार्य करेंगे और मुकदमेबाजी से पहले के चरण में विवाद से बचने और विवाद समाधान के तंत्र को मजबूत करने में भी मदद करेंगे। किरेन रिजिजू ने विश्वास व्यक्त किया कि एसोसिएशन कुछ ही समय में 1 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंचने में भी सहायता प्रदान करेगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, किरेन रिजिजू ने विचाराधीन कैदियों की रिहाई के माध्यम से जेलों की भीड़भाड़ कम करने की आवश्यकता पर बल दिया। नालसा अपने एसएलएसए और डीएलएसए के माध्यम से पहले से ही इस संबंध में विचाराधीन समीक्षा समिति (यूटीआरसी) के जरिए विचाराधीन कैदियों को नि:शुल्क कानूनी सहायता/कानूनी परामर्शदाता उपलब्ध करा रहा है। पिछले वर्ष के दौरान यूटीआरसी की कुल 21,148 बैठकें आयोजित की गईं, जिसके परिणामस्वरूप 31,605 विचाराधीन कैदियों को रिहा किया गया।
मंत्री महोदय ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकारियों से विचाराधीन कैदियों को कानूनी परामर्श/सहायता प्रदान करने के अपने प्रयासों को और तेज करने की अपील की ताकि विचाराधीन समीक्षा समिति के समन्वय से अधिक से अधिक विचाराधीन कैदियों को रिहा किया जा सके। उन्होंने उच्च न्यायालयों से इस अवधि के दौरान संबंधित जिला न्यायाधीश की अध्यक्षता में यूटीआरसी की नियमित बैठकें सुनिश्चित करने की अपील की ताकि जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों की अधिकतम संख्या को 15 अगस्त, 2022 से पहले रिहा करने की सिफारिश की जा सके। उन्होंने कहा कि विचाराधीन कैदियों की रिहाई संभव हो सकती है। इस संदर्भ में देखा जा सकता है कि “आजादी का अमृत महोत्सव” के उत्सव के हिस्से के रूप में भारत सरकार ने पहले ही कैदियों को विशेष छूट देने का फैसला किया है, जिसके लिए गृह मंत्रालय द्वारा दिशा-निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
अपने संबोधन के समापन पर किरेन रिजिजू ने कहा कि न्याय तक पहुंच को भारत के संविधान के तहत निर्धारित हमारे कानूनी ढांचे के एक अभिन्न अंग के रूप में मान्यता दी गई है और इस अवधारणा को साकार करने तथा अब तक किए गए कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए विधिक सेवा प्राधिकरणों और सरकार के विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच अधिक सहयोग की आवश्यकता है।
राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने ‘ऑपरेशन चक्रव्यूह’ के तहत केरल में नशीले पदार्थों के खिलाफ… Read More
केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने कहा है कि “खेत बचाओ अभियान” सिर्फ जागरूकता… Read More
दुल्हन की आंख खुली तो सीने पर था पायलट पति का शव, शादी के कुछ… Read More
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के भुज में भारत-पाकिस्तान सीमा (IPB) से लगे… Read More
कटरीना की जिंदगी में आ गए 'गजपति कुलपति', कनेक्शन जानकर होगी हैरानी, फैमिली टाइम में… Read More
JEE Advanced 2026 Result: रिजल्ट, रैंक और कटऑफ को लेकर बड़ी अपडेट देश की सबसे… Read More
This website uses cookies.
Leave a Comment