उत्तर प्रदेश की राज्य स्तरीय योजना स्वीकृति समिति (एसएलएसएससी) ने 11 नवंबर, 2021 को ग्रामीण क्षेत्रों में नल जल कनेक्शन प्रदान करने के लिए राज्य द्वारा प्रस्तुत 1,882 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन योजनाओं से 33 जिलों के 1,262 गांवों की 39 लाख की आबादी लाभान्वित होगी। समिति की इस बैठक में 735 योजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई। इस स्वीकृति के अनुरूप राज्य के 4.03 लाख ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन प्रदान किए जाने हैं।
अब तक 2.64 करोड़ में से 34 लाख (12.9 फीसदी) ग्रामीण परिवारों के घरों में नल जल की आपूर्ति हो रही है। राज्य की योजना 2021-22 में 78 लाख घरों को नल जल कनेक्शन प्रदान करने की है।
जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत, ग्रामीण घरों में नल जल आपूर्ति से संबंधित योजनाओं पर विचार और उनके अनुमोदन के लिए राज्य स्तरीय योजना स्वीकृति समिति (एसएलएसएससी) के गठन का प्रावधान है। एसएलएसएससी जल आपूर्ति योजनाओं/परियोजनाओं पर विचार करने के लिए एक राज्य स्तरीय समिति के रूप में काम करती है। भारत सरकार के राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (एनजेजेएम) की ओर से एक व्यक्ति को इस समिति के सदस्य के रूप में मनोनीत किया जाता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हर घर में स्वच्छ नल जल उपलब्ध कराने और महिलाओं व लड़कियों को घर से अधिक दूर जाकर वहां से पानी लाने के कष्ट से राहत देने की सोच को साकार करने के लिए, जल शक्ति मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय जल जीवन मिशन ने पहले ही उत्तर प्रदेश को 2021-22 के दौरान 2,400 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता राशि जारी कर दी है। इससे पहले 2019-20 में केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन के लिए उत्तर प्रदेश को 1,206 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। इसे 2020-21 में बढ़ाकर 2,571 करोड़ रुपये कर दिया गया था।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने साल 2021-22 के लिए आवंटन में चार गुना बढ़ोतरी को मंजूरी देते हुए 2024 तक हर ग्रामीण घर में नल जल की आपूर्ति का प्रावधान करने के लिए राज्य को पूरी सहायता का आश्वासन दिया था।
उत्तर प्रदेश के 97 हजार से अधिक गांवों में 2.64 करोड़ ग्रामीण परिवार हैं। इनमें से अब तक 34 लाख (12.87 फीसदी) घरों में नल जल की आपूर्ति प्रदान की गई है। जल जीवन मिशन की शुरुआत के समय केवल 5.16 लाख (2 फीसदी) घरों में ही नल जल आपूर्ति की सुविधा थी। वहीं, पिछले 26 महीनों में कोविड- 19 महामारी और लॉकडाउन के दौरान बाधाओं का सामना करने के बावजूद राज्य ने 28.85 लाख (10.92 फीसदी) परिवारों को नल जल कनेक्शन प्रदान किया है। राज्य का लक्ष्य चालू वित्तीय वर्ष में 5 जिलों को ‘हर घर जल’ बनाने का है।
राष्ट्रीय जल जीवन मिशन ने जेजेएम के कार्यान्वयन की गति में तेजी लाने के लिए राज्य से इस साल 78 लाख ग्रामीण परिवारों को नल जल की आपूर्ति प्रदान करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है। इसके लिए राज्य की योजना दिसंबर, 2021 तक 60 हजार से अधिक गांवों में जलापूर्ति कार्य शुरू करने की है। इस वर्ष केंद्रीय आवंटन के रूप में 10,870 करोड़ रुपये और राज्य सरकार के पास उपलब्ध ओपनिंग बैलेंस (खर्च नहीं की गई रकम) के रूप मे 466 करोड़ रुपये के अलावा, राज्य का 2021-22 के मिलान हिस्से और पिछले वर्षों में मिलान हिस्से में कमी के साथ उत्तर प्रदेश के पास जेजेएम के कार्यान्वयन के लिए उपलब्ध कुल 23,500 करोड़ रुपये से अधिक की निश्चित निधि है। इस तरह भारत सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि उत्तर प्रदेश में इस परिवर्तनकारी मिशन के कार्यान्वयन के लिए निधि की कमी न हो।
इसके अलावा, 2021-22 में ग्रामीण स्थानीय निकायों/पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) को जल और स्वच्छता के लिए 15वें वित्त आयोग के सर्शत अनुदान के रूप में उत्तर प्रदेश को 4,324 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। वहीं, अगले पांच वर्षों यानी 2025-26 तक के लिए सर्शत अनुदान के रूप में 22,808 करोड़ रुपये का वित्त पोषण सुनिश्चत है। इस भारी निवेश के जरिए उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। वहीं, इससे गांवों में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
प्रधानमंत्री ने फरवरी, 2019 में बुंदेलखंड क्षेत्र के 7 जिलों के गांवों के लिए नल जल आपूर्ति योजनाओं की आधारशिला रखी थी। इनमें झांसी, महोबा, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, बांदा और चित्रकूट हैं। वहीं, उन्होंने नवंबर 2020 में विंध्याचल क्षेत्र के मिर्जापुर व सोनभद्र जिलों के लिए ग्रामीण पेयजल आपूर्ति परियोजनाओं का शिलान्यास किया था। ये जल की कमी वाले इलाके हैं। इन परियोजनाओं से क्षेत्र के 6,742 गांवों के लगभग 18.88 लाख परिवार लाभान्वित होंगे। अब तक इन परियोजनाओं में भौतिक प्रगति लगभग 50 फीसदी है।
इस मिशन के आदर्श वाक्य ‘साझेदारी करना, जीवन को बदलना’ को आगे बढ़ाने के लिए, विभिन्न प्रतिष्ठित संगठनों ने राज्य में स्थानीय समुदाय के साथ दीर्घावधि के आधार पर पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काम करना शुरू कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की एजेंसी यूएनओपीएस जमीन पर पहले ही संसाधनों को संगठित कर चुकी है और बुंदेलखंड, विंध्याचल, प्रयागराज तथा कौशांबी के लगभग 140 गांवों में सक्रियता से काम कर रही है। वहीं, आगा खान फाउंडेशन लखनऊ और सीतापुर के 40 गांवों में काम कर रहा है। इसी तरह टाटा ट्रस्ट 3 जिलों बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती के 200 गांवों में अपने संसाधनों को संगठित कर रहा है। इस प्रकार की साझेदारी से जल जीवन मिशन एक ‘जन आंदोलन’ के रूप में सामने आ रहा है।
एनजेजेएम की टीम ने प्रभावकारी सामुदायिक योगदान की जरूरत पर जोर दिया है। यह जल जीवन मिशन का एक गैर-विनिमेय पहलू है। उत्तर प्रदेश में अधिकांश योजनाएं भू-जल आधारित होने के कारण राज्य में जल उपलब्धता मूल्यांकन और स्रोत की स्थिरता की बहुत आवश्यकता है। एनजेजेएम की टीम ने जल आपूर्ति योजनाओं में सम्मिलन के जरिए धूसर जल प्रबंधन के प्रावधान को शामिल करने का सुझाव दिया है। यह जल जीवन मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
क्षेत्र परीक्षण किट (एफटीके) का उपयोग करके पेयजल स्रोतों और वितरण स्थलों के नियमित व स्वतंत्र परीक्षण के लिए हर गांव में 5 महिलाओं को प्रशिक्षण देकर जल की गुणवत्ता निगरानी संबंधी गतिविधियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। वहीं, जल परीक्षण प्रयोगशालाओं को उन्नत किया गया गया है और आम जनता के लिए इसे खोल दिया जाता है, जिससे लोग अपने जल के नमूनों का मामूली दर पर परीक्षण करवा सकें।
‘सेवा वितरण’ पर ध्यान केंद्रित करने के लिए, भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और राज्य सरकार की साझेदारी में जल जीवन मिशन की संचालित ‘ग्रैन्ड टेक्नोलॉजी चैलेंज’ के हिस्से के रूप में बागपत जिले के 10 गांवों में ‘ऑनलाइन मापन और निगरानी प्रणाली’ का उपयोग किया जा रहा है। यह ‘ऑनलाइन प्रणाली’ गांव में जल की आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में चेतावनी देगी, जिससे सही समय पर सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके।
जल जीवन मिशन के तहत राज्य के जल की गुणवत्ता प्रभावित बसावटों, आकांक्षी व जेई/एईएस प्रभावित जिलों, अनुसूचित जाति/जनजाति बहुल गांवों और एसएजीवाई गांवों को प्राथमिकता दी जाती है। ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ के अनुरूप काम करते हुए, जल जीवन मिशन का उद्देश्य सबसे कमजोर व वंचित लोगों को पीने योग्य नल जल की आपूर्ति करना है।
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