केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय मंत्री स्मृति इरानी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, सिख नव वर्ष के शुभ अवसर को मनाने के लिए, आज सिख समुदाय के लिए एक व्यापक कौशल विकास, नेतृत्व और उद्यमिता प्रोत्साहन तथा शिक्षा कार्यक्रम शुरू किया। इस कार्यक्रम को, सिख समुदाय के कल्याण के लिए स्थापित एक वैधानिक निकाय, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (डीएसजीएमसी) के माध्यम से मंत्रालय की प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन (पीएम विकास) योजना के अंतर्गत “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” की व्यापक भावना के अंतर्गत स्वीकृति प्रदान की गई है।
यह कार्यक्रम 10,000 युवाओं और महिलाओं को ध्यान में रखकर शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य रोजगार प्रदान करने वाली भूमिकाओं में आधुनिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना, पारंपरिक कला और शिल्प रूपों का अभ्यास करने वाले सिकलीगर और अन्य समूहों जैसे सिख कारीगरों को प्रोत्साहन देना, महिला नेतृत्व और उद्यमिता को बढ़ावा देना और स्कूल छोड़ने वाली छात्राओं के लिए शिक्षा को प्रोत्साहन प्रदान करना है।
मंत्रालय की यह पहल समुदाय के भीतर सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूहों को राष्ट्रीय विकास की गाथा में अपने लिए जगह बनाने में सहायता करेगी और अन्य सामाजिक रूप से वंचित समुदायों के लाभार्थियों को भी सहायता प्रदान करेगी, जिससे सांप्रदायिक और सामाजिक सद्भाव को प्रोत्साहन मिलेगा।
इस परिवर्तनकारी साझेदारी को औपचारिक रूप देने के लिए, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (डीएसजीएमसी) के अंतर्गत नामांकित/पंजीकृत समितियों/शैक्षणिक संस्थानों के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) के माध्यम से कार्यक्रम को लागू करेगा। यह समिति पहले से ही दिल्ली विश्वविद्यालय में 4 महाविद्यालयों, श्री गुरु तेग बहादुर खालसा महाविद्यालय, श्री गुरु नानक देव खालसा महाविद्यालय, माता सुंदरी महिला महाविद्यालय और श्री गुरु गोबिंद सिंह वाणिज्य महाविद्यालय, गुरु हरकिशन पब्लिक स्कूल की 12 शाखाएं और 1 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईटीआई) का संचालन कर रही है। इन संस्थानों के पास सिखों और अन्य समुदायों के कल्याण के लिए शिक्षा और कौशल विकास प्रदान करने के क्षेत्र में एक प्रमाणित ट्रैक रिकॉर्ड है। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की इस पहल का उद्देश्य इन शैक्षिक और कौशल संस्थानों की क्षमताओं का निर्माण और पोषण करके न केवल दिल्ली बल्कि पूरे भारत के सिख युवाओं पर ध्यान केंद्रित करना है, जिससे समुदाय को रोजगार और आजीविका के अवसर पैदा करने में सहायता और प्रोत्साहन मिल सके।
सरकार गुरुमुखी लिपि सहित सिख समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को संरक्षित करने और प्रोत्साहन प्रदान करने की आवश्यकता को भी पहचानती है। विद्यार्थियों के बीच सिख शिक्षा और विरासत के प्रसार के लिए एक सूचना प्रौद्योगिकी मंच के विकास के साथ-साथ भाषा का बुनियादी ज्ञान प्रदान करने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत खालसा महाविद्यालयों में अत्याधुनिक गुरुमुखी लिपि शिक्षण केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। केंद्र गुरुमुखी लिपि के संरक्षण और प्रसार के लिए भी काम करेंगे। मंत्रालय प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के अंतर्गत स्टूडियो/स्मार्ट क्लासरूम के विकास सहित आवश्यक बुनियादी ढांचे और सहायक सेवाएं प्रदान करने में सहायता करेगा।
प्रधानमंत्री विकास और प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके) योजना के अंतर्गत सिख समुदाय के लिए इन पहलों की स्वीकृति देश भर में सिख समुदाय के बीच हाशिए पर मौजूद वर्गों को सशक्त बनाने और उत्थान करने की सरकार की प्रतिबद्धता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और उनके परिवारों के लिए एक ठोस सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की परिकल्पना करती है।
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