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“अनुसूचित जाति और अन्य के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना और अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना (PMS-SC)”

पीएमएस-एससी योजना के बारे में: अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना (PMS-SC) भारत में पढ़ाई के लिए एससी छात्रों के लिए एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिनके माता-पिता/अभिभावक की आय 2.5 लाख रुपये प्रति वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। इस योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति के छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करना और सबसे गरीब परिवारों पर ध्यान केंद्रित करते हुए उच्च शिक्षा में अनुसूचित जाति के छात्रों के सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) में उल्लेखनीय वृद्धि करना है। सरकार का प्रयास है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 तक उच्च शिक्षा में अनुसूचित जाति का जीईआर 23.0 प्रतिशत से बढ़ाकर राष्ट्रीय औसत तक लाया जाए।

अनुसूचित जाति और अन्य के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के बारे में: अनुसूचित जाति और अन्य के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना है। इसका उद्देश्य अनुसूचित जाति के बच्चों और वैसे बच्चों के लिए प्री-मैट्रिक स्तर पर साक्षरता और निर्बाध शिक्षा को बढ़ावा देना है, जिनके माता-पिता/अभिभावक साफ-सफाई और जोखिम भरे काम में लगे हैं। इस योजना के दो घटक हैं, जो इस प्रकार हैं:

घटक 1: अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति

छात्रों का कक्षा नौवीं और दसवीं में पूर्णकालिक आधार पर अध्ययनरत रहना जरूरी है।

छात्रों का अनुसूचित जाति से संबंधित होना जरूरी है।

छात्रों के माता-पिता/अभिभावक की आय 2.50 लाख रुपये प्रति वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।

घटक 2: साफ-सफाई और जोखिम भरे काम में लगे माता-पिता/अभिभावकों के बच्चों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति

छात्रों को कक्षा एक से नौ  तक पूर्णकालिक आधार पर अध्ययन करना चाहिए।

छात्रवृत्ति उन माता-पिता/अभिभावकों के बच्चों को मिलेगी, जो अपनी जाति/धर्म के बावजूद निम्नलिखित श्रेणियों में से एक से संबंधित हैं;

ए. वह व्यक्ति जो मैनुअल स्कैवेंजर्स अधिनियम 2013 की धारा 2(आई) (जी) के तहत परिभाषित मैनुअल स्कैवेंजर्स हैं।

बी. चर्म शोधक/चमड़ा उतारने का काम करने वाला

सी. कूड़ा बीनने वाला और

डी. मैनुअल स्कैवेंजर्स अधिनियम 2013 की धारा 2(आई)(डी) में परिभाषित साफ-सफाई के जोखिम भरे काम में लगे व्यक्ति।

3. योजना के इस घटक के तहत कोई पारिवारिक आय सीमा नहीं है।

योजनाओं में हालिया बदलाव: ‘एससी और अन्य के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना’ और ‘पीएमएस-एससी’ को संशोधित किया गया है। इन योजनाओं के कार्यान्वयन को और मजबूत करने के लिए  निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:

अनुसूचित जाति और अन्य के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत फंडिंग पैटर्न: यह योजना केंद्र और राज्य के बीच 60:40 (पूर्वोत्तर राज्यों, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मामले में 90:10 और विधानसभा रहित केंद्र शासित प्रदेश के मामले में 100:0) के निश्चित साझा पैटर्न पर आधारित है।

पीएमएस-एससी के अंतर्गत फंडिंग पैटर्न: वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान फंडिंग पैटर्न को प्रतिबद्ध दायित्व की अवधारणा से संशोधित करके केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 के निश्चित साझाकरण पैटर्न (पूर्वोत्तर राज्यों के मामले में 90:10) कर दिया गया है।

अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने, संस्थानों द्वारा एक ही मामले में दोबारा (डुप्लीसिटी) और गलत दावों पर नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन लेनदेन के माध्यम से शुरू से अंत तक ऑनलाइन प्रोसेसिंग और पात्रता का सत्यापन किया जाता है;

केंद्रीय हिस्सा (रखरखाव भत्ता और गैर-वापसी योग्य शुल्क) केवल प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे छात्रों के बैंक खाते में जारी किया जा रहा है। यह हस्तांतरण आधार आधारित भुगतान प्रणाली के माध्यम से केवल यह सुनिश्चित करने के बाद किया जाता है कि संबंधित राज्य सरकार ने अपना हिस्सा जारी कर दिया है;

योजनाएं केंद्र और राज्य के बीच 60:40 के निश्चित साझाकरण पैटर्न पर आधारित हैं (पूर्वोत्तर राज्यों, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मामले में 90:10 और विधानसभा रहित केंद्रशासित प्रदेश के मामले में 100:0);

सबसे गरीब परिवारों के कवरेज पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

उपलब्धिया: एससी तथा अन्य और पीएमएस-एससी के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के संबंध में, वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान प्रेस विज्ञप्ति के लिए इनपुट के रूप में निम्नलिखित सामग्री प्रदान की जा सकती है:

वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान अनुसूचित जाति और अन्य के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत, केंद्रीय हिस्सेदारी के रूप में 141.01 करोड़ रुपये 6.25 लाख लाभार्थियों को उनके आधार युक्त बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से जारी किए गए हैं।

वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत, केंद्रीय हिस्सेदारी के रूप में 1516.84 करोड़ रुपये 12.70 लाख लाभार्थियों को उनके आधार युक्त बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से जारी कर दिए गए हैं।

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