जान और जहान के लिए वन धन: शाहपुर की कतकारी जनजाति की कहानी

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 ‘लॉकडाउन के दौरान भी आनलाइन बिक्री हो रही है, हम डी-मार्ट के साथ गठबंधन करने और गिलोय को दूरदराज के बाजारों में ले जाने की योजना बना रहे हैं’ एक कुशल नेता के नेतृत्व में कुछ समर्पित लड़कों के एक समूह और सरकारी संगठनों से प्राप्त सक्षमकारी सहायता से क्या-क्या हो सकता है? जाहिर है, बहुत कुछ। थाणे में शाहपुर की ‘आदिवासी एकात्मिक सामाजिक संस्था ‘ जो गिलोय और अन्य उत्पादों का विपणन करती है, ने एक बार फिर इसे साबित कर दिया है। गिलोय एक चिकित्सकीय पौधा है, जिसके लिए फार्मास्युटिकल कंपनियों से भारी मांग…

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