शंघाई सहयोग संगठन (SCO) देशों के साथ भारत के सभ्यतागत जुड़ाव पर ध्यान केन्द्रित करते हुए “साझा बौद्ध विरासत” पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 14-15 मार्च, 2023 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित किया जाएगा।
एससीओ में भारत के नेतृत्व (एक वर्ष की अवधि के लिए, 17 सितम्बर, 2022 से सितम्बर 2023 तक) के तहत अपनी तरह का यह पहला आयोजन मध्य एशियाई, पूर्वी एशियाई, दक्षिण एशियाई और अरब देशों को “साझा बौद्ध विरासत” पर चर्चा करने के लिए एक साझा मंच पर लाएगा। एससीओ देशों में चीन, रूस और मंगोलिया समेत सदस्य देश, पर्यवेक्षक देश और बातचीत के भागीदार शामिल हैं। 15 से अधिक विद्वान – प्रतिनिधि विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। इन विशेषज्ञों में दुनहुआंग रिसर्च एकेडेमी, चीन; इंस्टीट्यूट ऑफ हिस्ट्री, आर्कलॉजी एंड एथनोलॉजी, किर्गिस्तान; स्टेट म्यूजियम ऑफ द हिस्ट्री ऑफ रिलीजन, रूस; नेशनल म्यूजियम ऑफ एंटीक्वीटीज ऑफ ताजिकिस्तान; बेलारशियन स्टेट यूनीवर्सिटी एंड इंटरनेशनल थेरवाद बुद्धिस्ट मिशनरी यूनीवर्सिटी, म्यांमार के विशेषज्ञ शामिल हैं।
दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन संस्कृति मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी-संस्कृति मंत्रालय के एक अनुदेयी निकाय के रूप में) द्वारा किया जा रहा है। बौद्ध धर्म के कई भारतीय विद्वान भी इस कार्यक्रम में भाग लेंगे। प्रतिभागियों को दिल्ली के कुछ ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण करने का अवसर भी मिलेगा।
इस सम्मेलन का उद्देश्य आपसी सांस्कृतिक सम्पर्कों को फिर से स्थापित करना और एससीओ देशों के विभिन्न संग्रहालयों की प्राचीन कालीन वस्तुओं में मध्य एशिया की बौद्ध कला, कला शैलियों, पुरातात्विक स्थलों के बीच समानता का पता लगाना है।
इस दुनिया के प्राकृतिक चमत्कारों में से एक अनादि काल से विचारों का विकास और प्रसार है। सहजता से, दुर्जेय पहाड़ों, विशाल महासागरों और राष्ट्रीय सीमाओं को पार करना; दूर देशों में घर ढूंढ लेना; वर्तमान संस्कृति के साथ समृद्ध होना, यही बुद्ध के आकर्षण की विशिष्टता है।
इसकी सार्वभौमिकता ने समय और स्थान दोनों को पार कर लिया। इसके मानवतावादी दृष्टिकोण ने कला, वास्तुकला, मूर्तिकला और मानव व्यक्तित्व के सूक्ष्म गुणों में प्रवेश किया; करुणा, सह-अस्तित्व, स्थायी जीवन और व्यक्तिगत विकास में अभिव्यक्ति की खोज की।
यह सम्मेलन विचारों का एक अनोखा मिलन है, जहां बौद्ध मिशनरियों द्वारा मजबूत किए गए, शिष्ट समाज की साझा विरासत के आधार पर उन्हें जोड़ने वाले एक सामान्य सूत्र के साथ, विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के देशों ने, भारतीय उपमहाद्वीप और एशिया में विभिन्न संस्कृतियों, समुदायों और क्षेत्रों को समग्र रूप से एकीकृत करने में एक प्रमुख भूमिका निभाई है, दो दिन विभिन्न विषयों पर चर्चा करेंगे, भविष्य में सदियों पुराने बंधनों को जारी रखने के तरीकों की रूपरेखा तैयार करेंगे।
वैभव सूर्यवंशी को टीम इंडिया में मौका कब?' दिग्गज क्रिकेटर ने BCCI पर उठाए सवाल… Read More
YouTube यूजर्स के लिए बड़ा अपडेट! नए फीचर्स और पॉलिसी बदलावों से बदल सकता है… Read More
राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने ‘ऑपरेशन चक्रव्यूह’ के तहत केरल में नशीले पदार्थों के खिलाफ… Read More
केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने कहा है कि “खेत बचाओ अभियान” सिर्फ जागरूकता… Read More
दुल्हन की आंख खुली तो सीने पर था पायलट पति का शव, शादी के कुछ… Read More
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के भुज में भारत-पाकिस्तान सीमा (IPB) से लगे… Read More
This website uses cookies.
Leave a Comment