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REC की सहायक कंपनी RECPDCL ने राजस्थान से नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी के लिए एसपीवी को पावरग्रिड को सौंप दिया

आरईसी पावर डेवलपमेंट एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड (आरईसीपीडीसीएल), आरईसी लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी, ने ‘रामगढ़ II ट्रांसमिशन लिमिटेड’ ट्रांसमिशन परियोजना के निर्माण के लिए गठित परियोजना-विशिष्ट एसपीवी (विशेष प्रयोजन वाहन) को पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीजीसीआईएल) को सौंप दिया है।

एसपीवी के कार्य में राजस्थान राज्य में 765 केवी डी/सी लाइन (रामगढ़ पीएस से भादला-3 पीएस) के साथ-साथ रामगढ़ में 765/400 केवी और 2×500 एमवीए 400/220 केवी पूलिंग स्टेशन शुरू करने का काम शामिल है। इस परियोजना को 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है। यह राजस्थान में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों (आरईजेड) से नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी में मदद करेगा। यह परियोजना 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन (नवीकरणीय ऊर्जा + परमाणु) स्रोतों से 500 गीगावॉट स्थापित बिजली क्षमता प्राप्त करने के सरकार के लक्ष्य की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

आरईसी विद्युत वितरण कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश कुमार ने 26 अक्टूबर 2023 को विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) को पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक पंकज पांडे को सौंप दिया है। इस अवसर पर कार्यकारी निदेशक, सेंट्रल ट्रांसमिशन यूटिलिटी ऑफ इंडिया के मुख्य महाप्रबंधक जसबीर सिंह; आरईसी विद्युत वितरण कंपनी के पी.एस. हरिहरन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी सीटीयूआईएल और पीजीसीआईएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

ट्रांसमिशन सेवा प्रदाता के रूप में मेसर्स पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड का चयन विद्युत मंत्रालय द्वारा अधिसूचित मानक बोली दस्तावेजों और दिशानिर्देशों के अनुरूप, आरईसीपीडीसीएल द्वारा आयोजित टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (टीबीसीबी) के माध्यम से किया गया था।

उपरोक्त एसपीवी को सौंपने के साथ, आरईसीपीडीसीएल ने अब तक लगभग 75,000 करोड़.रुपए की लागत वाली 54 ट्रांसमिशन परियोजनाएं सफलतापूर्वक सौंपी हैं।

विद्युत मंत्रालय के अधीन आरईसी लिमिटेड, एक महारत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम है, जो पूरे भारत में विद्युत क्षेत्र के वित्तपोषण और विकास पर ध्यान केंद्रित करता है। 1969 में स्थापित, आरईसी लिमिटेड विद्युत मूलभूत क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक ऋण और अन्य वित्त योजनाएं प्रदान करता है, जिसमें उत्पादन, ट्रांसमिशन, वितरण, नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी स्टोरेज और ग्रीन हाइड्रोजन जैसी नई प्रौद्योगिकियां शामिल हैं। आरईसी ने सड़क, मेट्रो, हवाई अड्डे, सूचना प्रौद्योगिकी और बंदरगाहों सहित मुख्य बुनियादी ढांचा क्षेत्र में भी विविधता ला दी है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के अंत में आरईसी की लोन बुक में 4.54 लाख करोड़ रुपये दर्ज है।

विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पावरग्रिड), एक अनुसूची ‘ए’ ‘महारत्न’ सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम है, इसे अक्टूबर 1989 में इस श्रेणी में शामिल किया गया था। पावरग्रिड भारत की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक पावर ट्रांसमिशन यूटिलिटी और एक सूचीबद्ध कंपनी है, इसकी भारत सरकार में सबसे बड़ी हिस्सेदारी है और शेष राशि संस्थागत निवेशकों और जनता के पास है।

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