आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) सचिव मनोज जोशी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंजूरी और निगरानी समिति (सीएसएमसी) की 60वीं बैठक में, छह राज्यों में परियोजना प्रस्तावों को प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत 2.42 लाख घरों की कुल बढ़ोतरी के साथ निर्माण को स्वीकृति दी गई है। इन आवासों को (पीएमएवाई-यू) के तहत लाभार्थी नेतृत्व निर्माण (बीएलसी), साझेदारी में किफायती आवास (एएचपी) और झुग्गी पुनर्वास (आईएसएसआर) निर्माण करने का प्रस्ताव है। जिन राज्यों में परियोजना प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है उनमें आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, त्रिपुरा, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।
बैठक में आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय सचिव ने इन राज्यों में घरों के निर्माण कार्यों से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने घरों के निर्माण और वितरण गति की भी समीक्षा की। बैठक में मिशन के संबंध में परियोजनाओं के संशोधन और भाग लेने वाले राज्यों के प्रदर्शन की भी समीक्षा की गई।
पीएमएवाई-यू के तहत आवास का निर्माण विभिन्न चरणों में है। मिशन के तहत स्वीकृत आवस की कुल संख्या अब 117.9 लाख है; जिनमें से लगभग 95.2 लाख घर निर्माणाधीन हैं और लगभग 56.3 लाख का निर्माण पूरा करते हुए लाभार्थियों को वितरित कर दिया गया है। मिशन के तहत कुल निवेश 7.70 लाख करोड़ रुपए है, जिसमें केंद्रीय सहायता 1.96 लाख करोड़ रुपए है। अब तक, 1.18 लाख करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता पहले ही जारी की जा चुकी है।
पीएमएवाई-यू के तहत ‘सभी के लिए आवास’ के विजन के साथ आवास निर्माण, पूरा करने और घरों के वितरण में तेजी लाने के लिए नए सिरे से जोर दिया गया है।
सीएसएमसी की बैठक में, एमओएचयूए सचिव ने आंध्र प्रदेश में अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स (एआरएचसी) के मॉडल 2 के तहत प्रस्तावों को भी मंजूरी दी। शहरी प्रवासियों/गरीबों के लिए कुल 1,388 नई एआरएचसी इकाइयों (सिंगल बेडरूम और डॉरमेट्री सहित) को मंजूरी दी गई है, जिसमें 3.24 करोड़ रुपए का प्रौद्योगिकी अभिनव अनुदान (टीआईजी) भी शामिल है।
पीएमएवाई-यू के तहत एआरएचसी एक उप योजना है जिसके तहत शहरी प्रवासियों/गरीबों को उनके कार्यस्थल के करीब शहरी क्षेत्रों में सम्मानजनक किफायती किराये पर आवास प्रदान करती है। इसे दो मॉडल के माध्यम से लागू किया जा रहा है। मॉडल 1 के तहत, मौजूदा सरकारी वित्त पोषित खाली घरों को सार्वजनिक निजी भागीदारी या सार्वजनिक एजेंसियों के माध्यम से एआरएचसी में परिवर्तित किया जाता है; मॉडल 2 के तहत एआरएचसी का निर्माण, संचालन और रखरखाव सार्वजनिक/निजी संस्थाओं द्वारा अपनी खाली जमीन पर किया जा रहा है।
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