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NTPC को 30 प्रतिशत से अधिक नेटवर्थ को NTPC ग्रीन एनर्जी में निवेश करने की मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एनजीईएल), जो कि एनटीपीसी लिमिटेड की एक सहायक कंपनी है, में निवेश करने के लिए महारत्न सीपीएसई को अधिकार सौंपने के वर्तमान दिशा-निर्देशों से एनटीपीसी लिमिटेड को छूट प्रदान की है। सीसीईए ने इसके साथ ही एनटीपीसी लिमिटेड द्वारा 60 जीडब्ल्यू की नवीकरणीय ऊर्जा (आरई) क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एनटीपीसी रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड (एनआरईएल) और इसके अन्य संयुक्त उपक्रमों (जेवी)/सहायक कंपनियों में एनजीईएल के निवेश को भी छूट दे दी है जो कि 5,000 करोड़ रुपये से लेकर 7,500 करोड़ रुपये तक की मौद्रिक सीमा से परे उसकी नेटवर्थ के अधिकतम 15% के बराबर होना चाहिए।

‘सीओपी 26’ में अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप भारत अपने विकास लक्ष्यों को पूरा करते हुए अपेक्षाकृत कम कार्बन उत्सर्जन सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहा है। देश का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 500 जीडब्ल्यू की गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने का है। एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम और देश का अग्रणी विद्युत निकाय होने के नाते एनटीपीसी ने आरई क्षेत्र में इस निवेश के माध्यम से वर्ष 2032 तक 60 जीडब्ल्यू की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को जोड़ने का लक्ष्य रखा है जो देश को उपर्युक्त लक्ष्य को प्राप्त करने और वर्ष 2070 तक ‘नेट जीरो’ उत्सर्जन सुनिश्चित करने के बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ने में काफी मदद करेगा। यह बढ़ा हुआ लक्ष्य हाल ही में सीओपी 26 शिखर सम्मेलन में घोषित सरकार के ‘पंचामृत’ के अनुरूप है, जो कि ‘नेट जीरो’ की दिशा में जलवायु कार्रवाई में भारत के अहम योगदान के रूप में है।

एनजीईएल का लक्ष्य एनटीपीसी की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा का ध्वजवाहक बनना है और वर्तमान में इसके पास 2,861 मेगावाट की 15 आरई परिसंपत्तियां हैं, जो कि चालू हैं/वाणिज्यिक परिचालन तिथि (सीओडी) के करीब हैं और अपनी सहायक कंपनी एनआरईएल (एनटीपीसी रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड) के माध्यम से हरित ऊर्जा व्यवसाय में प्रतिस्पर्धी बोली और कई उभरते अवसरों में भाग लेकर अपने आरई पोर्टफोलियो का विस्तार करने के लिए पूरी तर‍ह से तैयार है। एनटीपीसी को दी गई छूट से हरित अर्थव्यवस्था के रूप में भारत की वैश्विक छवि को बेहतर करने में काफी मदद मिलेगी। यह भारत के ऊर्जा उत्पादन में विविधता लाकर ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों पर भारत की निर्भरता को भी कम करेगी और देश के कोयला आयात बिलों में भी कमी करेगी। इसके अलावा, इससे देश के प्रत्येक कोने में 24*7 बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में भी काफी मदद मिलेगी।

यह नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना इसके साथ ही निर्माण चरण के साथ-साथ ओ एंड एम चरण के दौरान भी स्थानीय लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित करेगी।

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