भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एनएचएआई अनुबंधों के लिए बीमा प्रतिभूति बांड को अपनाने में तेजी लाने के लिए हितधारकों के साथ चर्चा करने के लिए विचार-विमर्श सत्र का आयोजन किया। राजेंद्र कुमार, सदस्य (वित्त), एनएचएआई, नीलेश साठे, विशेषज्ञ/सलाहकार, एनएचएआई और मंदाकिनी बलूधी, निदेशक (बीमा), डीएफएस के नेतृत्व में सत्र में विभिन्न बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों, संविदाकारों, उद्योग जगत के विशेषज्ञों और एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। हितधारकों के साथ विचार-मंथन के इस सत्र में बैंक प्रतिभूति (बीजी) के स्थान पर प्रतिभूति बांड को व्यापक रूप से अपनाने की संभावनाओं का पता लगाने और परिचालन संबंधी बाधाओं को दूर करने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
एनएचएआई ने बीमा कंपनियों और संविदाकारों से बोली प्रतिभूति और/निष्पादन प्रतिभूति जमा करने के एक अतिरिक्त माध्यम के रूप में बीमा प्रतिभूति बांड के उपयोग का विश्लेषण करने का आग्रह किया है। जारी होने पर बीमा प्रतिभूति बांड किफायती होंगे और एनएचएआई परियोजनाओं के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करेंगे।
बीमा प्रतिभूति बांड ऐसे उपकरण हैं जहां बीमा कंपनियां ‘ प्रतिभूति’ के रूप में कार्य करती हैं और इस बात की वित्तीय गारंटी प्रदान करती हैं कि संविदाकार सहमत शर्तों के अनुसार अपने दायित्व को पूरा करेगा। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने सभी सरकारी खरीदों के लिए ई-बीजी और बीमा प्रतिभूति बांड को बीजी के बराबर बना दिया है। भारत की भागीदारी के बिना वैश्विक प्रतिभूति बीमा बाज़ार का आकार लगभग 29.5 बिलियन डॉलर है।
भारत के दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा निर्माण बाजार बनने की संभावना है। अकेले भारतीय अवसंरचना क्षेत्र को वर्ष 2023 में अनुमानित 2.70 लाख करोड़ रुपये की बैंक प्रतिभूति की आवश्यकता होगी, जिसके साल दर साल आधार पर 6 से 8 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है। प्रतिभूति बांड, बैंक प्रतिभूति के लिए एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में कार्य करते हैं और पारंपरिक बैंकिंग उत्पादों की तुलना में लंबी परिपक्वता अवधि प्रदान करते हैं। प्रतिभूति बांड, अनुबंध प्रतिभूति विकल्पों को वित्तपोषित करने के सबसे किफायती तरीकों में से एक है और अवसंरचना क्षेत्र के लिए 50,000 करोड़ रुपये की अनुमानित पूंजीगत राहत प्रदान कर सकता है।
भारत की 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की आकांक्षा के मद्देनजर बीमा प्रतिभूति बांड जैसे उपकरण बोलीकर्ताओं और रियायतग्राहियों की नकदी और क्षमता की उपलब्धता को बढ़ावा देंगे। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना विकास को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी, जिसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
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