सुशासन के लिए राष्ट्रीय केंद्र (एनसीजीजी) ने बांग्लादेश के लोक सेवकों के 58वें बैच के लिए अपना प्रमुख क्षमता निर्माण कार्यक्रम (सीपीबी) पूरा किया। इस कार्यक्रम में 45 अधिकारियों ने हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार को लेकर प्रभावी लोक नीतियों व कार्यक्रमों को तैयार करने और उन्हें कार्यान्वित करने के लिए अधिकारियों को सार्वजनिक नीतियों, कार्यक्रमों, शासन, तकनीक के उपयोग तथा नवीन कौशल के क्षेत्र में नया ज्ञान प्रदान करने पर केंद्रित था।
एनसीजीजी के महानिदेशक भरत लाल ने अपने समापन भाषण में अधिकारियों से लोगों की जरूरतों को लेकर जवाबदेह होने का अनुरोध किया और समयबद्ध तरीके से सार्वजनिक शिकायतों के निवारण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने दोनों देशों के बीच विकासात्मक साझेदारी की सराहना की। महानिदेशक ने कहा कि यह कार्यक्रम प्रतिभागियों को अन्य बातों के अलावा नए विकास प्रतिमान और पहल के लिए सशक्त बनाने का एक प्रयास है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ के मंत्र को रेखांकित किया। भरत लाल ने लोक सेवकों से नागरिकों व सरकार के बीच की दूरी को कम करने और पुरानी औपनिवेशिक मानसिकता को समाप्त करने का अनुरोध किया। इसके अलावा उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आधुनिक तकनीक पारदर्शिता और जवाबदेही लाने में काफी सहायक है। महानिदेशक ने जनता को बेहतर सेवा प्रदान करने के लिए सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के इन आधुनिक साधनों को सीखने और अपनाने पर जोर दिया। इसके लिए उन्होंने आधार, और जल जीवन मिशन का उदाहरण दिया और बताया कि कैसे लाखों किसानों को सिर्फ एक क्लिक में सब्सिडी हस्तांतरित की जा रही है क्योंकि प्रौद्योगिकी नागरिकों को सेवाओं के वितरण की सुविधा प्रदान कर रही है। प्रौद्योगिकी सार्वजनिक सेवा वितरण में शानदार दक्षता लाई है और हमें इसका अधिक उपयोग करना चाहिए।
इसके अलावा भरत लाल ने लोगों के व्यापक कल्याण के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण व रखरखाव के महत्व पर जोर दिया। साथ ही, इस बारे में प्रतिक्रिया की एक टिकाऊ प्रणाली के महत्व पर ध्यान देने के लिए कहा। उन्होंने अधिकारियों से लोगों और विभिन्न अन्य हितधारकों जैसे कि समुदाय-आधारित संगठन, स्वयं सहायता समूह व अन्य नागरिक समाज संगठन के साथ मिलकर काम करने का अनुरोध किया, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि नीतियों व कार्यक्रमों को एक भागीदारीपूर्ण तरीके से विकसित किया गया है और पर्यावरण, जलवायु और आपदा को लेकर इसमें लचीलता भी है।
उन्होंने प्रतिभागियों को सलाह दी कि वे दो सप्ताह के इस क्षमता निर्माण कार्यक्रम से प्राप्त सीख को नए विचारों व सर्वश्रेष्ठ अभ्यासों के रूप में आगे बढ़ाएं और उन्हें समाज की व्यापक कल्याण के लिए एक सांचे के रूप में उपयोग करें। वहीं, बांग्लादेश के अधिकारियों ने इस कार्यक्रम के डिजाइन और संबंधित क्षेत्र के उच्च योग्यता वाले विशेषज्ञों व संसाधन व्यक्ति के रूप में प्रतिष्ठित हस्तियों के साथ चर्चा करने व सुनने के अवसर की सराहना की। अब तक विदेश मंत्रालय और ढाका स्थित भारतीय मिशन के सहयोग से एनसीजीजी ने बांग्लादेश के 2,055 लोक सेवकों को प्रशिक्षित किया है।
साल 2014 में सुशासन के लिए राष्ट्रीय केंद्र की स्थापना भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के अधीन शीर्ष स्तर की एक संस्था के रूप में की गई थी। एनसीजीजी को देश के साथ-साथ अन्य विकासशील देशों के लोक सेवकों की सार्वजनिक नीति, शासन, सुधार, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में कार्य करना अनिवार्य है। साथ ही, यह सरकार के थिंक टैंक के रूप में भी कार्य करता है।
एनसीजीजी ने विदेश मंत्रालय (एमईए) के साथ साझेदारी में विकासशील देशों के लोक सेवकों की क्षमता का निर्माण करने की जिम्मेदारी ली है। अब तक इसने 15 देशों यानी बांग्लादेश, केन्या, तंजानिया, ट्यूनीशिया, सेशेल्स, गाम्बिया, मालदीव, श्रीलंका, अफगानिस्तान, लाओस, वियतनाम, भूटान, म्यांमार, नेपाल और कंबोडिया के लोक सेवकों को प्रशिक्षण प्रदान किया है। विभिन्न देशों के प्रतिभागी अधिकारियों ने इन प्रशिक्षणों को काफी अधिक उपयोगी पाया है। इसके अलावा एनसीजीजी देश के विभिन्न राज्यों के लोक सेवकों की क्षमता निर्माण में भी शामिल रहा है। इन कार्यक्रमों की काफी अधिक मांग है और इसे देखते हुए विदेश मंत्रालय की इच्छा के अनुरूप एनसीजीजी अधिक देशों से बड़ी संख्या में लोक सेवकों को समायोजित करने के लिए अपनी क्षमता का विस्तार कर रहा है। साल 2023-24 के लिए एनसीजीजी ने इन काफी अधिक मांग वाले कार्यक्रमों की संख्या में तीन गुना बढ़ोतरी की है।
इस कार्यक्रम में एनसीजीजी ने देश में की गई विभिन्न पहलों को साझा किया है। इनमें शासन के बदलते प्रतिमान, गंगा के विशेष संदर्भ सहित नदियों का कायाकल्प, डिजिटल प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना, भारत के बदलते ग्रामीण परिदृश्य – प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, अवसंरचना विकास में सार्वजनिक- निजी भागीदारी, भूमि प्रशासन, नीति निर्माण की संवैधानिक नींव, विकेंद्रीकरण, सार्वजनिक अनुबंध व नीतियां, फिनटेक व समावेशन, सार्वजनिक नीति व कार्यान्वयन, चुनाव प्रबंधन, सुशासन के एक उपकरण के रूप में आधार, डिजिटल शासन- पासपोर्ट सेवा व मदद की केस स्टडी, ई-शासन व डिजिटल इंडिया उमंग, तटीय क्षेत्र के विशेष संदर्भ में आपदा प्रबंधन, प्रशासन में नैतिकता, राष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य का अवलोकन, भारत में ग्रामीण विद्युतीकरण पहल, परियोजना नियोजन, जल जीवन मिशन- कार्यान्वयन व निगरानी, स्वामित्व योजना: ग्रामीण भारत के लिए संपत्ति सत्यापन, सतर्कता प्रशासन, भ्रष्टाचार विरोधी रणनीतियां, निवेश संवर्धन व उद्यमिता, स्वच्छता को लेकर भारतीय अनुभव, चक्रीय अर्थव्यवस्था, 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए दृष्टिकोण और स्वास्थ्य सेवा के लिए डिजिटल शासन आदि शामिल हैं।
इस कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री संग्रहालय, संसद आदि का भी भ्रमण किया। 58वें पाठ्यक्रम का संचालन पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. ए.पी. सिंह ने सहयोगी पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. संजीव शर्मा की सहायता से किया। साथ ही, इसमें एनसीजीजी की क्षमता निर्माण टीम ने भी सहायता प्रदान की।
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