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DPIIT ने पीने के पानी की बोतलों और लौ-पैदा करने वाले लाइटर के लिये गुणवत्ता नियंत्रण आदेश अधिसूचित किये

वणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) ने 5 जुलाई 2023 को दो नये गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओएस) अधिसूचित किये हैं। ’पीने के पानी की बोतलों’ और ‘लौ – पैदा करने वाले लाइटर’ पर अधिसूचित किये गये ये क्यूसीओएस अधिसूचना के छह माह के भीतर प्रभाव में आ जायेंगे। इन क्यूसीआईएस का उद्देश्य भारत में गुणवत्ता के समूचे परिवेश को मजबूत बनाना और जन स्वास्थ्य और उपभोक्ता सुरक्षा बढ़ाना है।

‘पीने के पानी की बोतल’ के लिये जारी क्यूसीओ में तांबा, स्टेनलेस स्टील अथवा एल्यूमीनियम से बनी बोतलों के आयात और उत्पादन के लिये उचित आईएस मानक के तहत अनिवार्य प्रमाणन की व्यवस्था दी गई है।

‘लौ पैदा करने वाले लाइटर’ के लिये जारी क्यूसीओ में घरेलू बाजार के लिये विनिर्मित लाइटर और भारत में आयात होने वाले ‘लाइटर के सुरक्षा निर्देशं’ और ‘यूटिलिटी लाइटर के सुरक्षा निर्देशों’ के लिये आईएस मानकों के तहत अनिवार्य प्रमाणन का आदेश दिया गया है। लाइटर एक छोटा उपकरण है जो कि आग की लौ पैदा करता है और इसका उपयोग कई तरह की वस्तुओं जैसे कि सिगरेट, गैस लाइटर, पटाखे, मोमबत्ती और अलाव आदि जलाने में किया जाता है। इसमें धातु अथवा प्लास्टिक का छोटा कंटेनर होता है जिसमें ज्वलनशील पदार्थ अथवा कंप्रेस्ड गैस भरी होती है, लौ पैदा करने का साधन और लौ बंद करने का उपाय भी इसमें होता है। दो तरह के लाइटर होते हैं – एक लौ जलाने वाले और दूसरे चिंगारी पैदा करने वाले।

घरेलू सूक्ष्म और लघु उद्योगों को समर्थन देते हुये क्यूसीओ अमल के मामले में समयसीमा में रियायत दी गई है। इसके पीछे मकसद क्रियान्वयन में सरलता के साथ ही कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने वाला परिवेश सुनिश्चित करते हुये उनके हितों की रक्षा करना है।

डीपीआईआईटी सचिव राजेश कुमार सिंह ने विश्वस्तरीय उत्पाद तैयार करने के लिये भारत में बेहतर गुणवत्ता परिवेश बनाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह न केवल देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान करेगा बल्कि अच्छे गुणवत्ता उत्पादों के मामले में भारत को दुनिया के नक्शे में स्थापित करेगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में राष्ट्र को संबोधित करते हुये देश में उच्च गुणवत्ता उत्पाद बनाने के महत्व को रेखांकित किया और पूरी दुनिया में पैठ बनाने वाले उत्पाद तैयार करने की भारत की क्षमता पर विश्वास भी व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण की दिशा में आगे बढ़ते हुये डीपीआईआईटी ने भारत में एक व्यापक गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था स्थापित करने के लिये ठोस कदम उठाये हैं। डीपीआईआईटी द्वारा उठाये गये एक अहम उपाय में देश में घटिया उत्पादों के आयात पर अंकुश लगाने, अनुचित व्यापार व्यवहारों को रोकने और उपभोक्ताओं की बेहतरी और सुरक्षा के साथ साथ पर्यावरण सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अनिवार्य क्यूसीओ विकसित किये हैं। क्यूसीओ क्रियान्वयन के पीछे उद्देश्य विनिर्माण गुणवत्ता मानकों में सुधार और ‘मेक इन इंडिया’ उत्पादों के ब्रांड मूल्य को बढ़ाना है। डीपीआईआईटी गुणवत्ता परीक्षण शालाओं, प्राडक्ट मैन्युअल और अन्य जरूरी घटकों को जोरशोर से विकसित करने में लगा है ताकि भारत में एक सक्रिय गुणवत्ता तंत्र को बढ़ावा दिया जा सके।

डीपीआईआईटी ने भारत मानक ब्यूरो (बीआईएस) के साथ मिलकर 317 उत्पाद गुणवत्ता को शामिल करते हुये 64 नये क्यूसीओएस विकसित करने की शुरूआत की है। प्रत्येक क्यूसीओ के लिये जरूरी और महत्वपूर्ण जानकारी जुटाने के लिये प्रमुख उद्योग संघों और हितधारकों के साथ विस्तृत विचार विमर्श किया गया, जिसके बाद क्यूसीओ मसौदा माननीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री के पास मंजूरी के लिये भेज दिया गया और विधायी कार्य विभाग भी इसकी जांच परख करेगा। एक बार यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो इन क्यूसीओएस को 60 दिन की अवधि के लिये विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जायेगा, जिसमें सदस्य देशों से टिप्पणियां आमंत्रित की जायेंगी।

क्यूसीओएस की अधिसूचना के साथ ही बीआईएस अधिनियम 2016 के तहत गैर-बीआईएस प्रमाणित उत्पादों का विनिर्माण, भंडारण और बिक्री प्रतिबंधित है। बीआईएस कानून के प्रावधानों का पहली बार उल्लंघन करने पर दो साल तक की सजा अथवा कम से कम दो लाख रूपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। दूसरी बार और उसके बाद के उल्लंघनों पर जुर्माना राशि बढ़ाकर कम से कम पांच लाख रूपये हो जायेगी जिसे सामान अथवा वस्तु मूल्य के दस गुणा तक बढ़ाया जा सकता है।

इन पहलों से देश के भीतर ही विशिष्ट गुणवत्ता के विश्वस्तरीय उत्पादों को तैयार करने के भारत सरकार के दृढ़ संकल्प का पता चलता है जो कि प्रधानमंत्री के ‘‘आत्मनिर्भर भारत’’ बनाने के दृष्टिकोण के साथ जुड़ा हैं।

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