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20,000 से अधिक जनजातीय छात्रों को लाभ पहुंचाने के लिए आयुर्वेदिक हस्तक्षेप के माध्यम से स्वास्थ्य जांच और प्रबंधन की एक राष्ट्रीय स्तर की परियोजना 21 फरवरी को शुरू की जाएगी

केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री व कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा कल नई दिल्ली में 20,000 से अधिक जनजातीय छात्रों को लाभ पहुंचाने के लिए आयुर्वेदिक हस्तक्षेपों के माध्यम से स्वास्थ्य जांच और प्रबंधन की एक राष्ट्रीय स्तर की परियोजना की शुरुआत करेंगे। आयुष मंत्रालय ने अपनी अनुसंधान परिषद सीसीआरएएस के माध्यम से जनजातीय कार्य मंत्रालय और आईसीएमआर-एनआईआरटीएच जबलपुर की सहभागिता में जनजातीय छात्रों के लिए यह स्वास्थ्य संबंधी पहल की है।

इस परियोजना का लक्ष्य 6वीं से 12वीं कक्षा में नामांकित छात्रों की सामान्य स्वास्थ्य स्थिति की जांच करना है। यह स्वास्थ्य संबंधित जांच देश के 14 राज्यों के चयनित 55 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) में की जाएगी। इसके तहत विशेष ध्यान एनीमिया, हीमोग्लोबिनोपैथी, कुपोषण और तपेदिक पर है। आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार छात्रों के बीच स्वस्थ जीवन शैली अभ्यासों को विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा रोगों के प्रबंधन के लिए एकीकृत दृष्टिकोण बनाया जाएगा।

इसके लिए भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय की सहभागिता में आयुष मंत्रालय के अधीन केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद् (सीसीआरएएस) और आईसीएमआर-राष्ट्रीय जनजातीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान- जबलपुर की 16 इकाइयों की ओर से हस्तक्षेप किया जाएगा।

जनजातीय विकास के लिए सहभागिता, सम्मिलन और समन्वय के क्षेत्रों का पता लगाने के लिए अक्टूबर, 2022 में आयुष मंत्रालय और जनजातीय कार्य मंत्रालय के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके अनुरूप सीसीआरएएस ने 20 राज्यों के ईएमआरएस में 72 पोषण वाटिकाएं विकसित कीं। वहीं, सीसीआरएएस संस्थानों ने झारखंड के सरायकेला में जनजाति महोत्सव के दौरान मेगा स्वास्थ्य शिविरों में भी हिस्सा लिया। आजादी के सात दशक से अधिक समय के बाद भी भारत में जनजातीय समुदाय में स्वास्थ्य चिंता का विषय बना हुआ है। इस संबंध में विभिन्न सराहनीय प्रयासों के बावजूद ऐसी कई बाधाएं हैं, जो इस वंचित समुदाय तक स्वास्थ्य सेवाओं की सफल पहुंच में बाधा बनती हैं। साल 2011 की जनगणना के अनुसार देश की जनजातीय जनसंख्या 10.43 करोड़ है, जो कुल जनसंख्या का 8.6 फीसदी है। इनमें से 89.97 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों में और 10.03 फीसदी शहरी क्षेत्रों में रहते हैं।

एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) सुदूर क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति (एसटी) के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करते हैं, जिससे वे उच्च व व्यावसायिक शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में अवसरों का लाभ उठा सकें और विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार प्राप्त कर सकें। यह विद्यालय न केवल शैक्षणिक शिक्षा पर बल्कि, अच्छे स्वास्थ्य सहित छात्रों के समग्र विकास पर भी अपना ध्यान केंद्रित करते हैं। वर्तमान में खेल और कौशल विकास में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए विशेष अत्याधुनिक सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित करने को लेकर पूरे देश में 401 विद्यालय संचालित हैं।

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