“भारत, मिशन मोड, बहु-सहभागी, बहु-क्षेत्र वाले अभियान के माध्यम से वैश्विक लक्ष्य से तीन साल पहले वर्ष 2027 तक लिम्फैटिक फाइलेरिया को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।” यह बात केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, की उपस्थिति में पूरे देश में दवा देने (मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन, एमडीए) की वार्षिक पहल के दूसरे चरण का उद्घाटन करने के दौरान कही।
केंद्रीय मंत्री ने जोर देते हुए कहा, “जनभागीदारी और ‘संपूर्ण सरकार’ तथा ‘संपूर्ण समाज’ दृष्टिकोण के माध्यम से, हम देश से इस बीमारी को खत्म करने में सक्षम होंगे”। 10 अगस्त, 2023 से शुरू होने वाला दूसरा चरण, 9 चिन्हित राज्यों (असम, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश) के 81 जिलों को कवर करेगा।
छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री टी.एस. सिंह देव, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रिजेश पाठक, ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री निरंजन पुजारी, असम के स्वास्थ्य मंत्री केशव महंत और झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता वर्चुअल रूप से इस उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल हुए।
सभा को संबोधित करते हुए, डॉ. मांडविया ने इस बात पर जोर दिया कि “प्रयास केवल दवाएँ लेने तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि मच्छरों के माध्यम से फैलने वाली बीमारियों को खत्म करने की भी कोशिश की जानी चाहिए। इसके बिना लक्ष्य को प्राप्त करने की हमारी प्रगति काफी हद तक बाधित होगी।”
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने सभी के लिए एक स्वस्थ राष्ट्र सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य और केंद्र सरकारों के बीच तालमेल बढ़ाने पर भी जोर दिया। मंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र में जन अभियानों की सफलता के बारे में बात की। इस संबंध में उन्होंने नि-क्षय मित्र का उदाहरण दिया। डॉ. मांडविया ने इस बात पर प्रकाश डाला कि “जमीनी स्तर से शुरू होने वाले सभी हितधारकों की भागीदारी से सामुदायिक संवाद इस मिशन में सफलता हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।” जन अभियानों की व्यापक पहुंच को रेखांकित करते हुए, स्वास्थ्य मंत्री ने आगे कहा, “जागरूकता फैलाने की पहल तथा गांवों, पंचायतों में संचार कार्यक्रम अभियान को प्रेरित करेंगे, जिससे देश भर में व्यापक पहुंच प्राप्त होगी।” प्रयासों को और मजबूती देने के लिए, डॉ. मांडविया ने इस बात का समर्थन किया कि इस बीमारी को खत्म करने के उपाय के रूप में स्वास्थ्य कर्मियों या पेशेवरों के सामने दवा की खुराक देने पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए।
इस अवसर पर डॉ. मांडविया द्वारा डेंगू बुखार 2023 और चिकनगुनिया बुखार के नैदानिक प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश जारी किए गए।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत ने कहा, “फाइलेरिया के खिलाफ दवा देने के अभियान (मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) की शुरुआत हमारे देश के स्वास्थ्य एजेंडे का एक महत्वपूर्ण क्षण है। लिम्फैटिक फाइलेरिया को खत्म करने के हमारे प्रयास में, यह महत्वपूर्ण है कि चिन्हित जिलों में निरंतर मजबूत एमडीए कवरेज हासिल की जाए। हमारा सामूहिक दृढ़ संकल्प, लिम्फैटिक फाइलेरिया को खत्म करके स्थानीय लोगों के जीवन को बदलने में सहायता प्रदान करेगा।
इस अवसर पर स्वास्थ्य सेवा विभाग के महानिदेशक डॉ. अतुल गोयल; 9 राज्यों के प्रमुख सचिव और मिशन निदेशक; स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की अपर सचिव और मिशन निदेशक (एनएचएम) लामचोंगहोई स्वीटी चांगसन; स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजीव मांझी; संबद्ध मंत्रालयों के संयुक्त सचिव, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय वेक्टर-जनित रोग नियंत्रण केंद्र की निदेशक डॉ. तनु जैन; कर्नाटक के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सेवा निदेशालय की निदेशक डॉ. एम. इंदुमती; 9 राज्यों के वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक और क्षेत्रीय निदेशक एवं वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी उपस्थित थे।
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