राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि उच्चतम न्यायालय से राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग का निरस्त होना संसदीय सम्प्रभुता और जनादेश का गम्भीर उल्लंघन है। राज्यसभा में कल उन्होंने कहा कि 99वें संविधान संशोधन के माध्यम से राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग एक ऐतिहासिक कदम था। उन्होंने कहा कि न्यायिक मूल संरचना सिद्धांत द्वारा इसे अमान्य बनाना गम्भीर विषय है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका को साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है और उन्हें अपने अधिकार क्षेत्रों में ही सीमित रहना चाहिए।
कल शीतकालीन सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राज्यसभा के नए सभापति जगदीप धनखड़ के मार्गदर्शन में सभी सदस्य प्रभावी ढंग से अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि अभी कुछ दिन पहले ही विश्व ने भारत को जी-20 समूह की अध्यक्षता की जिम्मेदारी सौंपी है और देश का अमृत काल आरंभ हुआ है।
यह अमृतकाल एक नये विकसित भारत के निर्माण का कालखंड तो होगा ही। साथ ही भारत इस दौरान विश्व की दिशा की भविष्य तय करने में भी बहुत अहम भूमिका निभायेगा। आदरणीय सभापति जी, भारत की इस यात्रा में हमारा लोकतंत्र, हमारी संसद, हमारी संसदीय व्यवस्था उसकी भी एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
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