भारत में साइबर सुरक्षा इको-सिस्टम को मजबूत बनाने के ध्येय से इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय प्रमुख सूचना सुरक्षा अधिकारियों (सीआईएसओ) के लिये एक सप्ताह का गहरे-पानी-पैठ (सघन) प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है। इसमें केंद्र, राज्य सरकारों विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और बैंक संगठनों के तकनीकी प्रमुख, अग्रिम मोर्चे के आईटी स्टाफ भी शामिल होंगे।
संयोग से इसी दौरान राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा माह समारोह भी चल रहे हैं। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय ई-शासन प्रभाग (एन-ई-जीडी) द्वारा आयोजित श्रृंखलाबद्ध कार्यशालाओं का अंग है। ये कार्यशालायें इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एन-ई-जीडी की साइबर सुरक्षित भारत पहल के तहत आयोजित की जा रही हैं। इनसे सीआईएसओ और अन्य प्रतिभागियों को साइबर दुनिया के बदलते आयामों को बेहतर रूप से समझने और खुद को लैस करने में मदद मिलेगी, ताकि वे एक सुरक्षित साइबर-स्पेस के लाभों को वैयक्तिक संगठनों तथा बड़े पैमाने पर नागरिकों तकपहुंचाने में सक्षम होंगे। सीआईएसओ की भूमिका संगठनों में साइबर सुरक्षा की खामियों का विश्लेषण करने और उस खामी को दूर करने की योजना व रणनीति बनाने तथा उन्हें दुरुस्त करने की है।
अपने प्रमुख वक्तव्य में एन-ई-जीडी के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिषेक सिंह ने कहा कि यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, बैंकों में प्रमुख सूचना सुरक्षा अधिकारियों को न सिर्फ प्रशिक्षित किया जाये, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिये कि वे भारत के साइबर सुरक्षा दूत बनकर साइबर सुरक्षा का संदेश हर तरफ फैला सकें।
उन्होंने कहा, “अगर हम सही तौर-तरीकों के प्रति जागरूक होंगे, तो हम ऐसी संस्कृति अपना सकेंगे, जो साइबर सुरक्षा को सुनिश्चित करती हो। साथ ही हम खुद नई उभरने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिये तैयार कर सकेंगे।” विश्व साइबर सुरक्षा सूचकांक में 2018 में भारत का 47वां स्थान था। भारत 2021 में अब दसवें स्थान पर पहुंच गया है। इसका हवाला देते हुये उन्होंने कहा कि भारत को सर्वाधिक साइबर सुरक्षित देश बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान की बदौलत सूचकांक में यह सुधार आया है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान एन-ई-जी-डी के सीओओ विनय ठाकुर ने आह्वान किया कि साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूकता पैदा करने की फौरन जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिस समय वाई-फाई, ब्लूटूथ, आरएफआईडी, तमाम तरह के एप्प, व्यक्तिगत डाउनलोड और उनके इस्तेमाल के समय मोबाइल तथा कंप्यूटर के जरिये जो भी भारी मात्रा में आंकड़ों का आदान-प्रदान होता है, उनके सम्बंध में साइबर खतरा बढ़ जाता है, जिसे कम करने के उपाय किये जाने होंगे।
इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने जनवरी 2018 में साइबर सुरक्षित भारत पहल शुरूआत की थी। यह अपने तरह की पहली सार्वजनिक-निजी भागीदारी थी, जिसमें साइबर सुरक्षा में सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग की विशेषज्ञता का उपयोग किया गया था। प्रगत संगणन विकास केंद्र (सी-डैक), इंडियन कंप्यूटर एमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (सीईआरटी-इन), राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी), मानकीकरण परीक्षण और गुणवत्ता प्रमाणन निदेशालय (एसटीक्यूसी) इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में ज्ञान-साझीदार हैं।
यह कार्यक्रम 25 अक्टूबर से 30 अक्टूबर, 2021 तक चलेगा। सत्रों के समापन पर आशा की जाती है कि सभी प्रमुख सूचना सुरक्षा अधिकारी अपने-अपने संगठनों में साइबर सुरक्षा चुनौतियों का मुकाबला करने तथा साइबर अपराध के बारे में पर्याप्त जागरूकता फैलानेमें सक्षम हो जायेंगे। कार्यक्रम के जरिये सभी सरकारी विभागों के प्रमुख सूचना सुरक्षा अधिकारी और अग्रिम मोर्चे के आईटी स्टाफ को सुऱक्षा उपाय करने में समर्थ बना दिया जायेगा।
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