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सरकार ने प्रमुख बंदरगाहों पर सार्वजनिक-निजी-साझेदारी (पीपीपी) परियोजनाओं के लिए नए आदर्श (मॉडल) रियायत समझौते- 2021 की घोषणा की

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने आज प्रमुख बंदरगाहों पर सार्वजनिक-निजी-साझेदारी (पीपीपी) परियोजनाओं के लिए संशोधित आदर्श (मॉडल) रियायत समझौते (एमसीए)- 2021 की घोषणा की। एक वक्तव्य में उन्होंने कहा कि नया आदर्श रियायत समझौता (एमसीए) प्रमुख बंदरगाहों पर भविष्य की सभी पीपीपी परियोजनाओं के साथ-साथ उन परियोजनाओं पर भी लागू होगा जो पहले से ही सरकार द्वारा अनुमोदित हैं लेकिन अभी भी वे बोली के चरण में हैं। उन्होंने बताया कि इस समय इस क्षेत्र में 80 से अधिक सार्वजनिक-निजी-साझेदारी (पीपीपी)/भू-स्वामित्व परियोजनाएं हैं, जिनमें विभिन्न चरणों में 56,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। इनमें से 40,000 करोड़ रुपये की 53 चालू परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं, जबकि 16,000 करोड़ रुपये से अधिक की 27 परियोजनाएं क्रियान्वयन के चरण में हैं।

मंत्री महोदय ने जानकारी दी कि सभी क्षेत्रों से सर्वोत्तम प्रथाओं और व्यापक हितधारक परामर्श से तैयार किए गए कई बदलावों के साथ, यह मॉडल रियायत समझौता- 2021 (एमसीए) बंदरगाहों के क्षेत्र में विकासकर्ताओं (डेवलपर्स), निवेशकों और उन ऋणदाताओं तथा अन्य हितधारकों का अधिक विश्वास जगाएगा और इस क्षेत्र में निवेश के लिए उत्प्रेरित करेगा। भविष्य को ध्यान में रखते हुए पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025 तक सार्वजनिक-निजी-साझेदारी (पीपीपी) पर हस्तांतरित की जाने वाली 14,600 करोड़ रुपये से अधिक की 31 परियोजनाओं की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से परिभाषित कर दिया है और यह आशा है कि उसे नए आदर्श रियायत समझौते (एमसीए) – 2021 पर हितधारकों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिलेगी।

आदर्श (मॉडल) रियायत समझौते (एमसीए) – 2021 में किए गए प्रमुख परिवर्तनों के बारे में बात करते हुए, सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि कानून में परिवर्तन होने अथवा अप्रत्याशित घटनाओं के कारण कार्गो में बदलाव का प्रावधान पहली बार प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि विगत में ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें बाहरी और अप्रत्याशित कारकों के चलते रियायत अवधि के दौरान किसी विशेष वस्तु के लिए परिवहन में गिरावट आई थी और जिससे बन्दरगाह टर्मिनल की समग्र व्यवहार्यता पर प्रभाव पडा है। तब रियायत प्राप्तकर्ताओं के पास किसी दूसरे कार्गो को संभालने की अनुमति भी नहीं थी और ऐसे में निर्मित परिसंपत्ति का इष्टतम उपयोग भी नहीं हो रहा था। मंत्री महोदय ने कहा कि अब किए गए प्रावधान से ऐसी स्थिति में कार्गो में बदलाव करने की छूट मिलेगी और छूटग्राही के लिए जोखिम कम होगा।

सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि नए एमसीए में छूटग्राहियों को बाजार की स्थितियों के आधार पर अपने कराधान (टैरिफ) को निर्धारित करने के लिए लचीलापन प्रदान करने का प्रावधान किया गया है जो प्रमुख बंदरगाहों पर कार्गो के लिए निजी बंदरगाहों के साथ प्रतिस्पर्धा करने हेतु निजी टर्मिनलों के लिए समान अवसर उपलब्ध कराएगा। इसके अलावा ऋण दाताओं के लिए जोखिम को कम करने और परियोजना को बैंक प्रावधानों के अधिक योग्य बनाने के लिए इसमें वाणिज्यिक संचालन तिथि (सीओडी) से पहले छूटग्राही को चूक की स्थिति के लिए मुआवजे का प्रावधान जोड़ा गया है। प्रदर्शन और आपसी समझौते के आधार पर रियायत अवधि के विस्तार की प्रक्रिया को दर्शाने वाला एक अन्य प्रावधान भी इसके साथ प्रस्तुत किया गया है। सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि कुल मिलाकर सभी जोखिमों को संतुलित करते हुए सार्वजनिक और निजी दोनों पक्षों की जिम्मेदारियों के संदर्भ में अधिक स्पष्टता प्रदान की गई है।

बंदरगाह क्षेत्र में पहली सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) परियोजना 1997 में उस समय शुरू की गई थी जब जवाहर लाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) में एक टर्मिनल किसी निजी पार्टी को दिया गया था। तब से देश के बंदरगाह क्षेत्र में पीपीपी वातावरण में भारी प्रगति हुई है। बंदरगाह क्षेत्र में पीपीपी परियोजनाओं को नियंत्रित करने वाला आदर्श (मॉडल) रियायत समझौता (एमसीए) पहली बार वर्ष 2008 में प्रस्तुत किया गया था और बाद में हितधारकों की प्रतिक्रिया के आधार पर इसे 2018 में संशोधित किया गया था।

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