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संसद ने अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2023 पारित किया

राज्यसभा ने आज अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2023 पारित कर दिया। इस विधेयक का उद्देश्य अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम 2002 (ओएएमडीआर अधिनियम) में संशोधन करना है। लोकसभा ने इसे 01.08.2023 को पारित किया था। विधेयक को अब राष्ट्रपति को सहमति के लिए भेजा जाएगा।

अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन अपतटीय क्षेत्रों में परिचालन अधिकारों के आवंटन की पद्धति के रूप में नीलामी व्यवस्था लागू करके प्रमुख सुधार लाएगा।

ओएएमडीआर अधिनियम, 2002 वर्ष 2010 में लागू किया गया। लेकिन अभी तक अपतटीय क्षेत्रों में किसी तरह का खनन कार्य नहीं हुआ है। इसलिए केंद्र सरकार ने अपतटीय खनन क्षेत्र में अनेक सुधार लाने के लिए वर्तमान संशोधन विधेयक का प्रस्ताव किया।

ओएएमडीआर अधिनियम के वर्तमान स्वरूप में विवेकाधिकार की गुंजाइश है और अपतटीय क्षेत्रों में परिचालन अधिकारों के निष्पक्ष और पारदर्शी आवंटन का कोई प्रावधान नहीं है। खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम 1957 (एमएमडीआर अधिनियम) को जनवरी 2015 में संशोधित किया गया ताकि अपतटीय क्षेत्रों में नीलामी के माध्यम से खनिज रियायतें आवंटित की जा सकें। इसके प्रारंभ होने के बाद से खनन लीज या कंपोजिट लाइसेंस की मंजूरी के लिए 286 खनिज ब्लॉकों की नीलामी की गई है। इस पारदर्शी प्रक्रिया से राज्य सरकारों को नीलामी प्रीमियम के मामले में अतिरिक्त राजस्व स्रोत प्राप्त हुआ है। ओएएमडीआर अधिनियम में वर्तमान संशोधन के माध्यम से नीलामी व्यवस्था करने से इस क्षेत्र को आवश्यक गति मिलने की आशा है।

भारत की समुद्री स्थिति अनूठी है। भारत का 20 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक का विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) महत्वपूर्ण वसूली योग्य संसाधन रखता है। जीएसआई ने अपतटीय क्षेत्रों में निम्नलिखित खनिजों के संसाधनों का वर्णन किया है:

गुजरात और महाराष्ट्र के तटों पर ईईजेड के भीतर 1,53,996 मिलियन टन चूना मिट्टी।

केरल तट पर 745 मिलियन टन निर्माण-ग्रेड रेत।

ओडिशा, आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु और महाराष्ट्र के इनर-शेल्फ और मिड-शेल्फ में 79 मिलियन टन भारी खनिज क्षेत्र।

पूर्वी और पश्चिमी महाद्वीपीय मार्जिन में फॉस्फोराइट।

अंडमान सागर और लक्षद्वीप सागर में पॉलीमेटेलिक फेरोमैंगनीज (Fe-Mn) के पिंड और परत।

भारत का लक्ष्य एक उच्च-विकास अर्थव्यवस्था बनना है, इसे अपनी अधिकतम क्षमता के लिए अपने समुद्री संसाधनों का उपयोग करने की आवश्यकता है। इन समुद्री संसाधनों की पूरी क्षमता का उपयोग करने के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। निजी क्षेत्र ईईजेड में वर्तमान खनिज संसाधनों का पता लगाने और खनन कार्य के लिए आवश्यक विशेषज्ञता और प्रौद्योगिकी लाएगा।

संशोधन विधेयक की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैः

अधिनियम के अंतर्गत निजी क्षेत्र को केवल स्पर्धी बोली द्वारा नीलामी के माध्यम से दो प्रकार के परिचालन अधिकार प्रदान किए जाएंगे, अर्थात् उत्पादन पट्टा और कंपोजिट लाइसेंस।

अधिनियम में प्रस्तुत कंपोजिट लाइसेंस उत्पादन परिचालन के बाद अन्वेषण के उद्देश्य से प्रदान किया गया दो चरण का परिचालन अधिकार है।

केन्द्र सरकार द्वारा आरक्षित खनिज वाले क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को परिचालन अधिकार प्रदान किए जाएंगे।

परमाणु खनिजों के मामले में केवल सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों को परिचालन अधिकार प्रदान करने का प्रावधान किया गया है।

उत्पादन लीज के नवीकरण के प्रावधान को हटा दिया गया है और एमएमडीआर अधिनियम की तरह इसकी अवधि 50 वर्ष निर्धारित की गई है।

अपतटीय क्षेत्र में एक व्यक्ति द्वारा प्राप्त किए जा सकने वाले कुल क्षेत्र पर सीमा लागू की गई है। अब कोई व्यक्ति एक या अधिक परिचालन अधिकारों (एक साथ लिया गया) के अंतर्गत किसी भी खनिज या संबंधित खनिजों के निर्धारित समूह के संबंध में 45 मिनट अक्षांश और 45 मिनट देशांतर से अधिक प्राप्त नहीं कर सकता है।

अन्वेषण, अपतटीय खनन के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने, आपदा राहत, अनुसंधान, अन्वेषण या उत्पादन कार्यों से प्रभावित व्यक्तियों के हित और लाभ आदि के लिए धन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक पुनरावर्तनीय अपतटीय क्षेत्र खनिज न्यास की स्थापना का प्रावधान किया गया है जो भारत के लोक लेखा के अंतर्गत एक निधि का रख-रखाव करेगा। यह खनिजों के उत्पादन पर एक अतिरिक्त लेवी द्वारा वित्त पोषित किया जाएगा, जो रॉयल्टी के एक तिहाई से अधिक नहीं होगा। अतिरिक्त लेवी की सही दर केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित की जाएगी।

व्यवसाय सुगम्यता को बढ़ावा देने के लिए कम्पोजिट लाइसेंस या प्रोडक्शन लीज के आसान ट्रांसफर का प्रावधान किया गया है।

लीज से समय पर उत्पादन शुरू करने को सुनिश्चित करने के लिए, विधेयक में उत्पादन प्रारंभ करने और उत्पादन लीज के निष्पादन के बाद प्रेषण के लिए समय सीमा प्रस्तुत की गई है।

अपतटीय क्षेत्रों से खनिजों के उत्पादन से रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम और अन्य राजस्व भारत सरकार को मिलेंगे।

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