शुक्रवार, 31 जनवरी, 2025 से प्रारंभ हुआ संसद का बजट सत्र, 2025, शुक्रवार, 4 अप्रैल, 2025 को अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया। इस बीच, दोनों सदनों को गुरुवार, 13 फरवरी, 2025 को अवकाश के लिए स्थगित कर दिया गया ताकि सोमवार, 10 मार्च, 2025 को पुनः समवेत हुआ जा सके ताकि विभाग से संबंधित स्थायी समितियां विभिन्न मंत्रालयों/विभागों से संबंधित अनुदानों की मांगों की जांच कर सकें और उन पर रिपोर्ट दे सकें।
केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आज संसद के बजट सत्र, 2025 की समाप्ति के बाद पत्रकार सम्मेलन को संबोधित किया। इस अवसर पर विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन भी उपस्थित थे। किरेन रिजिजू ने बताया कि बजट सत्र के पहले भाग में लोकसभा और राज्यसभा की कुल 9 बैठकें हुईं। सत्र के दूसरे भाग में दोनों सदनों की 17 बैठकें हुईं। पूरे बजट सत्र के दौरान कुल 26 बैठकें हुईं।
वर्ष का पहला सत्र होने का कारण राष्ट्रपति ने 31 जनवरी, 2025 को संविधान के अनुच्छेद 87(1) के अनुसार संसद के दोनों सदनों में संयुक्त संबोधन किया। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव रामवीर सिंह बिधूड़ी ने पेश किया और रविशंकर प्रसाद ने इसका समर्थन किया। इस मद पर लोकसभा में 12 घंटे के आवंटित समय के मुकाबले 17 घंटे 23 मिनट तक चर्चा हुई। 173 सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया। राज्यसभा में इसे किरण चौधरी ने पेश किया और नीरज शेखर ने इसका समर्थन किया। इस मद पर राज्यसभा में 15 घंटे के आवंटित समय के मुकाबले 21 घंटे 46 मिनट तक चर्चा हुई। 73 सदस्यों ने बहस में भाग लिया। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्तावों पर सत्र के पहले भाग के दौरान दोनों सदनों द्वारा प्रधानमंत्री के उत्तर के बाद चर्चा की गई और उन्हें अपनाया गया।
वर्ष 2025-26 के लिए केंद्रीय बजट शनिवार, 1 फरवरी, 2025 को प्रस्तुत किया गया। सत्र के पहले भाग में दोनों सदनों में केंद्रीय बजट पर सामान्य चर्चा हुई। इस पर लोक सभा ने आवंटित समय 12 घंटे के मुकाबले 16 घंटे 13 मिनट तक चर्चा की और 169 सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया। इसी प्रकार राज्य सभा ने आवंटित समय 15 घंटे के मुकाबले 17 घंटे 56 मिनट तक चर्चा की और 89 सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया।
सत्र के दूसरे भाग के दौरान, रेलवे, जल शक्ति और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर चर्चा की गई और लोकसभा में मतदान किया गया। अंत में शेष मंत्रालयों/विभागों की अनुदान मांगों को शुक्रवार, 21 मार्च, 2025 को सदन में मतदान के लिए प्रस्तुत किया गया। संबंधित विनियोग विधेयक भी 21 मार्च,2025 को ही लोकसभा में पेश किया गया, उस पर विचार किया गया और उसे पारित कर दिया गया।
वर्ष 2024-25 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगों के दूसरे और अंतिम बैच से संबंधित विनियोग विधेयक; वर्ष 2021-22 के लिए अनुदानों की अतिरिक्त मांगें और वर्ष 2024-25 के लिए मणिपुर की अनुदानों की अनुपूरक मांगें और मणिपुर राज्य के संबंध में वर्ष 2025-26 के लिए लेखानुदान की मांगों को भी लोकसभा में 11 मार्च,2025 को पारित किया गया।
वित्त विधेयक, 2025 को 25 मार्च,2025 को लोक सभा द्वारा पारित किया गया।
राज्यसभा में शिक्षा, रेलवे, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा गृह मंत्रालयों के कार्यों पर चर्चा की गई।
राज्य सभा ने वर्ष 2024-25 के लिए दूसरे और अंतिम बैच के अनुपूरक अनुदान मांगों; वर्ष 2021-22 के लिए अतिरिक्त अनुदान मांगों और वर्ष 2024-25 के लिए मणिपुर के लिए अनुपूरक अनुदान मांगों और मणिपुर राज्य के संबंध में वर्ष 2025-26 के लिए लेखानुदान मांगों से संबंधित विनियोग विधेयकों को 18 मार्च, 2025 को लौटा दिया।
वर्ष 2025-26 के लिए संघ के लिए अनुदानों की मांगों से संबंधित विनियोग विधेयक और वित्त विधेयक, 2025 भी 27 मार्च, 2025 को राज्य सभा द्वारा लौटा दिए गए।
इस प्रकार संसद के सदनों में संपूर्ण वित्तीय कार्य 31 मार्च, 2025 से पहले पूर्ण हो गया।
मणिपुर राज्य के संबंध में संविधान के अनुच्छेद 356(1) के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा 13 फरवरी, 2025 को जारी की गई घोषणा को मंजूरी देने वाला वैधानिक संकल्प भी क्रमशः 3 और 4 अप्रैल, 2025 को दोनों सदनों की विस्तारित बैठकों में अपनाया गया।
संयुक्त समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद, वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पारित किया गया, जिसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार, वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन से संबंधित हितधारकों के सशक्तिकरण, सर्वेक्षण, पंजीकरण और मामले के निपटान की प्रक्रिया में दक्षता में सुधार और वक्फ संपत्तियों के विकास पर ध्यान केंद्रित करना है। जबकि मुख्य उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन करना है, इसका उद्देश्य बेहतर प्रशासन के लिए आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों को लागू करना है।”मुसलमान वक्फ अधिनियम, 1923 को भी निरस्त कर दिया गया।
आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2025, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के कुशल कामकाज को मजबूत करने के लिए आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में काम करने वाले विभिन्न संगठनों की भूमिकाओं में अधिक स्पष्टता और अभिसरण लाने की मांग करता है, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों को राष्ट्रीय स्तर और राज्य स्तर पर आपदा योजना तैयार करने के लिए सशक्त बनाता है, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर आपदा डेटाबेस बनाने का प्रावधान करता है, राज्य की राजधानी और नगर निगम वाले बड़े शहरों के लिए “शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण” के गठन का प्रावधान करता है और राज्य सरकार द्वारा “राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल” के गठन का प्रावधान भी करता है।
सहकारी क्षेत्र में शिक्षा, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण करने तथा संबंधित क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास गतिविधियों को शुरू करने के लिए “त्रिभुवन” सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना से संबंधित “त्रिभुवन” सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक, 2025 भी पारित किया गया। यह विश्वविद्यालय डिग्री कार्यक्रम, दूरस्थ शिक्षा और ई-लर्निंग पाठ्यक्रम प्रदान करेगा तथा सहकारी क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र विकसित करेगा।
भारत में प्रवेश करने और भारत से बाहर जाने वाले व्यक्तियों के संबंध में पासपोर्ट या अन्य यात्रा दस्तावेजों की आवश्यकता के लिए कानूनों को सरल बनाने और वीज़ा और पंजीकरण की आवश्यकता सहित विदेशियों से संबंधित मामलों को विनियमित करने के लिए आव्रजन और विदेशी विधेयक, 2025 पारित किया गया है।
बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक, 2025 भी पारित किया गया ताकि शासन मानकों में सुधार हो, बैंकों द्वारा आरबीआई को रिपोर्टिंग में स्थिरता प्रदान की जा सके, जमाकर्ताओं और निवेशकों के लिए बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में लेखा परीक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो और नामांकन आदि के संबंध में ग्राहकों को सुविधा प्रदान की जा सके।
इस सत्र के दौरान कुल 11 विधेयक (लोकसभा में 10 और राज्यसभा में 1) प्रस्तुत किए गए। 16 विधेयक लोकसभा द्वारा पारित किए गए और 14 विधेयक राज्यसभा द्वारा पारित/वापस किए गए। संसद के दोनों सदनों द्वारा कुल 16 विधेयक पारित किए गए।
बजट सत्र, 2025 के दौरान लोकसभा की उत्पादकता लगभग 118 प्रतिशत और राज्यसभा की उत्पादकता लगभग 119 प्रतिशत थी।
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