भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की स्वायत्त संस्था संगीत नाटक अकादमी ने आज रवीन्द्र भवन, नई दिल्ली में ‘कला-दीक्षा’ समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर विभिन्न प्रदर्शन कलाओं के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जुड़े गुरुओं को गुरु-शिष्य परंपरा के तहत सम्मानित किया गया। इस सम्मान समारोह में केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी. किशन रेड्डी मुख्य अतिथि थे। इस अवसर पर संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा और संस्कृति मंत्रालय में संयुक्त सचिव उमा नंदूरी भी उपस्थित थीं।
केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी. किशन रेड्डी ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि सरकार, भारत की विशाल अमूर्त मान्य सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है और इन अमूर्त कला रूपों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक प्रसारित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा प्रदर्शन कला और कलाकारों के कल्याण से संबंधित कई योजनाएं शुरू की गई हैं। गुरु-शिष्य परंपरा के अनुसार विभिन्न प्रदर्शन कला रूपों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस योजना के तहत, संगीत नाटक अकादमी द्वारा विभिन्न राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश, असम, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, केरल, लद्दाख, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड, ओडिशा, पुडुचेरी, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में गुरु-शिष्य परंपरा के अनुसार 70 से अधिक ऐसे नए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। ऐसे 30 प्रशिक्षण कार्यक्रम पहले से ही संचालित किये जा रहे हैं। इस प्रकार अब इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों की संख्या 30 से बढ़कर 100 हो जायेगी।
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