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शहर-प्रणाली के वार्षिक सर्वेक्षण (ASICS) 2023 रिपोर्ट का छठा संस्करण जारी

भारत में शहरी प्रणालियों पर वार्षिक सर्वेक्षण (एएसआईसीएस) रिपोर्ट ने भारतीय शहरों में स्थानीय शासन का पहला राष्ट्रव्यापी विश्लेषण प्रदान किया और तब से नागरिक-केंद्रित सोच के माध्यम से शहर-आधारित विश्लेषण और नगरपालिका प्रदर्शन के मूल्यांकन के दायरे का विस्तार किया गया है। आवास एवं शहरी मामले और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि इस एएसआईसीएस रिपोर्ट ने भारतीय शहरों में स्थानीय शासन का पहला राष्ट्रव्यापी विश्लेषण प्रदान किया और तब से नागरिक-केंद्रित सोच से शहर-आधारित विश्लेषण और नगरपालिका प्रदर्शन के मूल्यांकन के दायरे का विस्तार किया गया है। मंत्री महोदय ने आज नई दिल्ली के होटल इंपीरियल में जनाग्रह और रेनमैटर फाउंडेशन द्वारा सह-आयोजित एक कार्यक्रम में भारत में शहर-प्रणाली के वार्षिक सर्वेक्षण अर्थात (एन्युअल सर्वे ऑफ़ इंडियन सिटीज सिस्टम – एएसआईसीएस) 2023 रिपोर्ट का छठा संस्करण जारी किया।

इस रिपोर्ट को एक सावधानीपूर्वक किया गया सराहनीय प्रयास बताते हुए मंत्री महोदय ने कहा कि इस रिपोर्ट में भारत में शहरी विकास से संबंधित डेटासेट से सम्बद्ध 82 नगरपालिका विधान, 44 शहर और देश नियोजन अधिनियम, 176 संबद्ध अधिनियम, नियम और अधिसूचनाएं, 32 अन्य नीति / योजना दस्तावेज़ और 27 अतिरिक्त का अध्ययन शामिल है ।

इस रिपोर्ट में की गई 10 प्रमुख अनुशंसाओं के संबंध में मंत्री महोदय ने कहा कि ‘परिवर्तन के ये 10 साधन’ शहरी प्रशासन में विकेंद्रीकरण और हस्तांतरण के सिद्धांतों को और गहरा करने के साथ ही 74वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम की भावना भी को पुनर्जीवित कर सकते हैं।

हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि रिपोर्ट में शहरी प्रशासन में विकेंद्रीकरण और हस्तांतरण के इस एजेंडे की दिशा में काम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के अंतर्गत सरकार द्वारा उठाए गए अभूतपूर्व कार्यों को स्वीकार किया गया है। उन्होंने 13वें वित्त आयोग से 15वें वित्त आयोग तक शहरी स्थानीय निकायों (अर्बन लोकल बॉडीज-यूएलबी) को वित्त आयोग के अनुदान में छह गुना वृद्धि का उल्लेख किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि 15वें वित्त आयोग ने दस लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरी समूहों और अन्य शहरों के बीच अंतर किया है, जिसमें वायु गुणवत्ता, जल आपूर्ति और स्वच्छता के लिए प्रोत्साहन के साथ 50 शहरी समूहों को लगभग 38,196 करोड़ रुपये का 100 प्रतिशत परिणाम-आधारित वित्त पोषण उपलब्ध कराया गया है।

उन्होंने आगे कहा कि अमृत (एएमआरयूटी) कार्यक्रम ने शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबीएस) में ऐसे 11 अनिवार्य सुधारों की स्थापना की है, जिसमें शहरों की साख में सुधार, नगरपालिका बांडों का संचालन और नगरपालिका कैडर का व्यावसायीकरण शामिल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 12 शहर पहले ही नगरपालिका बांड के माध्यम से 4,384 करोड़ रुपये से अधिक जुटा चुके हैं।

सरकार ने भवन उपनियमों के आधुनिकीकरण जैसे शहरी नियोजन सुधारों को शुरू करने, हस्तांतरणीय विकास अधिकारों को अपनाने, प्रकृति-आधारित समाधानों के माध्यम से हरित बुनियादी ढांचे का एकीकरण, यथास्थान पुनर्वास के माध्यम से लागत प्रभावी आवास, भू-स्थानिक सूचना प्रणाली-आधारित मास्टर प्लानिंग और ऑनलाइन भवन स्वीकृति प्रणाली (ऑनलाइन बिल्डिंग परमिशन सिस्टम –ओबीपीएस) जैसे शहरी नियोजन सुधारों को शुरू करने के लिए अभूतपूर्व मात्रा में धन वितरित किया है।

हमारे शहरों को चुनौती के स्थान पर एक अवसर के रूप में स्वीकारते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत के शहरी विकास प्रतिमान (पैराडाइम) में एक क्रांति ला दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारे शहरों और कस्बों के परिवर्तन में 2014 से 18 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है।

मंत्री महोदय ने कहा कि 2014 के बाद से सरकार ने विश्व में कहीं भी सबसे व्यापक एवं योजनाबद्ध शहरीकरण कार्यक्रम शुरू किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई- शहरी), स्वच्छ भारत मिशन – शहरी, अमृत, स्मार्ट सिटीज मिशन, प्रधानमन्त्री (पीएम) स्वनिधि(एसवीएनिधि) मिशन और दीनदयाल अन्त्योदय योजना – राष्ट्रीय आजीविका मिशन (डीएवाई- एनयूएलएम) जैसी पहलों / मिशनों के बारे में चर्चा की, जो कि शहरी क्षेत्रों की वृद्धि और विकास में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं।

मंत्री महोदय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई-शहरी) के अंतर्गत लगभग 1.19 करोड़ घरों को स्वीकृति दी गई है। उन्होंने कहा, 1.13 करोड़ से अधिक घरों का निर्माण पहले ही पूरा हो चुका है और 77 लाख घरों को आवंटित किया जा चुका है ।

स्वच्छ भारत मिशन- शहरी के बारे में मंत्री महोदय ने कहा कि इस मिशन से पूरे भारत में स्वच्छता के प्रति व्यवहार में बदलाव आया है। सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग 2014 में 17 प्रतिशत से बढ़कर आज 76 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने आने वाले वर्षों में 100 प्रतिशत अपशिष्ट प्रसंस्करण हासिल करने का विश्वास व्यक्त किया।

मंत्री महोदय ने कहा कि अमृत (एएमआरयूटी) ने 1.72 करोड़ से अधिक जल नल कनेक्शन और 1.35 करोड़ सीवर कनेक्शन प्रदान करके 500 शहरों में पानी और सीवरेज जैसे बुनियादी सामाजिक बुनियादी ढांचे का समाधान किया है। उन्होंने कहा कि अब अमृत 2.0 हमारे शहरों को ‘जल सुरक्षित’ बनाने की आकांक्षा से आगे बढ़ने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।

स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत उन्होंने कहा कि 1.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की 6,069 परियोजनाओं का काम पूरा हो चुका है।

मंत्री महोदय ने इस बात पर प्रकाश डाला कि वर्तमान में हमारे पास लगभग 871 किलोमीटर लंबी मेट्रो लाइनों के साथ दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क है और 905 किलोमीटर और मेट्रो नेटवर्क के निर्माण के बाद, भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क बन जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि “दीनदयाल अन्त्योदय योजना – राष्ट्रीय आजीविका मिशन (डीएवाई-एनयूएलएम) के अंतर्गत 34.2 लाख से अधिक आजीविकाओं का सृजन किया गया है और इस मिशन ने 14.9 लाख उम्मीदवारों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया”।

शहरी क्षेत्रों का आकांक्षा और अवसर के स्थान के रूप में उल्लेख करते हुए मंत्री महोदय ने कहा कि शहर आर्थिक विकास और नवाचार के केंद्र हैं। भारत की अधिकांश आर्थिक प्रगति उसके शहरों की उत्पादकता में निहित है। उन्होंने कहा कि हमारे शहरों में विद्यमान उच्च विकास की संभावनाओं का दोहन करने के लिए हमें शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है जो हमारे नागरिकों के लिए शासन का प्राथमिक इंटरफ़ेस हैं। उन्होंने कहा कि यूएलबी नागरिकों को अपनी समस्याओं एवं विषयों को सामने लाने के लिए राजनीतिक अवसर प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि जहां भी स्थानीय निर्वाचित नेताओं, महापौरों, नगर निगम आयुक्तों और राज्य सरकारों ने मिलकर काम किया है वहां हमने अविश्वसनीय परिणाम देखे हैं। उन्होंने आगे कहा कि “स्वच्छ भारत मिशन में, मेयरों को देश भर के हर वार्ड और कॉलोनी में जागरूकता अभियान का नेतृत्व करते देखा गया।”

मंत्री ने महोदय कहा कि “हमें अपने महापौरों और नगर परिषदों को सशक्त बनाने पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि उन्होंने सफलतापूर्वक यह प्रदर्शित किया है कि वे स्थानीय स्तर पर वैश्विक कार्रवाई चलाने में सक्षम हैं।” उन्होंने इस दिशा में विश्वास निर्माण के उपाय के रूप में दिसंबर 2021 में वाराणसी में आयोजित पहले मेयर सम्मेलन का भी उल्लेख किया।

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