पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने ड्रेजिंग (या निकर्षण) क्षेत्र में ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा लाने के लिए प्रमुख बंदरगाहों हेतु ड्रेजिंग दिशानिर्देश 2021 का परिशिष्ट जारी किया है। इससे अधिकारियों की आवश्यक मंजूरी के साथ बोली लगाने की प्रक्रिया में लाभकारी उद्देश्यों के लिए ड्रेजिंग सामग्री के उपयोग का प्रावधान किया जा सकेगा।
प्रमुख बंदरगाहों के लिए ड्रेजिंग दिशानिर्देशों की घोषणा 2021 में की गई थी, ताकि प्रमुख बंदरगाहों द्वारा द्वारा स्वीकार्य अंतरराष्ट्रीय मानकों या स्टेट मैरीटाइम एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा दरों की अनुसूची के आधार पर परियोजना लागत का अनुमान सुनिश्चित किया जा सके। लागत का यह अनुमान ड्रेजर विशेष और ड्रेजर के प्रमुख विवरणों पर आधारित होगा। दिशानिर्देशों में कैपिटल ड्रेजिंग परियोजनाओं के लिए अनुशंसित सर्वेक्षण और जांच से संबंधित नवीनतम तकनीकी प्रणालियां भी शामिल हैं।
ये दिशानिर्देश अन्य ड्रेजर्स की लागत के साथ-साथ परिचालन लागत और मोबिलाइजेशन और डिमोबिलाइजेशन को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक रूप से ड्रेजिंग की लागत का पता लगाने के लिए निर्देशित हैं। इन दिशानिर्देशों में हितों का टकराव टालने के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी और थर्ड पार्टी सर्वे के लिए दो अलग-अलग एजेंसियों को शामिल करने का निर्देश दिया गया है।
इन दिशानिर्देशों का अभिप्राय ड्रेजिंग उद्योग में किसी भी नए प्रवेशकर्ता के लिए उचित और समान अवसर प्रदान करना है, क्योंकि ये माइनर पोर्ट्स सर्वे ऑर्गनाइजेशन (एमपीएसओ) ड्रेजिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया डीसीआई पर आधारित नहीं होंगे, इनमें से एक कंपनी बंद हो चुकी है और दूसरी के अधिकांश शेयरों का विनिवेश किया गया है ; सुनिश्चित गहराई अनुबंध, ईपीसी मोड अनुबंध, अनूइटी या वार्षिकी मॉडल/हाइब्रिड वार्षिकी मॉडल आदि की अवधारणाओं को ड्रेजिंग विकल्प का रूप मानने की आवश्यकता है।
पहले जारी किए गए दिशानिर्देशों के इस परिशिष्ट के साथ, निकर्षित सामग्री के लाभकारी उपयोग का पर्याप्त रूप से पता लगाना होगा और तदनुसार ड्रेजिंग क्षेत्र में ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा को रेखांकित किया गया है, जिसे अब प्रमुख बंदरगाहों, भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) और ड्रेजिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (डीसीआई), जो पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है, को जारी किया जा रहा है।
ड्रेजिंग दिशानिर्देशों का यह परिशिष्ट -निर्माण के उद्देश्यों हेतु इंजीनियरिंग उपयोग, बीच नरिशमेंट सहित पर्यावरण संवर्धन आदि के साथ ड्रेज्ड सामग्री के व्यापक लाभकारी उपयोग की रूपरेखा प्रस्तुत करता है। ड्रेजिंग परियोजना के क्षेत्र के जियो-टेक्निकल डेटा के साथ ड्रेज्ड मृदा की विशेषताओं का व्यापक अध्ययन किए जाने की आवश्यकता है।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस बात को रेखांकित किया कि निकर्षित सामग्री के लाभकारी उपयोग सहित ड्रेजिंग परियोजना के कार्यान्वयन से ड्रेजिंग की लागत में कमी आने तथा ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए 3आर के मंत्र -कम करें, पुन: उपयोग करें और रीसायकल करें -के अनुसार पर्यावरण की निरंतरता भी सुनिश्चित होने की संभावना है।’
दिशानिर्देशों के इस परिशिष्ट ने मृदा के प्रकार और विशेषताओं, निकर्षित सामग्री की अनुमानित मात्रा, निपटान स्थलों आदि के संबंध में डेटा को सम्मिलित करने की आवश्यकता को उजागर किया है, ताकि उसे संभावित बोलीकर्ताओं के समक्ष अग्रिम तौर पर रखा जा सके। इस संबंध में यह सुझाव दिया गया है कि मृदा के प्रकार और विशेषताओं, निकर्षित सामग्री की अनुमानित मात्रा, निपटान स्थलों आदि पर डेटा को संभावित बोलीकर्ताओं के समक्ष से अग्रिम तौर पर रखे जाने को अतिरिक्त दिशानिर्देश के रूप में शामिल किया जाए। यह निकर्षित सामग्री के निपटान के लिए पर्यावरण की स्थिति और सक्षम राज्य प्राधिकरण से अनुमति के अधीन है।
बोलीकर्ता को निकर्षण कार्य के निष्पादन की लागत तथा शुद्ध लागत (निकर्षण की लागत- निकर्षण सामग्री के मूल्य के लिए उद्धृत कीमत) के रूप में बोली मूल्यांकन मानक सहित निकर्षण सामग्री का अनुमानित मूल्य के साथ बोली प्रस्तुत करने का विकल्प दिया जा सकता है। ड्रेजिंग कंपनियां वेस्ट टू वेल्थ की अवधारणा को बढ़ावा देते हुए निकर्षण सामग्री का निपटान कर सकती हैं।
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