विदेश मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने बहुपक्षीय व्यवस्था में मौलिक सुधार पर बल दिया है। रायसीना संवाद में आज सुबह एक पैनल चर्चा में डॉ. जयशंकर ने कहा कि जब संयुक्त राष्ट्र का गठन हुआ तो इसमें लगभग 50 सदस्य थे।
अब संयुक्त राष्ट्र में सदस्यों की संख्या इससे चार गुणा अधिक है। डॉ. जयशंकर ने कहा कि यह एक आम धारणा है कि जब सदस्यों की संख्या चार गुना अधिक हो चुकी है तो यह पुराने तरीके से ही काम नहीं कर सकता है।
विदेश मंत्री ने कहा कि अगर हम सभी बड़े मुद्दों के लिए पिछले पांच वर्षों पर नजर डालें तो इनका बहुपक्षीय समाधान तलाशने में कठिनाई होगी।
परिणामों का अभाव ही इसमें सुधार की आवश्यकता दर्शाती है। उन्होंने कहा कि वैश्विक नियम एकपक्षीय हित में नहीं होने चाहिये। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि जी-20 की अध्यक्षता के दौरान एक बडी शक्ति के रूप में भारत की छवि उभर कर सामने आई। उन्होंने कहा कि भारत विश्वामित्र की अवधारणा को बढावा देने की कोशिश कर रहा है।
इस चर्चा में बोलिविया के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज क्विरोगा, नीदरलैंड्स की विदेश मंत्री हांके ब्रून्स स्लॉट, तंजानिया के विदेश मंत्री जनवरी मकाम्बा और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार अनवर बिन मोहम्मद गर्गश ने भागीदारी की।
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