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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई दिल्ली में ‘प्रवर्तन मामलों में सहयोग पर प्रथम वैश्विक सम्मेलन (GCCEM)’ का उद्घाटन किया

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई दिल्ली में प्रवर्तन मामलों में सहयोग पर प्रथम तीन दिवसीय वैश्विक सम्मेलन (जीसीसीईएम) के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में अध्यक्षता की।

उद्घाटन सत्र में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी सम्मानित अतिथि थे और विश्व सीमा शुल्क संगठन के महासचिव डॉ. कुनियो मिकुरिया विशेष अतिथि थे। संजय कुमार अग्रवाल, अध्यक्ष, सीबीआईसी, बोर्ड के सदस्यगण और विभाग एवं भारत की विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों/संगठनों के अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

जीसीसीईएम का शुभारंभ दरअसल वर्ष 2022 में डीआरआई स्थापना दिवस के उद्घाटन समारोह में अपने पिछले साल के संबोधन में केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा दिए गए सुझाव में निहित है जिसमें समय पर खुफिया जानकारी साझा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रवर्तन एजेंसियों के बीच अधिक’से-अधिक सहयोग एवं गठबंधन करने के महत्व पर विशेष जोर दिया गया था और इसके साथ ही उन्होंने निर्देश दिया था कि भारत की जी20 अध्यक्षता के वर्ष में सीबीआईसी और डीआरआई को इस उद्देश्‍य से एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन अवश्‍य ही आयोजित करना चाहिए।

इस पृष्ठभूमि में विश्व सीमा शुल्क संगठन (डब्ल्यूसीओ), ब्रुसेल्स के परामर्श से केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के अधीनस्‍थ राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) 30 अक्टूबर से लेकर 1 नवंबर 2023 तक वैश्विक सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है जिसकी थीम है ‘नेटवर्क से लड़ने के लिए नेटवर्क की आवश्यकता होती है’। इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य अंतर्दृष्टि, एवं सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने की सुविधा प्रदान करना और भारतीय सीमा शुल्क के साझेदार प्रशासनों या संगठनों के साथ सहयोग बढ़ाने और नई साझेदारियां करने के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करना है। डब्ल्यूसीओ ने सदस्य प्रशासनों और उन अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए भारतीय सीमा शुल्क के साथ सहयोग किया है, जिनमें डब्ल्यूसीओ के क्षेत्रीय खुफिया संपर्क कार्यालय (आरआईएलओ) और डब्ल्यूसीओ के सचिवालय के वरिष्ठ प्रतिनिधित्व शामिल हैं।

वैश्विक सम्मेलन का शुभारंभ करने के लिए सीबीआईसी और डीआरआई को बधाई देते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि प्रवर्तन मामलों में सहयोग पर वैश्विक सम्मेलन दरअसल दुनिया भर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नेटवर्किंग और सहयोगात्मक प्रयासों की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे अंततः न केवल भारत की अर्थव्यवस्था, बल्कि विश्व अर्थव्यवस्था भी लाभान्वित होगी।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि सीमा शुल्क के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं यानी सुविधाजनक बनाना और प्रवर्तन। ये सीमा शुल्क और प्रवर्तन एजेंसियों के कामकाज के मूल में होने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि अधिकारियों को समर्पण भाव के साथ काम करना चाहिए, प्रौद्योगिकी का उपयोग करना चाहिए, अवैध व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट की रोकथाम के लिए घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ जानकारी और कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी साझा करनी चाहिए। इन एजेंसियों का अनुभव अंतरराष्ट्रीय व्यापार में व्याप्त बुराइयों की रोकथाम सुनिश्चित करने की दिशा और रास्ता दिखाएगा।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने लाल चंदन (रेड सैंडर्स) सहित इमारती लकड़ी के अवैध व्यापार पर अंकुश लगाने के लिए आरआईएलओ एशिया-प्रशांत और आरआईएलओ मध्य-पूर्व के सहयोग से भारतीय सीमा शुल्क विभाग के ‘ऑपरेशन शेष’ के चौथे चरण का भी शुभारंभ किया। निर्मला सीतारमण ने अन्य बहुमूल्य वनस्पतियों और जीवों के संरक्षण पर जोर देने के साथ-साथ लाल चंदन के अवैध व्यापार पर अंकुश लगाने पर विशेष बल दिया। उपरोक्त के अलावा केंद्रीय वित्त मंत्री ने यह कहते हुए अपने संबोधन का समापन किया कि प्राचीन काल की वस्तुओं को अपने-अपने देशों में वापस लाने में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को भी सहयोग करना चाहिए।

निर्मला सीतारमण ने दुनिया भर में सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसियों के बीच ज्ञान साझा करने में विश्व सीमा शुल्क संगठन की विशेष भूमिका को भी स्वीकार किया और इसके साथ ही उन्होंने अवैध व्यापार के खतरे से लड़ने के लिए विभिन्न देशों में आगे और विधायी एवं प्रक्रियात्मक बेहतरी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर विचार-मंथन पर विशेष जोर दिया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग सहित प्रौद्योगिकी में तेज विकास और नए घटनाक्रमों की चुनौतियों का उल्लेख किया। पंकज चौधरी ने इस बात पर जोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वर्तमान युग में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने एवं सहयोग बढ़ाने का महत्व अब और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।

इस अवसर पर अपने संबोधन में डब्ल्यूसीओ के महासचिव कुनियो मिकुरिया ने मार्गदर्शन के जरिए अगली पीढ़ियों तक आवश्‍यक ज्ञान या जानकारियों का हस्तांतरण करने के अलावा सभी देशों की सीमा शुल्क एजेंसियों के बीच ज्ञान साझा करने के महत्व को रेखांकित किया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में भारत सरकार के राजस्व विभाग के सचिव संजय मल्होत्रा ने तस्करी के आर्थिक प्रभावों के साथ-साथ इसके सामाजिक और राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी प्रभावों के बारे में भी बताया। संजय मल्होत्रा ने बताया कि तेजी से विकसित हो रही आधुनिक डिजिटल दुनिया ने देशों की सीमाओं को धुंधला कर दिया है और दुनिया भर में प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक कठिन चुनौती उत्‍पन्‍न कर दी है। संजय मल्होत्रा ने प्रवर्तन और व्यापार सुविधा के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया जो कि व्यापार में आसानी, प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने और ग्राहक के लिए लागत कम करने के लिए अत्‍यंत आवश्‍यक है।

अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान अपने संबोधन में सीबीआईसी के अध्यक्ष संजय कुमार अग्रवाल ने बदलते गतिशील अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में तस्करी के खतरे और अंतरराष्ट्रीय अपराधों के अंतर-संबंधों पर विशेष जोर दिया। संजय अग्रवाल ने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के माध्यम से एक ऐसा मंच तैयार करने के लिए पुरजोर प्रयास किया जा रहा है जो मौजूदा साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाने और नई साझेदारियां करने के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में काम करेगा।

डीआरआई के प्रधान महानिदेशक एम. के. सिंह ने इस आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए सभी अतिथियों और प्रतिनिधियों के साथ-साथ सीबीआईसी के अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम का धन्यवाद किया।

प्रथम जीसीसीईएम में महासचिव-डब्ल्यूसीओ, महासचिव-सीआईटीईएस और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों सहित 40 से भी ज्‍यादा कस्टम प्रशासन/संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले 75 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसके अलावा, भारत की विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रतिनिधि भी तस्करी और वाणिज्यिक धोखाधड़ी की रोकथाम के क्षेत्र में विभिन्न सत्रों वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।

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