लोकसभा ने जम्मू-कश्मीर स्थानीय निकाय कानून संशोधन विधेयक 2024 पारित कर दिया है। इस विधेयक का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर पंचायती राज अधिनियम 1989, जम्मू-कश्मीर नगरपालिका अधिनियम 2000 और जम्मू-कश्मीर नगर निगम अधिनियम 2000 के कुछ प्रावधानों में संशोधन करना है।
इस कानून का उद्देश्य केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में पंचायतों और नगर पालिकाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग-ओबीसी को आरक्षण प्रदान करना और संविधान के प्रावधानों के साथ केंद्रशासित प्रदेश के स्थानीय निकाय के कानूनों में स्थिरता लाना है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अब तक अन्य पिछड़ा वर्ग की अनदेखी की गई थी। इस विधेयक का उद्देश्य आजादी के 75 साल बाद पहली बार जम्मू-कश्मीर के अन्य पिछड़ा वर्ग के नागरिकों को न्याय प्रदान करना है।
उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर विकास की ओर अग्रसर है और इस कानून से अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय को स्थानीय निकायों में आरक्षण मिलेगा। नित्यानंद राय ने कहा कि संविधान के अनुसार स्थानीय निकाय चुनाव कराने का अधिकार राज्य चुनाव आयोग के पास होना चाहिए। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में मौजूदा कानूनों के अनुसार यह अधिकार मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास है। गृह राज्य मंत्री ने कहा कि विधेयक के प्रावधानों के अंतर्गत यह अधिकार अब जम्मू-कश्मीर के राज्य चुनाव आयोग के पास होगा। नित्यानंद राय ने कहा कि अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद, आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने की नीति के कारण जम्मू-कश्मीर में सर्वांगीण विकास, शांति और सुरक्षा देखी जा रही है।
कांग्रेस के जसबीर सिंह गिल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर स्थानीय निकायों में ओबीसी कोटा एक अच्छा कदम है। हालाँकि, उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश में स्थानीय निकायों में अल्पसंख्यक सिखों के प्रतिनिधित्व के लिए कुछ प्रावधानों की मांग की। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में स्थानीय निकायों के लिए वित्तीय स्वायत्तता के बारे में भी बात की। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि केंद्रशासित प्रदेश में पिछले 5 वर्षों से कोई निर्वाचित सरकार नहीं है और 2014 के बाद कोई चुनाव नहीं हुआ है। उन्होंने देश में जाति जनगणना कराने और आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा हटाने की भी मांग की। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सुप्रिया सुले ने पूछा कि विधानसभा चुनाव कब होंगे और जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य का दर्जा कब बहाल किया जाएगा।
तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय और नेशनल कॉन्फ्रेंस के हसनैन मसूदी ने भी ऐसी ही मांग की।
चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के जुगल किशोर शर्मा ने विधेयक को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी पर अपने शासन के दौरान केंद्रशासित प्रदेश में ओबीसी समुदाय के साथ न्याय नहीं करने का आरोप लगाया। भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अभूतपूर्व बुनियादी ढांचा विकास हुआ है और केंद्रशासित प्रदेश में एक सौ 70 नए पुलों का निर्माण किया गया है।
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की चिंता अनुराधा ने विधेयक को प्रगतिशील कानून बताते हुए कहा कि इससे स्थानीय निकायों में चुनाव प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। जनता दल यूनाइटेड के कौशलेंद्र कुमार ने भी विधेयक का समर्थन किया। शिवसेना के प्रतापराव जाधव ने महाराष्ट्र में आरक्षण के मुद्दे पर बात की।
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